उदयपुर की आकांक्षा की RAS में छठी रैंक


उदयपुर की आकांक्षा की RAS में छठी रैंक 

आकांक्षा साल 2016 से उदयपुर के सरकारी सी.सै. स्कूल, साकरोदा में मैथ्स सब्जेक्ट की लेक्चरर हैं

 
aakanksha

उदयपुर की रहने वाली आकांक्षा दुबे ने दूसरे अटेम्प्ट में RAS क्लियर किया है। टॉप-10 में छठी रैंक लाने वाली आकांक्षा जब 10 साल की थी तो उनके पिताजी की एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी बड़ी बहन ने आर्थिक स्थिति संभाली और उनके इस मुकाम तक पहुंचने में मदद की।

आकांक्षा कहती हैं- मेरी ये सफलता मेरे पिता श्री लाल दुबे जी को समर्पित है, आज भी ऐसा लगता है कि पिताजी आसपास हैं और वे भी मेरी इस उपलब्धि पर खुश होंगे। 

उन्हें यकीन था कि इस बार उनका सिलेक्शन जरूर होगा। बता दें कि आकांक्षा साल 2016 से उदयपुर के सरकारी सी.सै. स्कूल, साकरोदा में मैथ्स सब्जेक्ट की लेक्चरर हैं। घर से स्कूल की दूरी 20 किमी है ऐसे में वे रास्ते में समय का उपयोग करते हुए पढ़ती थी।

कैसे शुरू हुई आकांक्षा की जर्नी, उन्हीं की जुबानी

राजस्थान RAS-2021 की मेरिट में छठी रैंक लाने वाली आकांक्षा (29) बताती हैं कि पिता श्री लाल दुबे का ट्रांसपोर्ट का बिजनेस था। जब वे 10 साल की थी तब उन्होंने अपने पिता को खो दिया था। तब से बड़ी बहन वंदना दुबे ने उनके परिवार को संभाला। उन्होंने ही आकांक्षा की पढ़ाई का जिम्मा उठाया। आकांक्षा कहती हैं कि मुझे पता था अभी संघर्ष और होना है ऐसे में मैंने शुरू से ही सिर्फ पढ़ाई पर फोकस किया। 10वीं के बाद स्कॉलरशिप मिली तो पढ़ाई में कोई दिक्कत नहीं आई।

पहली कोशिश में 950 वीं रैंक थी

शुरू से ही बहन वंदना ने सरकारी नौकरी के लिए प्रेरित किया था। वे उस समय कम्प्यूटर आपरेटर की जॉब करती थी। घर खर्च चलाने के साथ साथ मेरे स्कूल की फीस भी उन्होंने ही भरी। स्कूल के बाद मुझे कॉलेज में फीस की जरूरत नहीं ​पड़ी। अच्छे मार्क्स की वजह से मुझे स्कॉलरशिप मिल गई। एमएससी में गोल्ड मेडल और बीएड में गोल्ड मेडल होने से भी स्कॉलरशिप मिली।

ऐसे में 2016 में मेरा सिलेक्शन स्कूल शिक्षा लेक्चरर के पद पर हो गया था। लेकिन, मैंने साथ ही साथ RAS की तैयारी भी जारी रखी। आकांक्षा ने 2018 में RAS का पहला अटेम्ट दिया था। जिसमें उनकी 950 वीं रैंक आई। वे कहती हैं ये मेरा पहला अटेम्प्ट था।

इसके बाद मैंने अपनी गलतियों से सीखा और ये तय किया कि दुबारा से ये गलतियां नहीं दोहरानी है। मुझे खुद पर विश्वास था कि बिना कोचिंग के मैं RAS क्लियर कर सकती हूं। बता दें कि वंदना भाई बहनों में सबसे छोटी हैं। उनकी फैमिली में उनकी मां उषा दुबे, सबसे बड़ी बहन वंदना दुबे, उससे छोटी बहन सोनू दुबे और भाई शैलेंद्र दुबे है। आकांक्षा ने कहा कि मेरे परिवार से कोई भी प्रशासनिक सेवा में नहीं है।

आकांक्षा अपने परिजनों साथ ये खुशियां बांट रही हैं। उनके घर बधाई देने के आस-पड़ोस के लोग और परिजन पहुंच रहे हैं। स्कूल आते-जाते बस-रिक्शे में की पढाई

आकांक्षा कहती हैं- मैंने दिन में कितने घंटे पढ़ना है ये सोच कर कभी पढाई नहीं की। टॉपिक के साथ आगे बढ़ती गई। रोजाना एक टॉपिक को सिलेक्ट करती और पढ़ती थी। RAS का सिलेबस काफी बड़ा होता है तो समय लगता है ऐसे में टाइम मैनेजमेंट बेहद जरूरी है। 2016 में जब स्कूल लेक्चरर के पद पर सिलेक्ट हुई तो स्कूल मेरे घर से 20 किमी दूर था। ऐसे में आते-जाते रिक्शे या बस में अपने टॉपिक पढ़ती जाती थी। स्कूल में भी टॉपिक क्लियर होते जाते थे। बच्चों को पढ़ाती और खुद भी पढ़ती थी।

बच्चों के तनाव में रहने के उन्होंने टीएन कारण बताए जिनमे से पहला कारण बच्चा 18 से 20 साल की उम्र में अपने परिवार से अचानक दूर रहने लगता है। ऐसे में होम सिकनेस की वजह से उसमें डिप्रेशन बढ़ता जाता है।

दूसरा कारण- कोचिंग क्लास रूम में अपनी परफॉर्मेंस में लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाने से भी वह तनाव में आने लगता है। आसपास के स्टूडेंट्स मुझसे आगे निकल रहे हैं और मैं कुछ नहीं कर पा रहा या कर पा रही जैसी हीनभावना आने लगती है।

तीसरा कारण- ऐसे छात्र जो बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं उनके बीच अपनी कमजोर परफॉर्मेंस को लेकर वह चिंतित रहने लगता है। यह तनाव धीरे—धीरे बढ़ता है और उस समय उसे संभालने वाला कोई नहीं होता।

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