बच्चों में कुपोषण बचाव के लिए जरूरी है मां के पोषण पर ध्यान

बच्चों में कुपोषण बचाव के लिए जरूरी है मां के पोषण पर ध्यान

दो दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस का समापन

 
conference

राष्ट्रीय बालरोग अकादमी एवं आरएनटी मेडिकल कॉलेज के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय पेडन्यूट्रिकोन-2023 का समापन रविवार को हुआ। आयोजन चेयरपर्सन एवं एमबी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ आरएल सुमन ने बताया कि कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन बच्चों में कुपोषण से बचाव पर मंथन हुआ। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज प्रोफेसर डॉक्टर श्रीकांत बसु ने अपने व्याख्यान में बताया कि आज भी भारत में एक तिहाई बच्चे कम वजन के यानी की ढाई किलो से कम पैदा होते हैं, जिनके लिए जरूरी है किशोरी एवं गर्भवती मां में पोषण का ध्यान देना, क्योंकि यदि किशोरी अवस्था में ही बच्चों में पोषण का ध्यान दिया जाए तो वह एक स्वस्थ मां बनेगी और स्वस्थ मां एक स्वस्थ बच्चा पैदा करेगी। इसके लिए जरूरी है उसके खान-पान एवं खासकर एनीमिया के ऊपर ध्यान देना।

आयोजन चेयरपर्सन डॉक्टर सुमन ने बताया कि पूरे दिन चार सत्र के अंदर विभिन्न सेशन आयोजित किए गए, जिसमें अवार्ड पेपर जो कि दो कैटेगरी के तहत डॉक्टर एवं नर्स या न्यूट्रीशनिस्ट के लिए थे। अवार्ड में दिल्ली से लेडी हार्ड मेडिकल कॉलेज की छात्र विजयी रही। साथ ही न्यूट्रिशन से दिल्ली से विजय रही।

डॉ. सुमन ने यह भी बताया कि इसी के तहत आज विभिन्न सत्र में खासकर विभिन्न क्रॉनिक बीमारियों में न्यूट्रिशन का ध्यान कैसे रखा जाए, जिसमें खासकर सुलियत, डिजीज गुर्दे रोग, न्यूरोलॉजिकल डिजीज के तहत डिस्कशन किया गया। पैनल डिस्कशन के रूप में बच्चों में 6 माह बाद कंप्लीमेंट्री फीडिंग को किस तरह के इंप्रूव किया जाए। देश से आए विभिन्न पैनलिस्ट जिसके तहत डॉ. सुमन, डॉ. बी एल मेघवाल, मुक्त अग्रवाल, डॉ. अनुराग, डॉक्टर पराग, डॉ. केशुबिल्ला, वनिता यूनिसेफ से भाग लिया। जयपुर से आये डॉ. राजेश सिन्हा ने सामुदायिक स्तर पर किए जा रहे देश के विभिन्न भागों में कुपोषण प्रबंधन के बारे में विस्तार से व्याख्यान दिया एवं किस तरह प्रोग्राम को और बेहतर किया जा सकता है अनुभव साझा किया।

2 दिन के विभिन्न व्याख्यान से यह बात सामने आई कि कुपोषण का बचाव जरूरी है। बच्चा पैदा होते खासकर ध्यान 6 महीने के तहत, उसके बाद समय पर कंप्लीमेंट्री फीडिंग किशोरी, गर्भावस्था पोषण पर यदि ध्यान दिया जाए तो बच्चों एवं माता में कुपोषण से बचाया जा सकता है। अंत में आयोजन सचिव मोहम्मद आसिफ़ ने विश्वास जताया कि उदयपुर एक छोटा सा शहर है, जिसमें हमने एक कोशिश की राष्ट्रीय कांफ्रेंस आयोजित करने की, जो एक सफल प्रयास रहा एवं सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया।

दोनों दिन कार्यक्रम संयोजन डॉ अनुराधा एवं डॉक्टर बेनीवाल ने किया। साथ ही उदयपुर की पूरी टीम में डॉ. चंदेल, डॉ. सुशील गुप्ता, डॉ. लाखन पोसवाल, डॉ. निशांत डांगी, डॉ. भव्या, डॉ. सुरेश चौहान एवं रेजिडेंस की टीम जुटकर कर इस कार्यशाला को सफल बनाया।

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