Prime Minister Narendra Modi did not announce to make Mangarh a national monument

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नहीं की मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की घोषणा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नहीं की मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की घोषणा

पूर्व सांसद रघुवीर मीणा ने कहा ये जनभावनाओं का अपमान

 
PM Narendra Modi

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मानगढ़ में सभा की परन्तु मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की घोषणा नहीं कर आदिवासी क्षेत्र की जनभावनाओं को आहत किया है। कांग्रेस स्टीयरिंग कमेटी सदस्य व उदयपुर के पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा ने बताया कि ये पूरे आदिवासी क्षेत्र की मांग थी, मेने भी प्रेस के माध्यम से यह मांग रखी थी व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तो मानगढ़ में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में यह मांग दोहराई।

कई दिनों से कई संगठनों, कई राजनीतिज्ञों द्वारा मानगढ धाम को राष्ट्रीय स्मारक की घोषणा करने हेतु देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी से पत्रों एवं प्रेस के माध्यम से मांग कर रखी थी एवं प्रधान मंत्री के प्रस्तावित 1 नवम्बर, 2022 के दौरे से आस बंधी थी कि आदिवासियों के आस्था एवं स्वाभिमान के केन्द्र मानगढ़ धाम राष्ट्रीय स्मारक घोषित होगा ।

आज करोड़ों रूपये खर्च कर मानगढ धाम पर प्रधानमंत्री का प्रोग्राम भी हुआ परन्तु निराशा हाथ लगी। राजस्थान, गुजरात एवं मध्य प्रदेश के आदिवासी समाज, संगठन एवं जन प्रतिनिधि इस आशा से मानगढ धाम पहुॅचे कि आज देश के प्रधानमंत्री एक नया इतिहास लिख कर जायेंगे एवं राष्ट्रीय स्मारक की घोषणा करके जायेंगे परन्तु ’’खोदा पहाड़ निकली चुहिया’’ वाला मुहावरा साबित हुआ ।

भाजपा के प्रदेश एवं राष्ट्रीय नेतागणों के प्रोग्राम के पूर्व के हावभाव तो आसमान छू रहे थे और ऐसा लग रहा था कि ’’हम चोड़े-बाजार संकड़ा हो’’। सभा में हजारों लोगों की उपस्थिति तथा प्रधानमंत्री के अलावा गुजरात के मुख्यमंत्री, राजस्थान के मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश के राज्यपाल, केन्द्रीय सांस्कृतिक मंत्री अर्जुन मेघवाल, कई अन्य केन्द्रीय मंत्री उपस्थित थे।

स्मारण हो कि सन् 1913 के 17 नवम्बर पूर्णिमां के दिन अंग्रेजों की फोजों ने मानगढ़ की पहाड़ी पर 1 लाख से अधिक आदिवासियों पर गोलियां चलाई थी जिसके फलस्वरूप 1500 से अधिक आदिवासी लोग मारे गये थे जिसमें पुरूष, बच्चे एवं महिलाएं थी।

मानगढ धाम राजस्थान, गुजरात एवं मध्यप्रदेश के सीमा पर स्थित है अतः तीनों राज्यों के आदिवासी यहां गोविन्द गुरू के नेतृत्व में अंग्रेजों के आबकारी नीति के खिलाफ एवं नशा मुक्ति के पक्ष में साथ ही अकाल की स्थिति में अंग्रेजों को कर नहीं देने के पक्ष में प्रदर्शन कर रहे थे तथा आजादी के जंग में सम्मिलित थे।

इसके बाद 13 अप्रेल, 1919 में जलियावाला बाग हत्याकांड हुआ इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर दिया परन्तु इतिहासकारों के अनदेखी की वजह स आदिवासियों के शहीद स्थली मानगढ़धाम को वंचित रख दिया गया है।

सन् 2002 में राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शहीद स्मारक (मानस्तंभ) का निर्माण एवं अन्य विकास कार्य अवश्य कराया है परन्तु आदिवायों की मांग है कि मानगढ धाम को ’’राष्ट्रीय धरोहर’’ घोषित किया जावे इस हेतु राजस्थान के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर राष्ट्रीय धरोहर (स्मारक) घोषित करने की मांग कर रखी है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा तथा अन्य सामाजिक संगठनों ने भी राष्ट्रीय स्मारक की मांग कर रखी परन्तु देश के प्रधानमंत्री ने आदिवासियों की भावना की कद्र नहीं की ।

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