सूरत की कपड़ा फैक्टरी से मुक्त कराए गए उदयपुर अंचल के 91 नन्हें बाल मजदूर

उदयपुर पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता की पहल से मुक्त हुए 91 बाल श्रमिक 
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91 child labor rescue

उदयपुर 13 मई 2026। उदयपुर पुलिस, मानव तस्करी विरोधी यूनिट एवं गायत्री सेवा संस्थान उदयपुर की सयुक्त कार्यवाही से ट्रैफिकिंग के जरिए लाए गए और सूरत के कपड़ा उद्योग में मामूली पैसों पर कार्यरत 91 बाल मजदूरों को मुक्त कराया गया। मुक्त कराए गए इन बच्चों की उम्र 7 से 14 के बीच है। हालांकि भनक लगते ही सभी ट्रैफिकर और मालिक मौके से फरार हो गए। मुक्त कराए गए बच्चों में से ज्यादातर राजस्थान के उदयपुर अंचल के जनजातीय इलाकों के हैं जबकि तीन उत्तर प्रदेश के और एक-एक बच्चे झारखंड व बिहार के हैं। इन सभी को बाल कल्याण समिति, सूरत के समक्ष पेश किया गया और कानूनी कार्यवाही की जा रही है।   

सामाजिक कार्यकर्ता और राजस्थान बाल आयोग के पूर्व सदस्य डॉ शैलेंद्र पंड्या द्वारा छानबीन और तथ्यों के आधार पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, भारत सरकार द्वारा संज्ञान लेकर निर्देश जारी किए गए l साथ ही डॉ. पंड्या ने उदयपुर की नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन को पूरे मामले की जानकारी दी, जिसके बाद उदयपुर पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, उदयपुर  एवं उदयपुर पुलिस के 22 पुलिस अफसरों की टिम गठित कर इन्हें सूरत भेजा l टिम द्वारा सूरत के पूना पुलिस थाने के साथ नागरिक समाज संगठन जस्ट राइट, एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए), गायत्री सेवा संस्थान उदयपुर ने मिलकर इस रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया l 

डॉ. पंड्या द्वारा स्थानीय नेटवर्क और संस्थाओं के माध्यम से महीने भर से सूरत के विभिन्न कपड़ा फैक्टरी की निगरानी और छानबीन में यहां बड़ी संख्या में बाल मजदूरों की मौजूदगी की पुष्टि के बाद उसने एनसीपीसीआर को इसकी जानकारी दी। मुक्त कराए बच्चों ने फिर पुलिस को सुराग दिए और उन्हें उन जगहों का पता बताया जहां बाल मजदूरी कराई जा रही थी। 

इस अवसर पर डॉ. शैलेंद्र पंड्या ने बताया, “बच्चे हमें एक इमारत के पास ले गए जो बाहर से बंद थी। लेकिन उन्होंने बताया कि अंदर बच्चे काम कर रहे हैं। हम जब अंदर गए तो पाया कि वहां सात साल तक के बच्चों से काम कराया जा रहा था। सभी बच्चे घबराए हुए और बदहवासी की हालत में थे और 12 घंटे की शिफ्ट में काम करने के बाद थके हुए थे।”

डॉ. पंड्या ने बताया कि अंदर जाने के बाद वे बच्चों की बदहाली देखकर दंग रह गए। आठ साल के एक बच्चे के पास पहनने को शर्ट तक नहीं थी। वह दूसरे बच्चों के पीछे छिप गया और उनसे पूछ रहा था कि क्या कोई थोड़ी देर के लिए अपनी शर्ट उसे दे सकता है। उन्होंने पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि पुलिस और सभी हितधारकों की त्वरित कार्रवाई और मामले को गंभीरता से लेने के कारण ही इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को मुक्त करा पाना संभव हो पाया। 

प्रारंभिक जांच से पता चला है कि इन बाल दुर्व्यापारियों और फैक्टरी मालिकों ने संदेह से बचने के लिए तमाम तरीके अपना रखे थे। छोटे बच्चों को बिल्कुल सुबह यहां लाया जाता था और फिर इमारत के दरवाजे बाहर से बंद कर दिए जाते थे। शाम को सात बजे काम की शिफ्ट खत्म हो जाने के बाद ही दरवाजे खोले जाते थे। 

इन सभी बच्चों को आस-पास की कालोनियों में बहुत ही दयनीय और अमानवीय हालत में रखा जाता था। एक छोटे से कमरे में 10 से 12 बच्चे रहते थे जहां बुनियादी सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं था। पूछताछ के दौरान कुछ बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता को पता था कि उन्हें मजदूरी के लिए यहां लाया गया है। उधर, ज्यादातर छोटे बच्चों ने बताया कि उन्हें घुमाने के नाम पर यहां लाया गया था और उन्हें कतई अंदाजा नहीं था कि यहां उनसे मजदूरी कराई जाएगी। यह भी पता चला कि कुछ बच्चे इन कपड़ा इकाइयों में तीन-चार साल से काम कर रहे थे जबकि बाकियों को हाल ही में यहां लाया गया था। मुक्त कराए गए बच्चों में आठ और दस साल के दो भाई भी थे जिन्हें राजस्थान के उदयपुर ज़िले से लाया गया था।

ट्रैफिकिंग गिरोहों और बाल मजदूरी के तार मजबूती से जुड़े होने को रेखांकित करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, “इस छापे से यह तथ्य स्थापित हो जाता है कि ट्रैफिकिंग गिरोह कितने संगठित हैं और उनकी जड़ें कितनी गहरी हैं। खास तौर से जनजातीय इलाकों और संवेदनशील परिवारों के बच्चों को झूठे वादों के जाल में फंसा कर ऐसी शोषणकारी परिस्थितियों में धकेल दिया जाता है जहां वे बाहरी दुनिया से कट जाते हैं और अपना बचपन खो बैठते हैं। यह मामला एक बार फिर अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत बनाने, बाल मजदूरी की मांग व आपूर्ति पर नजर बनाए रखने, बच्चों का शोषण करने वाले नियोक्ताओं और शोषण में शामिल सभी बिचौलियों की धरपकड़ और उनकी जवाबदेही तय करने की तत्काल जरूरत को साबित करता है।”  

आज हुए इस पूरे रेस्क्यू में पुलिस अधीक्षक उदयपुर के निर्देशन में गठित टीम में मानव तस्करी निरोधक यूनिट उदयपुर के प्रभारी दया राम, 4 सहायक उप निरीक्षक पर्वत सिंह, सुखलाल, जीवाराम, नरेन्द्र सिंह, यूनिट से सुभाष चंद्र, नरपत सिंह सहित कुल 22 पुलिस प्रतिनिधि एवं गायत्री सेवा संस्थान से नितिन पालीवाल, रामचंद्र मेघवाल और पायल कनेरिया उपस्थित रहे l 

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