सूरजपोल चौराहा का फ्रंट सात फीट छोटा कर रहे


सूरजपोल चौराहा का फ्रंट सात फीट छोटा कर रहे

अब नगर निगम को भी यह अहसास हो रहा है कि चौराहा बहुत ज्यादा बड़ा बना दिया तो अब छोटा करने की कवायद शुरू की गई है। 

 
Surajpol Chouraha
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उदयपुर 15 जून 2024 ।  शहर के प्रमुख चौराहे सूरजपोल के साथ लगातार प्रयोगो के बाद अब  उदयपुर नगर निगम की आँख खुली और अब इस चौराहे को छोटा करने की कोशिश की की जा रही है। जी हाँ सूरजपोल पर बनाई मेकेनिकल पार्किग के सामने वाले फ्रंट से चौराहे को करीब सात फीट छोटा किया जा रहा है। यानि  कि जो दीवार और निर्माण है उसको तोड़कर आगे सड़क के लिए जगह छोड़ी जा रही है। यह काम करीब महीने भर चलेगा जिसमे पांच लाख रुपए की लागत आएगी। इस प्रयास के बाद चौराहा पर टाउनहॉल से उदयापोल जाने वाली जगह पर सड़क की चौड़ाई 30 फीट से बढ़कर 37 फीट हो जाएगी। 

आपको बता दे जब से इस सूरजपोल चौराहे को लेकर निर्माण शुरू हुआ था तब से लगातार इसका विरोध हो रहा है लेकिन उदयपुर नगर निगम ने जनता और जानकारों की एक भी नहीं मानो और एक तरह से यह एक्सीडेंट जोन जैसा चौराहा बना डाला। अब नगर निगम को भी यह अहसास हो रहा है कि चौराहा बहुत ज्यादा बड़ा बना दिया तो अब छोटा करने की कवायद शुरू की गई है। 

surajpol

पूर्व में सूरजपोल चौराहा पर एक छतरी थी और चारों तरफ ट्रैफिक लाइट से यातायात सूचारू रूप से चलता था। उसके बाद इस चौराहा पर लगातार प्रयोग  किए गए लेकिन भी जनता परेशान होकर भी चुप थी लेकिन जब चौराहा पर निर्माण शुरू हुआ तो विरोध हुआ और नगर निगम ने एक नहीं सुनी और अपने हिसाब से चौराहा बनाया। 

पूर्व पार्षद और कांग्रेस की महिला शहर अध्यक्ष नजमा मेवाफरोश का कहना है इस चौराहा का पुराना स्वरूप लौटा दिया जाए। नजमा कहती है कि जैसे पहले छतरी थी वैसे ही वापस बना दें आराम से ट्रैफिक निकल जाएगा। पहले जितना पार्क था उसी स्वरूप में उसे रहने दें। 

जो राशि लगी वो ​जिम्मेदारों से वसूले

सूरजपोल चौराहा को लेकर लंबे समय तक संघर्ष करने वाले भाजपा नेता प्रदीप श्रीमाली कहते है कि इस चौराहा की बनावट को बदल दिया है। जब इसके बारे में जानना चाहा तो बताया नहीं गया की करना क्या चाह रहे है? जब आरटीआई लगाई तो उसमें भी गोलमाल जवाब दिए। तकनीकी टीम को लेकर काम किया जाए। किसी ने नहीं सुनी। सरकारी धन को व्यर्थ बहाया गया। चार साल में इसका इतना बड़ा स्वरूप बना दिया जबकि इतनी जगह यहां पर है नहीं। चौराहा संकरा हो गया और एक्सीडेंट जोन बन गया। 

प्रदीप श्रीमाली ने बताया कि इसके लिए पोस्टकार्ड अभियान भी चलाया। उन्होंने कहा की एक तकनीकी टीम बनाए जो यह बताए कि यह चौराहा तकनीकी रूप से सही है क्या। जनता की राय से इसे ठीक किया जाए। अभी तो अब तक जो रुपए लगाए गए उसकी वसूली भी जिम्मदारों से की जाए। उन्होंने कहा कि जनता की नजर में भाजपा बोर्ड की बदनामी की जा रही है।
 

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