चित्तौड़गढ़-28 नवंबर 2023 की प्रमुख खबरे

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News-दूसरे दिन भी रिमझिम वर्षा से जनजीवन रहा प्रभावित

चित्तौड़गढ़। मौसम विभाग की चेतावनी के अनुरूप सोमवार को दूसरे दिन भी आसमान मेघाच्छादित होने के साथ ही रूक-रूककर हुई रिमझिम वर्षा से जनजीवन खासा प्रभावित रहा। पिछले दो दिनों से हो रही वर्षा के कारण रात व दिन के तापमान में लगातर गिरावट आने के साथ ही सर्द हवाओं से ठिठुरन बढ रही है। जिससे बचाव के लिये लोगों को भारी भरकम ऊनी वस्त्रों के साथ अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है। 

इस वर्षा से वैवाहिक कार्यक्रमों में भी खासा प्रभाव देखने को मिल रहा है। देवोत्थापन एकादशी से लेकर आगामी एक सप्ताह तक जिले में शादियों की धूम के बीच अचानक आसमान से गिर आई आफत से आयोजकों एंव व्यवस्थापकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सर्दी से बचाव के लिये लोग ऊनी वस्त्रो की खरीद फरोख्त में विशेष रूचि ले रहे है।

News-श्रृद्धा व उत्साह ने मनाई गुरूनानक देव की 554वीं जयंती

चित्तौड़गढ़। सिक्ख धर्म के प्रथम गुरू के रूप में गुरूनानक देव की 554वीं जयंती कार्तिक पूर्णिमा को सिंधी एंव सिक्ख समाज ने पूरी श्रृद्धा व उत्साह के साथ मनाई। इस अवसर पर पिछले 12 दिनों से निकाली जा रही प्रभात फेरियों का समापन भी हुआ। वही प्रतापनगर स्थित गुरूद्वारे में दरबार सजाने के साथ ही सहज पाठ साहब की समाप्ति भी हुई। इस दौरान गुरूद्वारा के ज्ञानी सतनाम सिंह ने शबद कीर्तन करते हुए गुरूनानक देव की जीवनी पर प्रकाश डाला। 

शबद कीर्तन में महिलाओं, बच्चो व पुरूषों ने उत्साह के साथ भाग लिया। गुरूनानक देव की जयंती के अवसर पर अटूट लंगर बरता गया। इस अवसर पर भाजपा प्रत्याशी नरपत सिंह राजवी, कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह जाड़ावत, निर्दलीय प्रत्याशी चंद्रभान सिंह आक्या ने भी गुरूनानक में मत्था टेककर गुरू का आशीर्वाद लिया, जबकि बड़ी संख्या में सिक्ख एंव सिंधी समाज के लोगों ने गुरूद्वारा में मत्थ टेककर अरदास करते हुए सर्वत्र खुशहाली एंव अमन चेन की कामना की। इस मौके पर बच्चों की शबद कीर्तन प्रतियोगिता आयोजित करने के साथ ही खुशी के इस मौके पर सतरंग आतिशबाजी की गई।

News-कार्तिक पूर्णिमा पर श्रृद्धा के साथ किया दीपदान

चित्तौड़गढ़। धार्मिक दृष्टि से कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है, वही देवोत्थापन एकादशी के पांचवे दिन पूर्णिमा को देव दीपावली के रूप में भी मनाया जाता है। जिसके उपलक्ष्य में सोमवार को गंभीरी नदी तट पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने बेतरणी पार करने की भावना से बास की लकड़ी से बने जहाज में 35-35 दीपक प्रज्वलित कर दीपदान करते हुए जल में प्रवाहित किये, जिसका नजारा देखते ही बनता था। 

वही मंदिरों में भी देव दीपावली के अवसर पर सतरंगी रोशनी कर विशेष धार्मिक अनुष्ठान हुए, जहां बड़ी संख्या में श्रृद्धालुओ ने पहुंचकर भगवान के विग्रह के दर्शन कर स्वंय को धन्य किया। पूरे कार्तिक मास में स्नान करने वाले श्रृद्धालु विशेषकर महिलाओं ने दुर्ग स्थित प्रमुख पवित्र गोमुख कुंड में स्नान कर पूजा अर्चना करने के साथ ही विश्व के सबसे बड़े दुर्ग की परिक्रमा की। 

News-बिरला कॉर्पाेरेशन लिमिटेड ने पीआरएसआई नेशनल अवॉर्ड जीता

बिरला कॉर्पाेरेशन लिमिटेड ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट के लिए पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया नेशनल अवॉर्ड द्वितीय पुरूस्कार जीता है। यह अवॉर्ड डॉ. भीमराव अंबेडकर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, जनपथ, नई दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल पब्लिक रिलेशंस फेस्टिवल में कंपनी के प्रतिनिधियों को सौंपा गया। वार्षिक रिपोर्ट की वारली-कला थीम वाले कॉन्सेप्ट को व्यापक रूप से सराहा गया है।

वारली कला भारत की चित्रकला की सबसे पुरानी विधाओं में से एक है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह 10वीं शताब्दी ई.पू. की है। उत्तरी सह्याद्रि रेंज के जनजातीय लोगों द्वारा पारंपरिक रूप से प्रचलित यह कला प्रकृति के तत्वों और मिट्टी के रंगों को जियोमेट्रिक्ल अरेंजमेंट के साथ जोड़ती है। वारली वास्तव में महाराष्ट्र और भारत की महान विरासतों में से एक है। 

पारंपरिक शैली को ध्यान में रखते हुए, वारली चित्र अनौपचारिक और खूबसूरत होते हैं, जबकि इनमें सौम्यता की ताकत का तत्व होता है।एमडी और सीईओ, बिरला कॉर्पाेरेशन लिमिटेड संदीप घोष, ने कहा कि “इस बार कंपनी को महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के मुकुटबन में हमारे नवीनतम ग्रीन-फील्ड इंटीग्रेटेड सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के नजरिए से पेश करने का प्रयास किया गया, जिसकी वार्षिक स्थापित क्षमता 3.9 मिलियन टन है और इसे 2,744 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया। चूंकि मुकुटबन महाराष्ट्र में है इसलिए हमने महाराष्ट्रीयन कला विरासत को दर्शाते हुए वारली कला मार्ग को चुना है। 

बिरला कॉर्पाेरेशन लिमिटेड की जनकल्याण और सीएसआर गतिविधियों के परिणामस्वरूप, वारली कला की अंतर्निहित भावना सामने आई है। वास्तव में, फ्रंट कवर और दूसरे कवर से लेकर कॉर्पाेरेट सूचना पृष्ठों तक सभी चित्र, वारली कला के ढांचे के भीतर, सस्टेेनेबिलिटी के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। हमने अपना जूट डिवीजन प्रस्तुत किया है, जो एक बार फिर पर्यावरण संतुलन के संरक्षण के लिए हमारी प्रतिबद्धता है, जिसमें जूट की खेती, कटाई, कताई और बुनाई को दर्शाने वाली वारली कला की मूर्तियों और डिजाइनों का उपयोग किया गया है।

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