मेवाड़ में भी गूंजेगी बाघ की दहाड़, NTCA ने कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व को सहमति दी

मेवाड़ में भी गूंजेगी बाघ की दहाड़, NTCA ने कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व को सहमति दी

2766 स्क्वायर किमी में टाइगर रिजर्व बनेगा

 
Tiger T-104

मेवाड़ में भी टाइगर की गूंज सुनाई देगी। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथोरिटी (एनटीसीए) ने 'कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व’ पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। सरकार ने पिछले दिनों रिपोर्ट भेजी थी, जिस पर 4 अगस्त को हुई बैठक में हरी झंडी दिखाई है। जल्द ही मिनिट्स जारी होंगे। इसके बाद राज्य सरकार को टाइगर रिजर्व के लिए जरूरी काम करने होंगे। 2766 स्क्वायर किमी में टाइगर रिजर्व बनेगा। 800 स्क्वा. किमी कोर एरिया रहेगा, जिसमें कुंभलगढ़, अरावली, टाड़गढ़ क्षेत्र का जंगल होगा।

राजसमंद सांसद और एनटीसीए सदस्य दीया कुमारी ने लोकसभा में इस मसले की ओर ध्यान आकर्षित कराया था, जिसके बाद केंद्र सरकार ने एक हायर लेवल कमेटी बनाई। अक्टूबर 2021 में इस कमेटी ने टाइगर रिजर्व बनाने को लेकर अपनी पॉजिटिव रिपोर्ट सौंपी थी। 

प्रोजेक्ट को लेकर सरकार के सामने 5 बड़े चैलेंज

  • बाघों के प्रवास लायक सांभर- चीलत आदि शिकार की कमी है।
  • दूसरे टाइगर रिजर्व की तरह यहां भी करीब 20 से ज्यादा गांव हैं। पैरेफिरी पर भी इससे ज्यादा गांव बसे हैं, उन सहित मवेशियों का जंगल में दबाव | 
  • 1400 वर्ग किमी रेवेन्यू लैंड में बफर के लिए ग्राम पंचायत - सभाओं की सहमति लेनी होगी। 
  • जंगल में ग्रासलैंड पर काम जरूरी, ताकि सांभर चीतल का जीवन आसान बने और उनके चलते टाइगर का ।
  • 6-7 किमी की दो सड़कें कोर एरिया से गुजर रही हैं।

स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड बैठक में मांग, बाघ-टूरिज्म को फायदा

स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य धीरेंद्र गोधा ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बोर्ड की बैठक में कुंभलगढ़ में टाइगर रिजर्व बनाने की मांग उठा रहे हैं। ताकि एमपी आदि की तरह हम भी टाइगर स्टेट होने का गौरव प्राप्त कर सकें। इससे टूरिज्म के साथ टाइगर संरक्षण को भी बल मिलेगा। 

बोर्ड सदस्य सुनील मेहता ने कहा कि रणथंभौर में क्षमता से अधिक बाघ हैं। इन्हें दूसरे रिजर्व में शिफ्ट करने की जरूरत है, साथ ही दूसरे राज्य से टाइगर लाकर जीन पूल सुधारने की मांग भी हम कर रहे हैं।

राजसमंद सांसद और एनटीसीए सदस्य दीया कुमारी ने कहा की कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व घोषित कराने के लिए दो साल से कड़े प्रयास चल रहे थे। दो-तीन बार केंद्र सरकार को लिखा। यहां से एक कमेटी बनी, जिसने पॉजिटिव रिपोर्ट सौंपी। बहरहाल एनटीसीए ने इस पर सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। 

अगस्त 2023 में इनकी संख्या 120 तक पहुँच गई 

प्रदेश में 2019 से 2021 तक बाघों की संख्या 100 तक पहुंची, इसके बाद अगस्त 2023 में यह संख्या 120 तक पहुंच गई है। इनमें से अकेले रणथंभौर में 84 बाघ हैं। 2 महीने में 6 रणथंभौर, रामगढ़, सरिस्का सहित धौलपुर में 16 शावकों की खुशखबरी मिली है।

  • 81 बाघ अकेले रणथंभौर में हैं (धौलपुर-करौली सहित)

  • 6 रामगढ़ विषधारी (एक जोड़ा और 3 शावक)

  • 2 मेल मुकंदरा

  • 30 सरिस्का

  • 6 धौलपुर, 2 शावक और दिखे हैं।



 

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