उदयपुर के 15 से 20 लोग आए जूनोटिक रोग की चपेट में

उदयपुर के 15 से 20 लोग आए जूनोटिक रोग की चपेट में

4 से आठ माह की केवल मादा बछडि़यों को टीका लगवाए

 
junotic diseases

उदयपुर, 8 जनवरी। जूनोटिक बीमारियां पिछले कुछ वर्षों से काफी बढ़ गई हैं। जूनाेसिस यानि जूनाेटिक राेग, यह एक संक्रमण है, जाे प्राकृतिक परिस्थितियों में जानवरों से मनुष्यों में फैलती है। यह वायरस, बैक्टीरिया, परजीवी और कवक जैसे हानिकारक कीटाणुओं के कारण होते हैं। ये कीटाणु मनुष्य में हल्की से लेकर गंभीर बीमारी औैर मौत का कारण बन सकते हैं। जिले में अब तक करीब 15 से 20 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। 

अधिकतर पशुपालक और पशु चिकित्सा से जुड़े लोग इसकी चपेट में आते हैं।  वहीं पशुओं में यह रोग होने पर उनके दूध उत्पादन की क्षमता भी प्रभावित होती है। जानकारों के अनुसार यह रोग बेसिलस मेलिटेनसिस बैसिलस एबोटेस नामक जीवाणु के कारण होता है। इससे बचाव के लिए डेयरी संचालक और पशुपालक 4 से आठ माह की केवल मादा बछडि़यों को टीका लगवाए। यह टीका पशु के जीवन में एक बार ही लगता है।

हर 10 संक्रामक राेगाें में छह जानवरों से फैलते हैं

  • दुनिया भर में जूनोटिक रोग बहुत आम हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मानव में हर दस ज्ञात संक्रामक रोगों में से छः रोग जानवरों से फैलते हैं यानि कि 60% और हर चार नए या उभरते संक्रामक रोगों में से तीन, जानवरों से आते हैं।
  • जूनोटिक रोग, चाहे वे वायरस हों या बैक्टीरिया या परजीवी आमतौर पर उन जगहों पर फैलते हैं जहाँ जानवर और इंसान निकट संपर्क में होते हैं। जब कोई रोग एक प्रजाति से नई प्रजाति में प्रवेश करता है, तो इसे स्पिलओवर के रूप में जानते है।

यह हैं निवारक उपाय

  • जानवरों के साथ अपनी अंत क्रिया और संबंध को बदले। पशुओं में बीमारी की रोकथाम करना, क्योंकि अंततः यह मनुष्य के स्वास्थ्य की रक्षा करता है।
  • अपने भोजन को विकसित करने के तरीके को बदलें और सुरक्षित भोजन प्रबंधन की आदत डालें जैसे खाने से पहले सभी उत्पादों को धोना।

पशुओं में मिल रहा बैक्टीरिया

1 अप्रेल से 30 नवंबर, 2023 तक पशुपालन विभाग ने 317 डेयरियों के दूध का और 9 पशुओं का परीक्षण किया। इसमें 10 डेयरियों के दूध में यह बैक्टीरिया मिला। वहीं 2 पशुओं में यह बैक्टीरिया पाया गया। इसी प्रकार इस समय सीमा में 332 पशुओं का सीरम टेस्ट किया गया। इनमें से 33 पशुओं में ब्रुसेलोसिस पाया गया।

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