उदयपुर पुलिस के पास घोड़ो के 11 पद लेकिन अभी सिर्फ 6 घोड़े ही बचे है


उदयपुर पुलिस के पास घोड़ो के 11 पद लेकिन अभी सिर्फ 6 घोड़े ही बचे है 

2 की मौत हो गई और दो घोड़े नीलाम हो गए  

 
police horse
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भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस के जवानों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसी तरह से भीड़ को नियंत्रित करने के लिए घुड़सवार पुलिस भी होती है। घुड़सवारी करने वाला पुलिस बल अलग होता है। घुड़सवार पुलिस को पार्कों और जंगली इलाकों में गश्त से लेकर विशेष अभियानों के लिए भी नियोजित किया जा सकता है। 

कई बार ऐसे मामले भी होते हैं, जिनमें संकरी गलियों और उबड़खाबड़ रास्तों पर पुलिस की कार नही जा सकती तो ऐसे में वह घुड़सवार पुलिस के दल को भेजा जाता है। इसके साथ ही पुलिस लाइन में जब वीआईपी गेस्ट आते है तो वेलकम में सबसे आगे घोड़ो को चलाया जाता है। बताया जाता है की पहले शाम के समय घोड़ो पर कांस्टेबल बैठक कर शहर का दौरा करते थे, लेकिन जब से कांस्टेबल कम हुए है यह मानो बिलकुल खतम सा हो गया है। बहुचर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड के समय पुलिस ने घोड़ों पर गलियों और चौराहों पर मार्च किया था। लॉकडाउन में भी मार्च किया था।
 

पुलिस रेग्यूलेशन एक्ट में घुड़सवार पुलिस

भारत के पुलिस रेग्यूलेशन एक्ट में पुलिस की कार्यप्रणाली को समझाने के लिए कई तरह की जानकारियां मौजूद हैं जो पुलिस विभाग के पदों और कार्यो को परिभाषित करती है। पुलिस रेग्यूलेशन एक्ट में बिंदु 79 से 83 तक घुड़सवार पुलिस के बारे में बताया गया है। जिसके अनुसार घुड़सवार पुलिस उत्सवों या अन्य आयोजनों में भीड़ नियंत्रण का काम करती है।  

2012 में जयपुर से घोड़े विजय को उदयपुर भेजा गया था। तब उसकी आयु 3 वर्ष की थी और गत पिछले दिनों करीब 14 साल की आयु में कोलिक बीमारी के चलते घोड़े विजय की पुलिस लाइन स्थित रिशाला में मृत्यु हो गयी। जानकारी के अनुसार उदयपुर में घोड़ो के कुल 11 पद है, और यह सभी पद कांस्टेबल रैंक के है। परन्तु वर्ष 1998 से इनमे 1 पद खाली है, और कुछ ही वर्षो पहले केसरी नमक घोड़े की मृत्यु हो गई थी वही वर्ष 2019 में 18 वर्षीय तूफ़ान नामक घोड़े और भगत को नीलाम कर दिया गया था। अब पुलिस लाइन में सिर्फ 6 ही घोड़े रह गये है और इन सभी की उम्र 15 वर्ष से ज्यादा है। 

मुजीबुर्रहमान ने बताया कि यह रिशाला में एक विदेशी नस्ल का घोड़ा है। यह गर्म स्वभाव का है, इसलिए इसका नाम कूलडाउन पड़ गया। यह नाम इसे राजस्थान पुलिस एकेडमी जयपुर से ही मिल गया था। 

वर्तमान में रिशाला पुलिस लाइन में 5 घोड़े और 1 घोड़ी है उन सभी के कुछ न कुछ नाम है। इनके नाम धर्मराज, शिवा, भागीरथ, हनुमान, कूलडाउन और आशा है। इनकी देखभाल के लिए चार कांस्टेबल है । 

इनकी रिटायर्ड आयु 

चौंकाने वाली बात तो यह है की यहाँ घोड़ो को 22 साल की उम्र में रिटायर्ड किया जाता है, लेकिन इनकी औसत उम्र ही 20 वर्ष होती है। ऐसे में रिटायर्ड होने से पहले ही इनकी मृत्यु हो जाती है। यह नियम अंग्रेजो के ज़माने से चला आ रहा है,लेकिन तब घोड़ो का खान-पान और ध्यान उच्च स्तर का होता था, लेकिन अब वैसा नही है। 

रिशाला में घोड़ो के पदों के हिसाब से एक हेडकांस्टेबल और 10 कांस्टेबल होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में एक हेडकांस्टेबल और 4 कांस्टेबल ही तेनात है। अधिकतर कांस्टेबल घोड़ो की सेवा का काम देखकर ट्रांसफर करवा लेते है। जिससे घोड़ो की उचित देखभाल नही हो पाती। इन में दो से तीन साल की ट्रेनिंग भी दी जाती है वर्ष 1998 के बाद से उदयपुर में 10 घोड़े ही है। यह सभी घोड़े राजस्थान पुलिस अकादमी जयपुर से आते है जहाँ घोड़ो को 2 से 3 वर्ष का प्रशिक्षण दिया जाता है । इसके बाद इन्हें प्रदेश के अन्य जिलों में भेजा जाता है ।  उदयपुर में अभी जाे छह घाेड़े बचे हैं, सभी 2009 से 2011 के बीच भेजे गए थे। पिछले 11 साल से यहां कोई नया घोड़ा नहीं आया है। 

रिशाला के नियमों के अनुसार एक घोड़े के रिटायरमेंट की उम्र 22 वर्ष है, लेकिन भारतीय नस्लों के घोड़ों की अधिकतम उम्र 20 वर्ष होती है। दरअसल, 17-18 की उम्र में इनके पैरों और पेट में बीमारी हो जाती है, जिससे रिटायरमेंट से पहले इनकी मौत हो जाती है।

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