वस्त्र मंत्रालय एवं इग्नू वं भारतीय जनजाति मंत्रालय के साझे में वूलन एक्सपो शुरू

वस्त्र मंत्रालय एवं इग्नू वं भारतीय जनजाति मंत्रालय के साझे में वूलन एक्सपो शुरू

भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय एवं इग्नू इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी एवं भारतीय जनजाति मंत्रालय के साझे में सात दिवसीय वूलन एक्सपो शुरू

 
woolen expo

उदयपुर 25 दिसंबर 2023। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय एवं इग्नू इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी एवं भारतीय जनजाति मंत्रालय के साझे में बीएन कॉलेज ग्राउंड में सात दिवसीय वूलन मेले का रविवार शाम को शुभारंभ हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि गोपाल सिंह भाटी, डॉ.अजयवर्धन आचार्य, उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन, उप महापौर पारस सिंघवी एवं जनजाति मंत्रालय के सीआर मीणा थे।

इस अवसर पर गोपाल सिंह भाटी ने कहा कि वस्त्र मंत्रालय की ओर से वुलन आर्टिजन के मेले तो पूरे भारतवर्ष में हर साल लगते हैं लेकिन राजस्थान का पहला वुलन मेला इस बार उदयपुर में लगाया गया है। राजस्थान में उदयपुर शहर को चुनने के पीछे यही कारण रहा है कि यह एक टूरिस्ट प्लेस हैं। यहां पर देश भर से ही नहीं विदेशों से भी सैकडो टूरिस्ट रोजाना उदयपुर आते हैं। ऐसे में इन आर्टिजन को देश के साथ विदेशी मेहमानों से भी मिलने का मौका मिलेगा और अपने हस्त निर्मित उत्पादों को उन तक पहुंचाने का सुनहरा अवसर भी प्राप्त होगा। ऐसे में इन आर्ट डिजाइन के उत्पादन का प्रचार-प्रसार तो होगा। साथ ही इन्हें अपने उत्पादों को बेचकर आर्थिक संबल भी प्राप्त होगा। 

उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी यही कहना है कि हमारा भारत आत्मनिर्भर बने। उसी कड़ी में यह मेले लगाए जाते हैं और हस्त निर्मित उत्पादों को भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा एक मंच उपलब्ध कराया जाता है।

इग्नू के रीजनल डायरेक्टर डॉ. अजय वर्धन आचार्य ने कहा कि उदयपुर का यह सात दिवसीय वूलन एक्सपो निश्चित तौर पर बुनकरों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। उदयपुर टूरिस्ट प्लेस होने के कारण यहां पर इनकी बिक्री में बढ़ोतरी होगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सपना भी साकार होगा।

उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमारी विरासत को संरक्षण प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है और वह लगातार इस कार्य को करने में अग्रसर हैं। भारत सरकार का वस्त्र मंत्रालय भी इसी दिशा में कार्य कर रहा है। हस्त निर्मित उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए यह एक बड़ा प्रयास है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सात दिवसीय इस वुलन प्रदर्शनी में सभी बुनकरों को अच्छा लाभ होगा और उनकी बिक्री का आंकड़ा सबसे बड़ा होगा। अपनी बात कहते हुए जैन ने यह सुझाव भी दिया कि आने वाले समय में जब भी यह वुलन मेला लगे इसे शिल्पग्राम में लगाने का प्रयास करना चाहिए। इन दिनों शिल्पग्राम मेला लगता है और वहां पर एक अनुमान के अनुसार 50000 मेलार्थी रोजाना वहां आते हैं। अगर शिल्पग्राम में यह मेला लगता है तो निश्चित तौर पर बहुत बड़े वर्ग तक इन हस्त निर्मित उत्पादों की पहुंच हो जाएगी और प्रधानमंत्री द्वारा आत्मनिर्भर भारत बनाने का जो सपना है उसमें बड़ी सफलता मिलेगी।

उप महापौर पारस सिंघवी ने कहां कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में जब से शासन संभाला है तब से ही वह आत्मनिर्भर भारत बनाने के प्रयास कर रहे हैं। उदयपुर में पहले भी इस तरह के मेले आयोजित हो चुके हैं।उन्होंने कहा कि 2014 से पहले बुनकरों की हालत और उनकी कला को ज्यादा प्रचार प्रसार नहीं मिल पाता था और नहीं उन्हें उचित मंच प्राप्त हो पाता था। लेकिन 2014 के बाद अब बुनकरों के साथ वह परिस्थितियां नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी जी लगातार आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और बुनकरों की दशा और दशा सुधारने में और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

सीआर  मीणा ने कहा कि भारतीय जनजाति मंत्रालय हमेशा ही भारत वस्त्र मंत्रालय के साथ मिलकर काम करता रहा है। तीन शोरूम पहले से ही उदयपुर में संचालित है। अब वह बुनकरों के लिए भी पूरी तरह से समर्पण भाव रखकर कार्य करेंगे।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ. नन्दन कुमार सिन्हा ने समारोह के अंत में धन्यवाद  ज्ञापित पित करते हुए कहा कि यह तो एक शुरुआती पहले आगे और भी इससे अच्छा करने का प्रयास करेंगे। इसके बाद मेवाड़ी संस्कृति के अनुरूप लोक नृत्य का संस्कृत आयोजन भी हुआ। एक्सपो में 50 स्टॉल गलायी गई है जो सभी बनुकरों को निःशुल्क उपलब्ध करायी गई है। यहां पर जम्मू कश्मीर की एक स्टॉल भी लगी है।

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