जीएसटी मामले पर प्राईवेट कॉलेज ऐसोसिएशन को छात्र हित में मिला हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश


जीएसटी मामले पर प्राईवेट कॉलेज ऐसोसिएशन को छात्र हित में मिला हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश

शुल्क पर जीएसटी वसूलने के मामले में संबंधित महाविद्यालयों के कार्यों में कोई बाधा उत्पन्न नहीं करने का आदेश दिया

 
MLSU
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उदयपुर  1 जुलाई 2022 । माननीय उच्च न्यायालय, जोधपुर ने मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय, उदयपुर को सम्बद्धता शुल्क पर जीएसटी वसूलने के मामले में संबंधित महाविद्यालयों के कार्यों में कोई बाधा उत्पन्न नहीं करने का आदेश दिया।

प्राइवेट कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. वसीम खान ने अपना वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि जीएसटी कमीश्नर द्वारा मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय, उदयपुर को सम्बद्धता शुल्क पर जीएसटी वसूलने के सम्बन्ध में प्राइवेट कॉलेज एसोसिएशन द्वारा पुरजोर विरोध किया गया परन्तु विश्वविद्यालय के उच्चाधिकारियों द्वारा हठधर्मिता पूर्वक नहीं माना गया। इस कारण अध्यक्ष, प्राइवेट कॉलेज एसोसिएशन द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, जोधपुर में मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार, स्टेट और राजस्थान मार्फत संयुक्त सचिव (टेक्स) वित्त विभाग, सेन्ट्रल एक्साइज, सीजीएसटी के कमीश्नर के विरूद्ध एक रिट याचिका दायर की गई थी।

इस याचिका की सुनवाई के पश्चात माननीय मुख्य न्यायाधीश एस. एस. शिन्दे एवं न्यायाधीश संदीप मेहता की डिविजनल बेंच द्वारा दिये गये  आदेश  में लिखा कि आगामी सुनवाई तक सुखाड़िया विश्वविद्यालय संबंधित महाविद्यालयों से किसी भी प्रकार की जीएसटी वसूली नहीं करते हुए महाविद्यालयों के कार्यों में कोई बाधा उत्पन्न नहीं करेगा। 

निजी महाविद्यालय समिति, उदयपुर के अधिवक्ताओं द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखते हूए बताया गया कि संबद्धता देना विश्वविद्यालय का वैधानिक कार्य है। सुखाड़िया विश्वविद्यालय एक वैधानिक संस्था है जो कि अपने कार्यों को करने के लिए जीएसटी की श्रेणी में नहीं आती है। विश्वविद्यालय अपनी संबंद्धता के रूप में महाविद्यालय को अपने विशेषाधिकार प्रदान करती है जो कि किसी प्रकार से ‘‘सेवा‘‘ के दायरे में नहीं आती है।  

गौरतलब है कि इस विरोध का मुख्य कारण राजस्थान के तीन विश्वविद्यालयों हेल्थ एण्ड मेडिकल विश्वविद्यालय जयपुर, राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर, कोटा विश्वविद्यालय कोटा द्वारा पूर्व में जीएसटी ले ली गई थी पर कॉलेज एसोसिएशन व छात्र संगठनों के विरोध के बाद  इन विश्वविद्यालयों ने जीएसटी वापस रिटर्न की। 

रिटर्न करने का मुख्य आधार जीएसटी एक्ट है, जिसमें स्पष्ट दिया गया है कि शिक्षा को जीएसटी से अलग रखा गया है एवं ऐसी शैक्षणिक संस्थाएं जो कानून के आधार पर बनी है उनसे जीएसटी नहीं लिया जाएगा, परन्तु सुखाडिया विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा यह भ्रम फैला रहे थे कि जीएसटी बनता है और सम्बद्धता शुल्क पर जीएसटी लिया जावे, परन्तु प्राइवेट कॉलेज एसोसिएशन पिछले 2 वर्ष से जीएसटी का विरोध करती आ रही है क्योकि अगर संबंधित महाविद्यालय जीएसटी देते हैं तो इसका सीधा-सीधा अतिरिक्त भार विशविद्यालय के 2 लाख से अधिक गरीब एवं आदिवासी छात्रों पर पडेगा परन्तु जब विश्वविद्यालय जीएसटी वसूलने के लिए अडा रहा तो मजबूरन एसोसिएशन को माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेनी पडी।

ज्ञात रहे कि इस प्रकरण में प्राईवेट कॉलेज ऐसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. वसीम खान एवं महासचिव डॉ. पंकज चौधरी व ऐसोसिएशन के अन्य पदाधिकारियों पर विश्वविद्यालय द्वारा जीएसटी वसूलने के विरोध में प्रदर्शन के चलते विश्वविद्यालय के कुलसचिव सी. आर. देवासी एवं वित्त नियंत्रक के द्वारा प्रताप नगर थाने में राज कार्य मे बाधा की  एफ.आई.आर. तक दर्ज करवाई गयी थी एवं विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया गया था परन्तु माननीय उच्च न्यायालय के आदेश से स्पष्ट हो गया है कि प्राईवेट कॉलेज ऐसोसिएशन का छात्र हित में जीएसटी वसूलने का विरोध उचित था।
 

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