गिट्स में 5 दिवसीय प्रबंधन विकास कार्यक्रम का समापन

भारत सरकार के ईएसडीपी योजना के तहत हुआ कर्यक्रम 

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गीतांजलि इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज डबोक उदयपुर में भारत सरकार के ईएसडीपी योजना तहत चलने वाले सौर ऊर्जा-प्रौद्योगिकी, रोजगार और व्यवसाय के अवसर" पर आधारित “5 दिवसीय प्रबंधन विकास कार्यक्रम" का समापन हो गया । 

संस्थान के निदेशक डॉ एन एस राठौड़ ने बताया कि जैसे जैसे मानव सभ्यता के पथ पर अग्रसर हो रहा है उसकी बुनियादी जरूरतें भी बढ़ती जा रही हैं। इन बुनियादी जरूरतो का बहुत बड़ा आधार ऊर्जा है। जीवाश्म ईधन सीमित होने के कारण सौर आधारित ऊर्जा आज के समय की मांग है आज नहीं तो कल हम सभी को सौर ऊर्जा-प्रौद्योगिकी से अवगत होना ही पड़ेगा।

सौर ऊर्जा भारत में तेजी से बढ़ता उद्योग है। आज भारत 408.71 गीगा वाट से ज्यादा का उत्पांदन कर विश्व में 4 पायदान पर खड़ा हो गया है। इस 5 दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं फैकल्टी मेम्बर्स के बीच सौर ऊर्जा के महत्व तथा उससे जुड़े रोजगार तथा प्रशिक्षण सम्बन्धी जानकारिओं को साझा करना था। 

भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले परामर्श और विपणन एमएसएमई प्रौद्योगिकी विकास केंद्र (पीपीडीसी) आगरा डिवीज़न के उप निदेशक प्रोफेसर प्रवीण आर जोशी ने उल्लेख किया है कि सौर ऊर्जा अपशिष्ट उत्पन्न नहीं करती है या पानी को दूषित नहीं करती है, जो कि जल संरक्षण का बहुत बड़ा कारक है।  

इंजीनियर कुलदीप राठौर ने भारत में ऊर्जा परिदृश्य, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत, सोलर थर्मल, सौर पीवी प्रौद्योगिकी, सौर पैनलों के लिए श्रृंखला और समांतर कनेक्शन की डिजाइन और गणना, भार गणना, ऑन ग्रिड, ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट का परिचय, नेट मीटरिंग, ग्रॉस मीटरिंग कॉन्सेप्ट सोलर प्लांट का रखरखाव और सौर ऊर्जा क्षेत्र में व्यवसाय के अवसर जैसे महत्वपूर्ण विषयो पर प्रशिक्षण दिया। 

कार्यक्रम का संचलान बेसिक साइंस के विभागाध्यक्ष डॉ विशाल जैन एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हिना औझा द्वारा  किया गया। इस अवसर पर वित्त नियंत्रक बी एल जांगीड़ सहित पूरा गीतांजलि परिवार ने उत्साह पूर्वक भाग लिया।
 

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