जाने-माने मिनीएचर आर्टिस्ट बिलाल खान की कहानी, उन्ही की ज़ूबानी

जाने-माने मिनीएचर आर्टिस्ट बिलाल खान की कहानी, उन्ही की ज़ूबानी

लोक कलाओं, पारम्परिक और आधुनिक शैलियों का अनोखा संगम

 
bilaal khan cover page

उदयपुर। भारत की बरसों से चली आ रही सुन्दर संस्कृति और उससे जुड़ीं परम्पराओं ने अपने आप में अनेक कलाओं और विधाओं को समाहित कर रखा है। इन सभी कलाओं की अपनी एक विशिष्ट शैली है जो उस स्थान और लोगों के इतिहास और उनके जीवन का एक अभिन्न हिस्सा दर्शाती है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी ही ढेरों कलाओं के रंग चारों ओर छितरे हुए हैं जिनमें राजस्थान प्रदेश के उदयपुर शहर के मिनीएचर आर्टिस्ट बिलाल खान अपनी एक खास जगह रखते है।

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इस पेंटिंग पर किया गया जटिल काम उदयपुर के प्रसिद्ध कलाकार बिलाल खान के धैर्य और समर्पण को दर्शाता है
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Pichwai cow art

बिलाल खान के यही प्रयास है कि इन सभी खूबसूरत रंगों को आप तक लेकर आएं और आप भी अनुभव कर सकें कुछ अनूठा और बेजोड़। बिलाल खान ने कई कलाओं और विधाओं को एक साथ लाने का प्रयत्न किया है। इन्हीं का एक छोटा सा परिचय प्रस्तुत है आपके लिए ।

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यह पेंटिंग घोड़े, ऊँट और हाथी के रूप में सौभाग्य, शक्ति और प्रेम को प्रदर्शित करती है।
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बिलाल खान द्वारा मिनिएचर पेंटिंग बनाना सिखाया गया

कई सालों से बिलाल खान इस बहुमूल्य और ऐतिहासिक धरोहर को सहज और संभाल कर रखे हुए। जिस चित्रकारी को यह बनाते हैं उसे मिनिएचर पेंटिंग कहा जाता है। इसका इतिहास भारत में लगभग 1200 साल पुराना है। बिलाल खान बताते है की वे उदयपुर शहर के अलीपुरा क्षेत्र के रहने वाले है। उन्हे बचपन से ही चित्रकारी करना बेहद पसंद था । वे 15-16 साल की उम्र में स्केचिंग किया करते थे, धीरे-धीरे उनकी रुचि मिनीएचर पेंटिंग सीखने और बनाने में बढ़ने लगी, और वे आज एक बहुत ही फेमस आर्टिस बन चुके है। उन्होंने कला के क्षेत्र में अपना एक अलग मुकाम बनाया है। वे मिनीएचर पेंटिंग के साथ-साथ वॉल पेंटिंग, कैन्वस पेंटिंग, पिछवाई पेंटिंग, राधा- कृष्ण पेंटिंग भी करते है। आप इनके इंस्टाग्राम पेज (artbybilalkhan) पर भी इनकी खूबसूरत कला को देख सकते है ।

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सिटी पैलेस - पूरे महल में प्रदर्शित बिलाल खान की उत्कृष्ट कृतियाँ, कलात्मक प्रतिभा का स्पर्श जोड़ती हैं, जो इस ऐतिहासिक चमत्कार के शाही आकर्षण को पूरक बनाती हैं।

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Sarkar Khawaja Garib Nawaz
​ ​Sarkar Khawaja Garib Nawaz
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Heritage Dom wall Art
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Radha and Krishna

बिलाल खान की ज़िंदगी के खास पल जो काफ़ी यादगार रहे 

बिलाल खान बताते है की बचपन में उन्होंने 3 साल तक उनके गुरुजी नरेश सोनी से मिनीएचर पेंटिंग का प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे बताते है की रंगों का एक बक्सा था उसमे एक-एक करके उन रंगों के ढक्कन खोलकर उनमें झांककर देखा और तभी एक नटखट रंग मेरी उंगली के पोर से चिपक गया। मैंने पास रखे काग़ज़ से उसे पोंछना चाहा लेकिन उस मनमौजी ने काग़ज़ पर फिसलते हुए भी एक आकार ले लिया। शायद उस रंग की स्वतंत्र अभिव्यक्ति मेरे दिल को छू गई और मैंने एक-एक करके सभी रंगों से दोस्ती कर ली। उसके बाद उन्होंने खुद ही इस कला को सीखा ओर समझा और देखते ही देखते वे इस तरह की पेंटिंग बढ़ी ही आसानी से ओर सुंदरता से बनाने लगे साथ ही उन्होंने अपनी इस कला को अपना पुरा समर्पण दिया वह इस कला में निपुण है, और आज वे एक फेमस मिनीएचर आर्टिस्ट बन चुके है। बिलाल खान कहते है की आज भी वे अपने आप को एक लर्नर ( learner) मानते है । वे बताते है की उन्हे अभी भी बहुत कुछ सीखना बाकी है। आज भी वे वही जज़्बा रखते है कलाओं के प्रति जो उन्हे सालों पहले था । 

