दिलचस्प होने वाली है वल्लभनगर की जंग

दिलचस्प होने वाली है वल्लभनगर की जंग

कांग्रेस, जनता सेना और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबले को चतुष्कोणीय बनाने में आरएलडी का उदयलाल डांगी पर दांव

 
vallabhnagar fight
आज मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सचिन पायलट और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पुनिया भी पहुंचे वल्लभनगर 

उदयपुर 8 अक्टूबर 2021। गुलाब सिंह शक्तावत के वर्चस्व वाली और हॉट कही जाने वाली वल्लभनगर विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प बना हुआ है।  पिछले 2018 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर विजयी प्रत्याशी गजेंद्र सिंह शक्तावत के निधन से उपचुनाव की स्थिति बनी है। 2018 में भी इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बनी थी। इस बार भाजपा के बागी उदयलाल डांगी ने आरएलडी का दामन थामकर मुकाबले को रोचक और चतुष्कोणीय बना दिया है। इससे पूर्व 2013 में भाजपा के पुराने खिलाडी ने नई टीम (जनता सेना) बनाकर मोदी लहर में भी भाजपा प्रत्याशी गणपत मेनारिया की ज़मानत ज़ब्त करवाते हुए कांग्रेस के गजेंद्र सिंह शक्तावत पर 13167 वोटो से हराकर मैदान मार लिया था। 

इस बार भी खेल वहीँ है खिलाड़ी बदल गए है। जनता सेना से महाराजा रणधीर सिंह भींडर और उनकी धर्मपत्नी दीपेंद्र कुंवर ने परचा दाखिल किया है । दोनों में से एक का लड़ना तय है। कांग्रेस की ओर से स्वर्गीय गजेंद्र सिंह शक्तावत की पत्नी प्रीति शक्तावत मैदान में होगी। जबकि बगावत के मूड में लग रहे स्वर्गीय गुलाबसिंह शक्तावत के बड़े पुत्र देवेंद्र सिंह शक्तावत के तेवर अब ढीले हो गए है। अन्य दावेदार राजसिंह झाला और भीम सिंह चुण्डावत ने भी अपने कदम पीछे खींच लिए है। वहीँ कांग्रेस के अन्य दावेदार शक्तावत परिवार के कुबेर सिंह चावड़ा की कुबेर सेना ने प्रीति शक्तावत को अपना समर्थन दे दिया है। इस प्रकार फिलहाल कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल कर लिया है। 

वहीँ भाजपा की ओर से इस बार उदयलाल डांगी की बजाय वल्लभनगर की पिच पर हिम्मत सिंह झाला को बल्लेबाज़ी के लिए उतारा गया है। तो उदय लाल डांगी ने बगावती तेवर दिखाते हुए हनुमान बेनीवाल की आरएलडी से भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी को रन आउट करने का मानस बनाया है। अब देखना होगा वल्लभनगर की बल खाती पिच पर कौन कितना टिक पाता है।

वल्लभनगर के इस रोमांचक मुकाबले में एक दिलचस्प बात यह है की भाजपा और आरएलडी के बैनर तले उदय लाल डांगी जितनी मेहनत करेंगे उतना ही इसका फायदा सहानुभूति लहर पर सवार कांग्रेस की प्रत्याशी प्रीति शक्तावत को मिलता दिखाई दे रहा है। जबकि महाराज रणधीर सिंह भिंडर की जनता सेना अभी भी कड़ी चुनौती बन कर खड़े हुए है। भाजपा की बात करे तो भाजपा की ओर से भी राजपूत प्रत्याशी हिम्मत सिंह झाला की राह में उदय लाल डांगी दीवार बन कर खड़े है। हालाँकि अभी तक नाम वापिस लेने की तारीख 13 अक्टूबर तक है। अगर भाजपा अपने पुराने साथी को मनाने में सफल रहती है तो मुकाबला त्रिकोणीय ही रहेगा। नहीं तो इस चतुष्कोणीय मुकाबले में फायदा किसको मिलेगा यह तो वक्त ही बताएगा। 

