भारत रत्न डॉ राय के जन्मदिवस पर भारत के रत्नों को प्रणाम - डॉक्टर्स डे 2021

भारत रत्न डॉ राय के जन्मदिवस पर भारत के रत्नों को प्रणाम - डॉक्टर्स डे 2021

एक डॉक्टर ही होता है जो रोते हुए आए को मुस्कुराते हुए भेजता है; क्यों ऐसा हो रहा है कि जनता को डॉक्टर्स पर भरोसा नहीं है?  क्या यह बात सही है? क्या ऐसा समय आ गया जहाँ भरोसा नहीं रहा डॉक्टर पर?
 
doctor penalised

दुनिया के हर कोने में डॉक्टर्स डे अलग-अलग तिथि पर मनाया जाता है - ब्राज़ील में 18 अक्टूबर, क्यूबा में 3 दिसम्बर, ईरान में 23 अगस्त, अमरीका में 30 मार्च, वियतनाम 28 फरवरी, नेपाल में 4 मार्च और भारत में आज 1 जुलाई को डॉक्टर दिवस मनाया जाता है

डॉक्टर दिवस की परम्परा भारत सरकार द्वारा 1991 में शुरू की गई थी, और हर साल 1 जुलाई को राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस डॉक्टर्स डे, पहले ये जान लेते है की डॉक्टर्स डे क्यों मानते है और हमारे देश में डॉक्टर्स के प्रति क्या नजरिया है। चलिए पहले हम बात कर लेते है डॉक्टर डे क्यों मनाया जाता है ?

दरअसल भारत देश के चिकित्सक डॉ बिधानचंद्र राय का जन्म दिवस 1 जुलाई को मनाया जाता है।  उनका जन्म 1882 में बिहार के पटना ज़िले में हुआ था। कोलकाता में चिकित्सकीय शिक्षा पूर्ण करने के बाद डॉ राय ने एमआरसीपी और एफआरसीएस की उपाधि लंदन से प्राप्त की एवं उसके बाद 1911 में उन्होंने भारत में चिकित्सकीय जीवन की शुरआत की। पेशेवर सफर के बाद वे कोलकाता मेडिकल कॉलेज में व्याख्याता/प्रोफ़ेसर बने। व्याख्याता बनने के सफर में कैंपबेल मेडिकल स्कूल और फिर कारमाईकेल मेडिकल कॉलेज गए। एक डॉक्टर एक शिक्षक तक ही उनकी ख्याति सिमित नहीं थी बल्कि इसके साथ साथ स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर महात्मा गांधी के साथ असहयोग आंदोलन में शामिल होने से और ज़्यादा मान - प्रतिष्ठा बढ़ी। भारतीय जनमानस के लिए प्रेम और सामाजिक उत्थान की भावना डॉ. राय को राजनीति में ले आई। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने और बाद में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पद संभाला। डॉ. राय को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था। उनके जन्म दिवस को डॉक्टर्स डे के रूप में मनाया जाता है।

साथ ही भारत में राष्ट्रीय डॉक्टरों का दिन एक बड़ा जागरूकता अभियान है जो सभी को डॉक्टरों की भूमिकाओं, महत्व और जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक करने के साथ-साथ चिकित्सा पेशेवरों को प्रोत्साहित करने और उनके पेशे की जिम्मेदारियों का पालन करने के लिए महान अवसर प्रदान करता है।

कोटि कोटि प्रणाम

सबसे पहले मैं उन तमाम डॉक्टरों का दिल से शुक्रगुज़ार हूँ जो दिन रात हर समय हर पल अपनी सेवाएं देने के लिए हमेशा तत्पर रहते है।  उन सभी डॉक्टर्स को नमन है जिन्होंने कई ज़िंदगियाँ बचा कर कईओं को नया जीवन प्रदान किया है। भारत देश में डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है या यूँ कहे की सिर्फ भारत में ही नहीं दुनियाभर में डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है। अभी वर्तमान में चल रही कोरोना वाइरस जैसी जानलेवा बीमारी के आने से दुनिया भर में जहाँ हाहाकार मचा हुआ था वही डॉक्टर की सेना इनसे लड़ने को तैनात थी और आज भी तैनात है।

इस बीमारी में जहाँ एक तरफ लोग अपनों के पास आने से कतराते थे वही यह जांबाज डॉक्टर उनका इलाज कर रहे थे। कितने ही डॉक्टरों ने मरीज़ो का इलाज करते करते अपने जान की परवाह न करते हुए इलाज से दौरान खुद भी इस संक्रमण की चपेट में आये और न जाने कितने डॉक्टर्स ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। कई बार ऐसी परिस्थिति आ जाती है जहाँ डॉक्टर्स को कई कई घंटे काम करना पड़ता है जहाँ डॉक्टर्स को आराम करने का समय नहीं मिल पाता कई बार मरीज़ो की गंभीर स्थिति होती जहाँ दिन रात सजग रहना पड़ता है और एक ही दिन में कई बार जांच करनी करनी पड़ती है। 

