उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग और ऊर्जा लेखांकन प्रणाली स्थापित करने के लिए सिस्टम मीटरिंग के परिनियोजन में तेजी लाने पर सहमति


उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग और ऊर्जा लेखांकन प्रणाली स्थापित करने के लिए सिस्टम मीटरिंग के परिनियोजन में तेजी लाने पर सहमति

राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के विद्युत और नवीन एवं  नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रियों का देा दिवसीय सम्मेलन सम्पन्न

 
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उदयपुर 15 अक्टूबर 2022। शहर की होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन का आज समापन हुआ। अंतिम दिन एटी एंड सी घाटे में कमी के लिए उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग और ऊर्जा लेखा प्रणाली स्थापित करने के लिए सिस्टम मीटरिंग की परिनियोजन में तेजी लाने पर सभी राज्यों के मंत्रियों व उप मुख्यमंत्रियों द्वारा सहमति व्यक्त की गई। 

सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय उर्जा मंत्री आर.के.सिंह ने की। इस अवसर पर केन्द्रीय उर्जा राज्य मंत्री कृष्णपालसिंह गुर्जर सहित विभिन्न राज्यों के उप मुख्यमंत्री,उर्जा व राज्यों के एनआरई मंत्रियों के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रधान सचिव मौजूद थे।  

सम्मेलन में वितरण क्षेत्र की वित्तीय व्यवहार्यता और स्थिरता, विद्युत प्रणालियों के आधुनिकीकरण और उन्नयन, और निवेश आवश्यकता और विद्युत क्षेत्र सुधारों सहित विद्युत बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विद्युत प्रणालियों के विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। राज्यों ने इनमें से प्रत्येक प्रासंगिक मुद्दे पर अपने इनपुट और सुझाव प्रदान किए।

विद्युत क्षेत्र मूल्य श्रृंखला में वित्तीय और परिचालन स्थिरता सुनिश्चित करने में वितरण क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए, समग्र तकनीकी और वाणिज्यिक (एटी एंड सी) हानियों को कम करने, लागत प्रतिबिंबित टैरिफ सुनिश्चित करने, सब्सिडी का लेखांकन और राज्य सरकारों द्वारा सब्सिडी का समय पर भुगतान, राज्य सरकार के विभागों के बकाया का निपटान और उत्पादन कंपनियों को बकाया राशि के समय पर भुगतान के लिए विद्युत (देर से भुगतान अधिभार और संबंधित मामले) नियम, 2022

(एलपीएस नियम) का पालन करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया गया। एटी एंड सी हानियों में कमी के लिए उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग और ऊर्जा लेखांकन प्रणाली स्थापित करने के लिए सिस्टम मीटरिंग के परिनियोजन में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की गई।

इसके अतिरिक्त सभी ने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं को वास्तविक ऊर्जा खपत के आधार पर केवल प्रति यूनिट के आधार पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इस बात पर संतोष व्यक्त किया गया कि विद्युत प्रणालियों की व्यवहार्यता में सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों में पर्याप्त प्रगति हुई है। अधिकांश राज्यों ने अपनी वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वित्तीय और प्रचालन दक्षता में सुधार के लिए संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत अपनी संबंधित कार्य योजना पहले ही प्रस्तुत कर दी है।

इन सभी प्रयासों और नीतियों को बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं प्रदान करने की दिशा में केंद्रित किया जाना चाहिए। वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो के लक्ष्य को प्राप्त करने और जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में राष्ट्र की प्रतिबद्धता के अनुरूप 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म संस्थापित क्षमता तक पहुंचने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा परिनियोजन बहुत महत्वपूर्ण है। 

नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के तेजी से कार्यान्वयन के लिए आवश्यक नीति, नियामक और संस्थागत इंटरवेंशनों पर विचार-विमर्श किया गया और राज्यों को भारत सरकार के गैर-जीवाश्म संस्थापित क्षमता उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए समर्थन करना चाहिए। विभिन्न प्रोत्साहन उपायों के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए समर्थकारी ढांचा बनाने पर भी जोर दिया गया।

राज्यों को 40 गीगावाट के समग्र लक्ष्य को पूरा करना सुनिश्चित करने के लिए तेजी से सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाने का प्रयास करना चाहिए। पीएम कुसुम योजना के तहत राज्यों को सोलराइजेशन में तेजी लाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बीईएसएस और पंप स्टोरेज हाइड्रो परियोजनाओं सहित ऊर्जा भंडारण का कार्यान्वयन प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। ग्रीन हाइड्रोजन, ऑफ शोर विंड, ऑफ ग्रिड और विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा (डीआरई) अनुप्रयोगों सहित भविष्य की प्रौद्योगिकियों को अनुकूलित करने की आवश्यकता है।

देश का सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए  24घंटे 7 दिन विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। अगले दशक में देश में बिजली की मांग दोगुनी होने की संभावना है और इस तरह की मांग को पूरा करने के लिए विद्युत उत्पाद,  पारेषण और वितरण में 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के आवश्यक पूंजी निवेश की जरूरत होगी। इसलिए इन निवेशों के लिए कई स्रोतों से धन जुटाना आवश्यक है।

बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के लिए निजी क्षेत्र की प्रभावी भागीदारी के लिए देश में व्यापार करने में आसानी (ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस) सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए, भारत सरकार ने एलपीएस नियम 2022, विद्युत (कानून में बदलाव के कारण लागत की समय पर वसूली) नियम 2021, विद्युत (ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना) नियम, 2022, बिजली बाजारों में आरटीएम, जीटीएएम और जीडीएएम की शुरुआत जैसी विभिन्न पहल की हैं। उर्जा मंत्री ने विद्युत क्षेत्र के समक्ष निर्धारित महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने में राज्यों से सहयोग मांगा।

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