पेपरमेशी कार्यशाला में बच्चो ने बनाई मन भावक कलाकृतियाँ

शिक्षक दिवस पर लोक कला मंडल लोक नृत्य एवं कठपुतली प्रदर्शन
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Papermeshi workshop

उदयपुर 3 सितंबर 2022। भारतीय लोक कला मण्डल उदयपुर एवं सांस्कृतिक निधी न्यास, (इंटेक) उदयपुर स्कंध के संयुक्त त्वावधान में आज एक दिवसीय पेपरमेशी कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें शहर के विद्या भवन, एम.एम. पी.एस. रॉकवुड हायर सैकेण्डरी, रॉकवुड इंटरनेशनल, सेन्ट एन्थनी हिरण मगरी एवं गोर्धन विलास, एम.एम. वी. एम., इण्डो अमरेकिन, सिडलिंग, दी स्कॉलर्स एरिना स्वामी नगर, आर. के. पुरम आदि स्कूलों के लगभग 100 छात्र-छात्राएँ को प्रशिक्षण दिया गया। 

इस अवसर पर सांस्कृतिक निधी न्यास, (इंटेक) उदयपुर स्कंध के संयोजक डॉ. ललित पाण्डेय ने कहा कि भारत विविध कलाओं से भरा एक अद्भूत देश है और इन कलाओं को हमे सहजे रखने की महत्ती आवश्यकता है। 

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डॉ हुसैन ने प्रतिभागियों से संवाद करते हुए कहा कि पेपरमेशी कला भारत में 14 वी शताब्दी में ईरान से आई है जिसे मुस्लिम संत मीर सैय्यद अली हमदानी द्वारा लाया गया था। भारत में यह हस्त कला श्रीनगर और कशमीर घाटी के अन्य हिस्सों में प्रचलित है जहाँ पेपरमेशी द्वारा विविध वस्तुओं का निमार्ण किया जाता है जो देश और दुनिया में अपनी एक अनूठी पहचान रखता है। 

कार्यशाला में प्रतिभागियों को कैलाश खटीक एवं साथी ने सर्व प्रथम छात्र-छात्राओं को पेपरमेशी में अर्थात कागज़ की लुगदी को किस प्रकार बनाई जाती है यह सिखाया उसके पश्चात विभिन्न सामग्री एवं पशु-पक्षी बनाना सिखाया गया। कार्यशाला में आए छात्र-छात्राओं ने भी बहुत ही रूचि एवं लग्न के साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया और मोर, कबूतर फुल आदि भी बनाए। 

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उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के अंत में सांस्कृतिक निधी न्यास, (इंटेक) उदयपुर स्कंध के सह संयोजक गौरव सिंघवी ने कार्यशाला में आए सभी स्कूलों एवं प्रमुख सहयोगी संस्था भारतीय लोक कला मण्डल का आभार व्यक्त किया। 

शिक्षक दिवस पर लोक कला मंडल लोक नृत्य एवं कठपुतली प्रदर्शन

भारतीय लोक कला मण्डल में शहर के 15 से अधिक स्कूलों से आए लगभग 100 छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों के साथ  शिक्षक दिवस मनाया गया।  इस अवसर पर भारतीय लोक कला मण्डल के निदेशक डॉ. लईक हुसैन ने बताया कि 5 सितम्बर को प्रतिवर्ष शिक्षक दिवस के रूप मे मनाया जाता है। इस वर्ष 5 सितम्बर को राजकीय अवकाश होने के कारण संस्था में उक्त आयोजन दिनांक 3 सितम्बर को आयोजित किया गया। 

छात्र-छात्राओं को गुरू शिष्य परंपरा की जानकारी दी गई तथा कठपुतली एवं लोकनृत्यों का कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें सर्वप्रथम कठपुतली का प्रदर्शन हुआ  जैसे साँप-सपेरा, बहुरूपियाँ, लड़का-लड़की, तबला-सारंगी, सकर्स की मोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोहा तो कार्यक्रम के दूसरे भाग में कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किये गये तेराताल, गोरबंध एवं भवाई नृत्य।इन नृत्यों पर छात्र-छात्राओं ने भाव विभोर होकर जोरदार तालियों से कलाकारों का स्वागत किया । 

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