Udaipur Times, Jaisamand Water: उदयपुर सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सलूम्बर जिले के अन्तर्गत जयसमन्द झील का पानी जिले के सराड़ा एवं सेमारी क्षेत्र में पेयजल एवं सिंचाई के लिए उपयोग करने योजना की स्वीकृति देने का आग्रह किया है।
सांसद डॉ रावत ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि सलूम्बर जिले के सराड़ा एवं सेमारी क्षेत्र में आज भी अधिकांश गांव एवं क्षेत्र पर्याप्त पेयजल एवं सिंचाई सुविधाओं से वंचित हैं। सराड़ा पंचायत समिति के सराड़ा, केजड़, चावण्ड, नठारा, नालहल्कार, सरसियां, थाना जैसी ग्राम पंचायतों सहित आसपास के क्षेत्रों तथा सेमारी पंचायत समिति क्षेत्र में भी स्थानीय निरंतर व उचित क्षमता के जलस्त्रोत सीमित होने के कारण ग्रामीणों को जल संकट का सामना करना पड़ता रहा है। इस वर्ष की भांति कम वर्षा के कालखंड में यह समस्या और भी गहरा जाती है।
आमजन भी जानते हैं कि जयसमन्द का पानी इन स्थानीय क्षेत्रों में नहीं मिलने के कारण इन गांवों के साथ ही मेवल के क्षेत्रवासियों में रोष भी है एवं इनके द्वारा निरन्तर जयसमन्द झील का पानी उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है।
सांसद डॉ रावत ने आग्रह किया कि आमजन की मांग अनुसार जयसमन्द झील के जल को सलूम्बर जिले के सराड़ा एवं सेमारी क्षेत्र सहित मेवल के वंचित क्षेत्रों तक प्राथमिकता के साथ पेयजल एवं सिंचाई के लिए पहुंचाने की अतिरिक्त योजना को स्वीकृति प्रदान करें तथा स्थानीय जलस्रोतों को जयसमन्द झील से जोड़ने की कार्रवाई के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दें। इससे क्षेत्र की लगभग 4 लाख से अधिक आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जैसा कि इसके मूल में ही वंचित क्षेत्र को राहत देने में है. भी सार्थक होगी।
सांसद ने बताया कि सराड़ा, सेमारी व मेवल क्षेत्र के लिए प्रस्तावित नवीन पहल जाखम जयसमन्द वृहद जल परियोजना को और अधिक व्यापक एवं जनोपयोगी बनाएगी तथा विकसित भारत अन्तर्गत विकसित राजस्थान एवं विकसित सलूम्बर विशेषतः विकसित व आकांक्षी जनजाति क्षेत्र के रूपांतरण, की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।
सांसद डॉ रावत ने पत्र में उदयपुर संसदीय क्षेत्र में स्थित जयसमन्द झील को वर्ष पर्यन्त जल से परिपूर्ण रखने तथा इसके जल का पेयजल एवं सिंचाई हेतु व्यापक उपयोग सुनिश्चित करने के लिए जाखम जयसमन्द वृहद जल परियोजना को स्वीकृति प्रदान करने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि लगभग ₹7,300 करोड़ से अधिक लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से माही एवं जाखम नदियों से बांध की क्षमता से अधिक पानी बहकर अरब सागर में चला जाता था। अब इस अतिरिक्त जल का उपयोग जयसमन्द झील को भरने तथा पेयजल एवं सिंचाई के लिए किया जाएगा। इससे दक्षिण राजस्थान के 9 जिलों को सीधा लाभ प्राप्त होगा, जिसमें अधिकांशतः ग्रामीण व जनजाति क्षेत्र हैं।