डॉक्टर्स मरीज़ो का इलाज कर इनको नया जीवनदान देता है। इसके अलावा, यह दिन हमें निस्वार्थ सेवा और स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने में हमारे डॉक्टरों को धन्यवाद देने के लिए याद दिलाता है। अनेक ऐसे भी डॉक्टर है जो की मरीजों की आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर उनका इलाज कम पैसे में या मुफ्त करते है और मुफ्त दवाई उपलब्ध करवाते है। ऐसे डॉक्टर्स प्रशंसा के हक़दार होते है वे सही मायनो में मानवता के सेवक होते है। एक डॉक्टर ही होता है जो रोते हुए आए को मुस्कुराते हुए भेजता है। 

डॉक्टर्स आज से नहीं बल्कि प्राचीन काल में जब डॉक्टर्स की उपाधि या यूँ कह ले की इतनी उच्च स्तर की शिक्षा अर्जित जाने पर डॉक्टर नहीं बनता था। तब भी डॉक्टर्स प्राचीन औषधि से इलाज, वैध, महिलाओं के प्रसव के लिए दाई माँ इत्यादि हुआ करते थे जो इलाज करते थे। पहले के इलाज और आज के इलाज में अगर आप से पूछा जाए की क्या फ़र्क़ है, क्योँकि इलाज तो पहले भी होता था आज भी होता है, लेकिन पहले के मुक़ाबले आज इलाज करवाना इतना महंगा क्यों है?

यह सही है की इंसान जो भी पेशा चुनता है, जो काम करता है उनका उद्देश्य पैसा अर्जित करना होता है पर क्या पैसा अर्जित करने में मानवता को शर्मसार करना सही है??  क्योंकि कई बार अखबारों में खबरे आती है डॉक्टर्स अंगो के व्यापार करता पकड़ा जा रहा। कभी कभी इंसान पहले ही मर जाता है जैसा गब्बर इज़ बैक फिल्म में आपने देखा होगा वैसे कई डॉक्टर रील लाइफ की घटना को रियल लाइफ में भी अंजाम दे चुके है। ...लेकिन परिवारजन को बेवकूफ बनाने के लिए और पैसा कमाने की लूट में ऐसे गलतिया कर बैठते है जहाँ वे अपने प्रति विश्वास को खो देते है, जहाँ लोग डॉक्टर के नाम आने पर दो मर्तबा सोचते है एवं अलग अलग लोगो से राय लेते है क्योँकि उन्हें भरोसा नहीं होता ऐसे खबरों को सुन कर!! हालांकि भारत में कई प्रतिभाशाली ईमानदार डॉक्टर हैं पर यहां स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में काफी सुधार होना अभी बाकी है। भारत के कई योग्य डॉक्टर बरसों से विदेशों में बेहतर अवसर तलाशने जा रहे हैं। काबिल चिकित्सक भी दवा के अध्ययन के लिए विदेशों में जाते हैं और वहीँ बस जाते हैं।

भरोसे की डोर बंधी डॉक्टर्स और मरीज़ के दरमियान

वर्तमान में चल रही वैश्विक बीमारी के चलते लोगो का भरोसा डॉक्टर है लेकिन कई मामले ऐसे सामने आये है जहाँ लोगो को डॉक्टर्स पर भरोसा नहीं है। उनको लगता है की अगर के इस संक्रमण से ग्रसित है और आगे अस्पताल जाएंगे तो वापस नहीं आएँगे।जी हाँ, आपको शायद मेरी यहाँ बात अजीब लगे लेकिन ऐसी मामले मैंने देखे जहाँ लोग कहते है हॉस्पिटल में उनकी जान को खतरा है। विडंबना यह है कि इनमें से कोई भी जनता की सेवा के उद्देश्य से स्थापित नहीं किया जा रहा है। ये सिर्फ व्यापार करने के लिए हैं। इस बात का सिर्फ इतना निष्कर्ष निकलता है की ऐसा क्यों हो रहा है क्या जनता को डॉक्टर्स पर भरोसा नहीं है?  क्या यह बात सही है? क्या ऐसा समय आ गया जहाँ भरोसा नहीं रहा डॉक्टर पर?

स्वास्थ्य सेवारत डॉक्टर्स एक ऐसा पेशा है जहां लोग भरोसा करते है भगवान का दर्जा देते है डॉक्टर्स को पैसा लालच की भावना पर काबू पाना चाहिए ताकि वह पूरी ईमानदारी निष्ठां से मरीज़ो का इलाज करें ताकि उनका भरोसा बना रहे और हम डॉक्टर्स डे को इसी जज्बे और ख़ुशी के साथ इस अवसर को मनाये। डॉक्टर को अपनी सामाजिक दायित्व को समझना चाहिए।

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