क्या कहता है वल्लभनगर सीट का पुराना रेकॉर्ड्

2018  तक इस सीट से 15 बार चुनाव हो चुके है। इनमे से कांग्रेस के गुलाब सिंह शक्तावत 6 बार इस सीट से परचम लहरा चुके है। दो बार स्वर्गीय गुलाब सिंह शक्तावत के पुत्र गजेंद्र सिंह शक्तावत भी 2008 और 2018 में इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके है। जनता सेना के सुप्रीमो महाराजा रणधीरसिंह भींडर भी 2003 में भाजपा के टिकट पर और 2013 में जनता सेना के टिकट पर इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके है।

1952 के पहले चुनाव में कांग्रेस के गुलाब सिंह शक्तावत ने जनसंघ के प्रत्याशी को 8966 वोटो से परास्त किया था। उसके कांग्रेस के हरिप्रसाद परमार ने भारतीय जनसंघ के हरिसिंह को 11623 मतों से विजय हासिल की थी,जबकि 1962 में स्वतंत्र पार्टी के अमरलाल यादव ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया था। 1967 में पुनः कांग्रेस के गुलाबसिंह शक्तावत ने मात्र 875 वोटो से भारतीय जनसंघ के कमलेन्द्र सिंह पर बढ़त हासिल की थी।

1977 की जनता लहर में जनता पार्टी के उम्मीदवार कमलेन्द्र सिंह ने गुलाब सिंह शक्तावत को 24723 मतों से परास्त किया था। 1980 के मध्यावधि चुनाव में भी कमलेन्द्र सिंह ने 2049 मतों से गुलाब सिंह शक्तावत को पछाड़ कर अपना कब्ज़ा बरकरार रखा। 1985 में गुलाब सिंह शक्तावत ने जनता पार्टी के कमलेन्द्र सिंह को 14661 मतों से मात दी। 1990 में कमलेन्द्र सिंह ने वी पी सिंह के नेतृत्व वाली जनता दल की टिकट पर चुनाव लड़कर कांग्रेस के गुलाब सिंह शक्तावत को 8173 मतों से शिकस्त दी।

1993 के मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस के गुलाबसिंह शक्तावत ने भाजपा के महाराजा रणधीर सिंह भिंडर को 8275 मतों से एवं 1998 में भी गुलाब सिंह शक्तावत ने भाजपा के महाराजा रणधीर सिंह भींडर को 4004 मतों से जीत दर्ज कर दी थी हालाँकि 2003 में स्वर्गीय गुलाब सिंह शक्तावत अपनी आखिरी चुनाव भाजपा के महाराजा रणधीरसिंह भींडर से 32101 के भारी अंतराल से हार गए। 2008 में महाराजा रणधीर सिंह भींडर भी स्वर्गीय गुलाबसिंह शक्तावत के सुपुत्र गजेंद्र सिंह शक्तावत ने कांग्रेस के टिकट पर भाजपा के रणधीर सिंह भिंडर को 6660 मतों से हराया।

विधानसभा 2013 के चुनाव में भाजपा ने महाराजा रणधीर सिंह भींडर का टिकट काट दिया। जिससे खिन्न होकर महाराजा ने नई पार्टी का गठन किया और जनता सेना बना डाली। नई नवेली पार्टी जनता सेना में मोदी लहर के बावजूद भी कांग्रेस के प्रत्याशी गजेंद्र सिंह शक्तावत को 13167 मतों से विजय श्री हासिल करते हुए भाजपा की टिकट से चुनाव लड़ रहे पुराने कांग्रेसी गणपत लाल मेनारिया की ज़मानत तक ज़ब्त करवा ली थी।

पिछली विधानसभा 2018 के चुनाव में कांग्रेस के गजेंद्र सिंह शक्तावत ने जनता सेना के महाराजा रणधीर सिंह भिंडर को 3719 मतों से पटखनी दी थी जबकि भाजपा के उदयलाल डांगी 46 हज़ार वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे।  यदि पुराने आंकड़ों पर नज़र डाली जाए तो इसे सीट से राजपूत उम्मीदवार ही बाज़ी मारता नज़र आया है। जातीय संरचना पर नज़र डाले तो करीब 21.48% अनुसूचित जनजाति और 8.80% अनुसूचित जाति के मतदाता इस क्षेत्र में है जबकि 70 फीसदी मतदाता स्वर्ण और ओबीसी है जिनमे से ज़्यादातर रावत, ब्राह्मण है बाकि जातियों में जैन, डांगी, मुस्लिम और बोहरा समाज शामिल है।
 

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