नाथद्वारा-सीएम पद के दावेदार डॉ सी पी जोशी के 1 वोट से हारने पर चर्चित हुई थी सीट

नाथद्वारा-सीएम पद के दावेदार डॉ सी पी जोशी के 1 वोट से हारने पर चर्चित हुई थी सीट

नाथद्वारा के विधायक डॉ सीपी जोशी अभी विधानसभा के अध्यक्ष है

 
Nathdwara

राजसमंद ज़िले की नाथद्वारा विधानसभा सीट जहाँ 2008 के चुनावी नतीजों के बाद सबसे ज़्यादा चर्चा में रही थी। चर्चा की वजह थी इस सीट से कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेशाध्य्क्ष और मुख्यमंत्री पद के सशक्त दावेदार डॉ सी पी जोशी मात्र 1 वोट से हार गए। और मुख्यमंत्री की कुर्सी उनके हाथ से एक वोट से छिटक गई थी।  2008 में कांग्रेस ने चुनाव जीतकर बसपा के सहयोग से सरकार बनाई थी। 

आगामी चुनाव में भी इस सीट से अभी तक कांग्रेस भाजपा के प्रत्याशी घोषित नहीं हुए है लेकिन माना जा रहा है की नाथद्वारा सीट से कांग्रेस वर्तमान विधायक और राजस्थान विधानसभा के अध्य्क्ष डॉ सीपी जोशी को ही उम्मीदवार बनाएगी।  डॉ सीपी जोशी नाथद्वारा विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रह चुके है।  

दूसरी ओर 2008 में डॉ सीपी जोशी को मात्र 1 वोट से हराने वाले स्वर्गीय कल्याण सिंह चौहान 2013 में भाजपा की टिकट से डॉ सीपी जोशी के मुकाबले में चुनाव में विजयी रहे थे।  2018 में भाजपा ने कांग्रेस से भाजपा में आए महेश प्रताप सिंह को टिकट दिया था जिन्हे डॉ सीपी जोशी ने 16490 मतों से परास्त किया था। 

हाल ही में मेवाड़ राजघराने के विश्वराज सिंह ने जब से दिल्ली जाकर भाजपा का दामन थामा है तब से विश्वराज सिंह के उदयपुर शहर विधानसभा और नाथद्वारा विधानसभा से भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ने की चर्चा ज़ोरो पर थी। और आज ही भाजपा की दूसरी सूची में उनके उम्मीदवरी को घोषणा हो गई। इधर कांग्रेस की पहली सूची में नाथद्वारा से डॉ सीपी जोशी की उम्मीदवारी की भी घोषणा हो चुकी है। अब दोनों का मुकाबला तय है।  हालाँकि विश्वराज सिंह पर बाहरी होने का विरोध हो सकता है लेकिन मेवाड़ राजघराने से जुड़े होने का लाभ भी मिल सकता है। 

क्या है इतिहास इस विधानसभा सीट 

1977 से लेकर 2018 तक पिछले 10 चुनावो में पांच बार कांग्रेस और चार बार भाजपा और एक बार जनता पार्टी (जेपी) ने इस सीट से चुनाव जीता है।  कांग्रेस की ओर से पांचो बार इस सीट से डॉ सीपी जोशी ने जीत दिलाई है।  जबकि भाजपा की तरफ से दो बार शिवदान सिंह तथा दो बार कल्याण सिंह ने जीत दिलाई है। 

1977 की जनता लहर में जनता पार्टी (जेपी) की टिकट से नवनीत कुमार ने कांग्रेस के मनोहर कोठारी को 14827 वोटो से हराया था जबकि 1973 से मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष पद का चुनाव जीतकर राजनीती में प्रवेश करने वाले डॉ सीपी जोशी ने 1980 में कांग्रेस की टिकट से चुनाव लड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे भाजपा के हीरालाल कटारिया को 9649 वोटो से हराकर विधानसभा में प्रवेश किया था। 

उसके बाद 1985 में हुए विधानसभा चुनाव में भी डॉ सीपी जोशी ने भाजपा के विजय सिंह झाला को 26190 वोटो के बड़े अंतर से हराया था। वहीँ 1990 में  में भाजपा के शिवदान सिंह ने कांग्रेस के डॉ सीपी जोशी को 9684 वोटो से शिकस्त दी थी। जबकि 1993 में भाजपा के शिवदान सिंह ने कांग्रेस के किशन त्रिवेदी को 6878 वोटो से पराजित किया था। 

वर्ष 1998 के विधानसभा चुनाव में डॉ सीपी जोशी ने भाजपा के शिवदान सिंह को 6647 मतो से परास्त किया था। वहीँ 2003 के विधानसभा चुनाव में डॉ सीपी जोशी ने भाजपा के रामचंद्र बागोरा को 10814 वोटो से हराया था। 

नाथद्वारा सीट का सबसे दिलचस्प चुनाव 2008 में हुआ जहाँ कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेशाध्य्क्ष और मुख्यमंत्री पद के सशक्त दावेदार डॉ सी पी जोशी ने कांग्रेस को प्रदेश में तो जिता दिया लेकिन अपने खुद की सीट मात्र 1 वोट से भाजपा के कल्याण सिंह के हाथो हार गए और डॉ सीपी जोशी के मुख्यमंत्री बनने का सपना चकनाचूर हो गया। डॉ सी पी जोशी, चुनावी इतिहास में 1 वोट से चुनाव हारन वाले दुसरे नेता बने, इससे पूर्व 2004 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के आर ध्रुवनारायण ने सन्थरमाराहल्ली (Santhermarahalli) विधानसभा सीट से जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवार ए आर कृष्णमूर्ति को 1 वोट से हराया था।     

हालाँकि 2009 में डॉ सीपी जोशी ने भीलवाड़ा लोकसभा सीट से सांसद का चुनाव जीतकर मनमोहन सिंह सरकार ने केबिनेट मंत्री की हैसियत से केंद्र की राजनीती में चले गए लेकिन 2014 के चुनाव में मोदी लहर में जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट से चुनाव हार गए। 

2013 के विधानसभा चुनाव में 1 वोट से जीतने वाले भाजपा के कल्याण सिंह ने कांग्रेस के डॉ सीपी जोशी को इस बार 12472 वोटो से पटखनी दी थी। वहीँ पिछले 2018 के विधानसभा के चुनाव में डॉ सीपी जोशी ने भाजपा के महेश प्रताप सिंह पर 16490 वोटो से जीतकर प्रदेश में विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर अपने की आसन्न किया।  

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