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बिलाल खान बताते है की एक वक्त ऐसा भी था, जब उनके परिवार के पास इतने संसाधन नहीं थे पर उन्हे पेंटिंग सीखने में इतनी रुचि थी बचपन में वे साइकिल पर सीखने जाया करते थे, जिसका एक पेडल था और एक पेडल नहीं था पर फिर भी वे पेंटिंग सीखने उस साइकिल से जाते थे।

वे बताते हैं कि जैसे कोई बेल बिना सहारे के नहीं बढ़ सकती, उसी तरह से इस पारंपरिक कला को संरक्षण की जरूरत है। क्योंकि इस कला को सीखने के लिए बहुत धैर्य और लिटरेचर का अध्ययन करना पड़ता है। ये कला कल्पना प्रधान है जिसमें सबसे ज्यादा रेखाओं का प्रयोग किया जाता है।

इस कला के लिए जो रंग बनाने पड़ते हैं वो भी ख़ास तरह के रंग होते हैं जिसमें पत्थर ,सब्जियों, खनिजों, नील, शंख के गोले, कीमती पत्थरों, शुद्ध सोने और चांदी से बनाए जाते हैं। इसका काम इतना बारीक़ होता है कि रेखाओं को बनाने के लिए जो ब्रश इस्तेमाल किया जाता है वो भी गिलहरी की पूँछ के बाल से ख़ासतौर पर तैयार किया जाता है। बिलाल खान के बेटे तस्कीन अली खान बताते है की वे महीने में या हफ़्ते में एक वर्क्शाप आयोजन करने पर विचार कर रहे है ताकि उनके पिता उन बच्चों को सीखा सके जिन्हे पेंटिंग करने में रुचि हो, और वे इस मिनीएचर पेंटिंग को लगन से सीखना चाहते हो।

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सिटी पैलेस में भी कर चुके है काम 

बिलाल खान ने 10-15 साल पहले "सिटी पैलेस के राजस्थान आर्ट स्कूल" में भी काफी लंबे समय तक काम किया है। इसी सिलसिले में उन्होंने लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ से भी मुलाकात करी। उन्होंने भी बिलाल खान के काम की सरहना करी। हाल ही में उन्होंने सिटी पैलेस में वॉल पेंटिंग करी है। साथ ही उन्होंने बड़ी - बड़ी होटलों के अलावा जावर माइंस रेल्वे स्टेशन पर भी कलाकृतियों बनाई है। 

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बिलाल खान और उनके बेटे तस्कीन आली खान ने लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ से भी मुलाकात करी।
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आर्टिस्ट बिलाल खान द्वारा निर्मित -Heritage Dom wall Art
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आर्टिस्ट बिलाल खान द्वारा निर्मित - Rehvas Home Stay

ना हार मानी ना निराश हुआ 

बिलाल खान बताते है की जब कोरोना महामारी का दौर था, तब सभी का काम रुक गया था।  कई एसे कलाकार भी थे जो हार मान चुके थे । उनको ऐसा लग रहा था की वे घरों में कैद हैं पर सच्चाई इससे परे हैं। घर वैसा ही है हम ही इसमें कैदी की तरह खुद को बरत रहे थे । यही एक महत्त्वपूर्ण और सुनहरा वक्त था खुद के भीतर झाँकने का एकआधुनिक और विकास के इस पथ पर दौड़ते-दौड़ते हम कहाँ तक आ पहुंचे है। 

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यह समय कुछ देर ठहर कर, अपने सफर को देखने का है, उसे महसूस करने का था। पता नहीं फिर हमें यह अवसर मिले न मिले। वे कहते है की में कोरोना जेसे कठिन समय में भी हार नहीं मानी और मेहनत करता रहा। तभी उनके बेटे तस्कीन अली खान ने अपने पिता का पूरा समर्थन किया, उन्होंने ही अपने पिता के इस हुनर को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया । वे अपने बेटे को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहते है की आज जो लोग मुझे जानते है या मेरे काम की सरहना करते है तो वह सिर्फ मेरे बेटे तस्कीन अली खान की वजह से । 

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​Queen Mumtaz Miniature Art- आर्टिस्ट बिलाल खान

मिनिएचर पेंटिंग क्या होती है ?

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आर्टिस्ट बिलाल खान द्वारा निर्मित

लघु चित्रकारी राजस्थान में 16 वीं शताब्दी में विकसित कलाओं में से एक थी। यह एक बेहद सुन्दर कला है जिसमें विस्तृत दृश्य कथाओं का चित्रण किया गया है। बेहद महीन ब्रश के काम के लिए प्रसिद्ध यह शैली कलात्मक रंगों से सजी होती है। मिनिएचर (Miniature) पेंटिंग का मतलब होता है लघु या छोटे आकर का चित्र, जिसका इतिहास भारत में लगभग 1000 से 1200 साल पुराना बताया गया है। इसमें खास चित्रकारी या पेंटिंग करने में हाथों से रंगों का इस्तेमाल किया जाता है, जिमसें धार्मिक, पौराणिक, श्री कृष्ण की रास लीला से लेकर गुरुनानक देव जी की जन्मसाखी तक के वर्णन को खास तरह के रंगों से सजाया गया है।

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