उदयपुर 7 अक्टूबर 2025। जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में हुई आगजनी की घटना के बाद अब पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों का प्रशासन सतर्क हो गया है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सभी सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं की मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है। इनमें फायर फाइटिंग उपकरण, बेड की उपलब्धता और स्टाफ की मौजूदगी जैसे बिंदुओं पर विशेष निरीक्षण किया जा रहा है।
इसी क्रम में उदयपुर के एमबी सरकारी अस्पताल, जो संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल है, में भी मंगलवार को संबंधित विभाग की टीम द्वारा निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में सभी व्यवस्थाएं सही पाई गईं।
इस अवसर पर PWD के बजरंग सिंह ने बताया कि अस्पताल में लगे फायर सिस्टम और पंपिंग स्टेशनों की नियमित मॉक ड्रिल की जाती है। हालांकि हाल ही में SMS अस्पताल में हुई घटना को देखते हुए अब बड़े पैमाने पर जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी अस्पतालों का सिस्टम सेंट्रलाइज्ड और ऑटोमैटिक है। यदि कहीं प्रेशर कम होता है तो छोटे पंप अपने आप चालू हो जाते हैं, वहीं गंभीर स्थिति में मेन इलेक्ट्रिक पंप सक्रिय हो जाता है। बिजली बाधित होने पर विभाग के पास डीजल पंप की भी व्यवस्था है, जो स्वतः चालू हो जाता है।
उन्होंने आगे बताया कि विभाग के पास तीन मेजर पंप हैं जो पूरे सिस्टम की मॉनिटरिंग करते हैं। इसके साथ ही नियमित रूप से सिस्टम का मेंटेनेंस और मरम्मत का कार्य किया जाता है। कई बार प्रशिक्षण के अभाव में स्टाफ उपलब्ध उपकरणों का सही उपयोग नहीं कर पाता, इसलिए समय-समय पर अतिरिक्त कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
उदयपुर के एमबी अस्पताल में वर्तमान में सवा लाख लीटर क्षमता का वॉटर टैंक है, जो पर्याप्त है। नए निर्माण पूरे होने पर इसकी क्षमता और बढ़ाई जाएगी। अस्पताल में रखे गए छोटे फायर एक्सटिंग्विशर अलग-अलग प्रकार की आग के हिसाब से लगाए गए हैं। इनके एजेंट की समय-सीमा समाप्त होने पर उन्हें सुरक्षित स्थान पर खाली कर पुनः भर दिया जाता है। इसके अलावा पर्याप्त संख्या में फायर फाइटर्स और कनिष्ठ अभियंता भी तैनात किए गए हैं, जो पूरे समर्पण के साथ कार्यरत रहते हैं।