उदयपुर 12 अक्टूबर 2022 । यूआईटी ने फतेहसागर झील में पेट्रोल डीज़ल चलित नावो के पुनः संचालन की अनुमति प्रदान कर दी है। 1 अक्टूबर 2022 से यूआईटी ने फतहसागर झील में हाई कोर्ट के आदेश की पालना के अनुरूप डीज़ल पेट्रोल चलित नावों का संचालन बंद कर दिया था।
आज यूआईटी ने फतेहसागर के दोनों नाव संचालको मेवाड़ बोटिंग और रामदेव जनरल मोटर्स को कोर्ट के अग्रिम आदेश तक डीज़ल पेट्रोल से संचालित होने वाली नावो के संचालन का आदेश दे दिया है। जबकि कोर्ट की अगली सुनवाई 19 अक्टूबर को ही है।
नाव संचालको का कहना है की कोर्ट ने नाव संचालन को बंद करने का आदेश नहीं दिया था। बल्कि इसे स्थानीय प्रशासन के विवेक पर छोड़ा था। ऐसे में 10 दिन उन्हें नाव का संचालन रोकना पड़ा जिसका उन्हें आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ा।
ऐसे में सवाल उठना लाज़िम है की अगर यूआईटी ने पर्यावरण और जलीय जीवो के हित में पेट्रोल डीज़ल संचालित नावों को बंद करने का आदेश दे दिया था तो वापिस क्यों शुरू किया ? अगर पर्यटकों के लिए और नाव संचालको के टेंडर की शर्तो के मुताबिक नाव संचालन ज़रूरी था तो चप्पू वाली नाव या सोलर बैटरी संचालित नाव भी तो शुरू की जा सकती थी।
दूसरा अहम् सवाल अगर 19 अक्टूबर की सुनवाई में कोर्ट जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल डीज़ल) संचालित नावों पर प्रतिबंध लगा देता है तो ऐसे में पुनः नाव संचालन रोकना पड़ेगा। और यदि कोर्ट के आदेश पर 1 अक्टूबर में फतहसागर में बोटिंग बंद की तो नगर निगम को पीछोला में बोटिंग बंद करने का आदेश क्यों नहीं दिया ?
और अगर कोर्ट 19 अक्टूबर को भी अगली सुनवाई की तारीख आगे बढ़ा दी या फैसला नाव संचालको के पक्ष में दे दिया तो पिछोला और फतेहसागर जो की शहरवासियों का पेयजलस्त्रोत है उनको ऐसे ही प्रदूषित होने दिया जाएगा ? क्या जलीय जीवो को उनके हाल पर छोड़ दिया जाएगा ?
Credit by Sohail Khan and Alfiya Khan
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