साइबर ठगी में फ्रीज खाता अब होगा आसानी से अनफ्रीज, GRM सिस्टम बना राहत
Udaipur Times, Rajasthan News: उदयपुर/जयपुर 18 मई 2026। साइबर धोखाधड़ी (Cyber Froud) के मामलों में जांच के दौरान फ्रीज किए जाने वाले बैंक खातों से परेशान आमजन के लिए अब बड़ी राहत की खबर है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा विकसित GRM (ग्रीवेंस रिड्रेसल मैकेनिज्म) मॉड्यूल अब ऐसे खाताधारकों के लिए प्रभावी और पारदर्शी समाधान बनकर उभरा है, जिनके बैंक खाते साइबर जांच के दौरान संदिग्ध ट्रांजेक्शन के कारण फ्रीज, लियन या होल्ड कर दिए जाते हैं। Cyber Fraud Frozen Bank Account Relief
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वी. के. सिंह ने बताया कि राज्य में साइबर अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को त्वरित राहत देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी दिशा में लागू किया गया जीआरएम मॉड्यूल आमजन के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। पहले ऐसे मामलों में खाताधारकों को पुलिस, बैंक और विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे लेकिन अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और जवाबदेह तरीके से संचालित की जा रही है।
क्या है GRM मॉड्यूल?
GRM मॉड्यूल एक ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली है, जो नेशनल साइबर क्राईम रिर्पोटिंग पोर्टल (NCRP) और सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिर्पोटिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (CFCFRMS) के अंतर्गत कार्य करती है। इसका उद्देश्य साइबर अपराध जांच के दौरान फ्रीज या लियन किए गए बैंक खातों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक खाताधारकों को राहत उपलब्ध कराना है।
ऐसे काम करता है GRM मॉड्यूल
GRM प्रक्रिया के तहत खाताधारक सबसे पहले अपनी बैंक शाखा में जाकर खाते को अनफ्रीज करवाने या लियन हटाने के लिए आवेदन करता है। इसके बाद बैंक संबंधित व्यक्ति की केवाईसी और ट्रांजेक्शन का सत्यापन करता है। सत्यापन के बाद बैंक GRM पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर एक ग्रीवेंस आईडी जनरेट करता है और मामला संबंधित थाना पुलिस जांच अधिकारी को भेजा जाता है।
पुलिस जांच अधिकारी ट्रांजेक्शन ट्रेल, संदिग्ध गतिविधियों और फ्रॉड इन्वॉल्वमेंट की जांच करता है। आवश्यकता पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से खाताधारक का पक्ष भी सुना जाता है। जांच पूरी होने के बाद अधिकारी खाते को अनफ्रीज करने, लियन हटाने या शिकायत खारिज करने का निर्णय लेकर बैंक को सूचित करता है। यदि थाना स्तर पर शिकायत खारिज होती है, तो खाताधारक जिला और राज्य स्तर के ग्रीवेंस रिड्रेसल ऑफीसर (जीआरओ) के समक्ष अपील भी कर सकता है।
तीन स्तरों पर तय हुई जवाबदेही
GRM प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और बैंक दोनों स्तरों पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। पुलिस स्तर पर राज्य स्तर पर डीआईजी, जिला स्तर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक/डीएसपी और थाना स्तर पर जांच अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है।
बैंक स्तर पर नेशनल नोडल ऑफिसर, स्टेट ग्रीवेंस ऑफिसर और ब्रांच ग्रीवेंस ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं।
राजस्थान पुलिस की अपील
राजस्थान पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, ओटीपी और निजी बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यदि किसी व्यक्ति का बैंक खाता अनपेक्षित रूप से फ्रीज हो जाता है और वह स्वयं को निर्दोष मानता है, तो तुरंत अपनी बैंक शाखा से संपर्क कर जीआरएम प्रक्रिया शुरू करवाए।
साइबर ठगी या संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन, साइबर पुलिस स्टेशन, साइबर क्राइम पोर्टल https://cybercrime.gov.in, साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 / 9257510100 पर सूचना दे।
