मेवाड़ के इको टूरिज्म प्लेसेज पर घूमने के साथ लिया जा सकता है वाइल्ड लाइफ का मजा


मेवाड़ के इको टूरिज्म प्लेसेज पर घूमने के साथ लिया जा सकता है वाइल्ड लाइफ का मजा

World Nature Conservation Day

 
nature

प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर हरे-भरे जंगल, कुलांचे भरते चीतल-हिरण, पानी में आराम फरमाते घडिय़ाल, शिकार की तलाश में घूमते जंगली पशु और वनस्पति से लकदक क्षेत्र। कोई भी एडवेंचर का शौकीन व्यक्ति सेंचुरीज या फिर ऐसे इको डेस्टिनेशंस पर इन नजारों का लुत्फ उठाने जरूर जाना चाहेगा। शहर में व शहर के आसपास अब ऐसे कई डेस्टिनेशंस हैं, जहां मानसून के मौसम में सभी जाना चाहेंगे। इस समय इनकी खूबसूरती और बढ़ चुकी है। यहां न केवल विभिन्न तरह के पेड़-पौधे, वनस्पति व हरियाली है, बल्कि वाइल्ड लाइफ का भी लुत्फ उठाया जा सकता है। बस, हम इस प्राकृतिक खजाने को संरक्षित रखें ताकि आने वाली पीढि़यां भी इसका आनंद ले सकें।

एडवेंचर व नेचर लवर टूरिस्ट्स के लिए वन विभाग की पहल

जो टूरिस्ट एडवेंचर का शौक रखते हैं और नेचर लवर्स भी हैं, उनके लिए हाल ही वन विभाग ने वन भ्रमण कार्यक्रम की शुरुआत की है। जिसके माध्यम से इको ट्यूरिज्म स्थल फुलवारी की नाल अभयारण्य के पानरवा, रावली टाडगढ़ अभयारण्य के दूधलेश्वर, गोरमघाट व भीलबेरी वाटर फॉल, बस्सी अभयारण्य व सीतामाता अभयारण्य के आरामपुरा व जाखम बांध, कुंभलगढ़ अभयारण्य के कुंभलगढ़ व रणकपुर, जयसमंद अभयारण्य के झूमर बावड़ी व बाघदर्रा के क्रोकोडाइल कंजर्वेशन रिजर्व तथा जवाई बांध के लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व का भ्रमण का आनंद लिया जा सकता है।

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यादगार रहेगी ट्रेन सफारी- गोरम घाट

मावली-मारवाड़ रेल खण्ड के कामलीघाट रेलवे स्टेशन से 14 किलोमीटर दूर गोरमघाट पहुंचने में करीब एक घंटे का समय लगता है। वर्ष 1938 में मेवाड़ रियासत के समय पहाड़ों के बीच निकाली गई। इस रेलवे लाइन को घुमावदार घाटी, पहाड़ी, ढलान व गहरी खाइयों के बीच निकाला गया है। गोरमघाट पहुंचने के लिए पर्यटकों को सिर्फ रेल का ही सहारा लेना पड़ता है। लेकिन यह ट्रेन सफारी ही लोगों के लिए यादगार बन जाती है। यह ट्रेन 22 किलोमीटर का सफर पहाड़ों और गुफाओं से गुजरते हुए तय करती है। गोरमघाट धार्मिक आस्था का केन्द्र है और संरक्षित वन क्षेत्र रावली-टाडगढ़ का हिस्सा है। यहां की वनस्पति और वन्य जीव हर किसी के लिए आकर्षण का केन्द्र हैं। इस वन क्षेत्र में पैंथर, भालू और हिरण के अलावा स्याह घोष और जंगली बिल्ले इसकी खासियत है। वन विभाग के वन भ्रमण कार्यक्रम में 29 जुलाई को यहां ले जाया जाएगा।

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ट्रेकिंग का मजा 

वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में ऐसी जगह भी होती है, जो ट्रेकिंग के लिए बेस्ट होती हैं । ट्रेकिंग रूट पर घाटियां, घने जंगल, प्राकृतिक झरने, पशु-पक्षी के नजारे एडवेंचर पैदा करते हैं। यहां जाने का सबसे अच्छा मौसम बारिश व सर्दियों में ही होता है। यहां आकर ना सिर्फ ट्रेकिंग का बल्कि वाइल्ड लाइफ का नजदीक से मजा लिया जा सकता है। कई ऐसे दुर्लभ जीव-जंतु भी ऐसे अभयारण्यों में देखने को मिल जाते हैं। फिर जो वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी का शौकीन है, उसके लिए तो यह मजा दोगुना हो जाता है।

ये हैं प्रमुख डेस्टिनेशंस

  • सीतामाता अभयारण्य
  • कुम्भलगढ़ अभयारण्य
  • बाघदड़ा नेचर पार्क
  • फुलवारी की नाल
  • उभयेश्वर 
  • अलसीगढ़
  • रायता हिल्स
  • केवड़े की नाल
  • मेवाड़ जैव विविधता पार्क- जयसमंद

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