सेल्फ हीलिंग कंक्रीट का सफलतापूर्वक परीक्षण

सेल्फ हीलिंग कंक्रीट का सफलतापूर्वक परीक्षण

कंक्रीट में क्रेक आने से आने वाली बाहरी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा

 
gitanjali

गीतांजली इंस्टीटयूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज डबोक, उदयपुर में सिविल इंजिनियरिग विभाग के विद्यार्थियों ने कंक्रीट तकनीक में शोध के आधार पर सेल्फ हीलिंग कंक्रीट को डिजाइन कर सफलतापूर्वक उसका परीक्षण किया । इससे कंक्रीट में क्रेक आने से आने वाली बाहरी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा।

संस्थान निदेशक डॉ. विकास मिश्र ने बताया कि रिसर्च वह है जो किताबोें में नही अपितु समाज की समस्याओं को सुलझाने में काम आये। देश के अधिकतर इंजिनियरिंग युवा क्रिएटीविटी एवं अपने हुनर के दम पर आगे बढ़ना चाहते हैं। इसी क्रम में सिविल इन्जिनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष वर्मा के निर्देशन में फाइनल ईयर के छात्रों मोहित मेनारिया, खुशहाल अहारी, कृष्णपाल सिंह चौहान व अरुण सोनी के द्वारा एक नवीनतम तकनीक के आधार पर सेल्फ हीलिंग कंक्रीट का डिजाइन तैयार कर उसका सफलतापूर्वक परीक्षण किया। अमुमन अतिरिक्त भार, बढ़ते तापमान, आन्तरिक तनाव एवं डिजाइन फॉल्ट आदि के कारण कंक्रीट क्रेक्स आने की सम्भावना लगातार बनी रहती हैं। ऐसे में क्रेक्स से पानी का रिसाव होता रहता हैं, जिसके कारण कंक्रीट की सामर्थ्य क्षमता व जीवनकाल कम हो जाता है।

इन छोटे-छोटे क्रेक्स को बार-बार रिपेयर करना भी पूरी तरह से संभव नहीं हो पाता हैं। इसके अलावा रिसाव के कारण गंदगी उत्पन्न होने से विभिन्न बीमारियों का खतरा बना रहता है।
इस प्रकार की समस्याओं से बचने के लिये छात्रों ने कई महीनों तक शोध कर कंक्रीट में कुछ विशिष्ट प्रकार के पदार्थों का उपयोग करके ऐसी कंक्रीट का निर्माण किया है, जिसमें क्रेक्स पैदा होते ही वे स्वतः अपने आप को भर देते है।

 

निदेशक आई.क्य.ए.सी. डॉ. सुधाकर जिंदल के अनुसार रिसर्च आधारित इनोवेटिव प्रोजेक्ट ही सोसायटी एवं समाज की समस्याओं का निराकरण कर रहे हैं। इसी के परिणाम स्वरूप इस प्रकार की नई तकनीक की कंक्रीट का गीतांजली इंस्टीटयूट में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। गिट्स मानव कल्याण से जुड़ी नई तकनीको के विकास में गतिशील है। वित्त नियंत्रक बी. एल. जांगिड़ ने छात्रों को उनके शोध व उज्जवल भविष्य के लिये शुभकामनाऐं देते हुए कहा कि हमारा देश बिल्डिंग,शोपिंग मॉल, हॉस्पीटल हाइवे जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर की दुनिया में आगे बढ़ रहा हैं। ऐसे में क्रेक्स जैसी समस्या इन्फ्रास्ट्रक्चर डिजाइन की दुनिया में हमारे आगे बढ़ते कदम को पीछे  खींच सकता हैं इसलिए समय रहते इसका निदान जरूरी हैं।

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