राजस्थान में मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने के लिए नए नियम लागू

नई नीति के तहत अब कोई भी अभ्यर्थी जीवन में एक बार ही मूल निवास प्रमाण पत्र बनवा सकेगा
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Domicile certificate

उदयपुर 12 मई 2026। राज्य सरकार ने प्रदेश में मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। राज्य के गृह विभाग की तरफ से जारी आदेशों के अनुसार अब राजस्थान का मूल निवासी वहीँ माना जाएगा जिसके माता पिता यहाँ के मूल निवासी हो या वह स्वयं अथवा उसके माता पिता पिछले 10 सालो से अधिक समय से राजस्थान में रह रहे हो।  

विभाग ने 1968 से लेकर 2012 तक के पुराने सभी आदेशों को दरकिनार कर नई व्यवस्था लागू की है।  सरकार ने मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने के लिए कलेक्टर, उपखण्ड अधिकारी, सहायक ज़िलाधीश और तहसीलदार को अधिकृत किया है। आवेदक को अपनी पात्रता सिद्ध करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र, 10 साल के बिजली-पानी के बिल, चुनाव पहचान पत्र या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज़ देने होंगे।   

नई नीति के तहत अब कोई भी अभ्यर्थी जीवन में एक बार ही मूल निवास प्रमाण पत्र बनवा सकेगा।ऐसे में प्रमाण पत्र के खो जाने, नष्ट हो जाने या क्षतिग्रस्त हो जाने पर 'डुप्लीकेट' कॉपी मिल सकेगी।  नाम या पता बदलने की स्थिति में संशोधित प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा।  उम्र बढ़ने के साथ पहचान सुनिश्चित करने के लिए 10 साल नई फोटो के साथ इसे नवीनीकृत करवाने की सुविधा भी दी जाएगी। 

आपको बता दे की आवेदक को एक शपथ पत्र देना होगा। यदि जांच में तथ्य गलत पाए जाते है तो तीन वर्ष तक का कारावास और अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। साथ हो दो उत्तरदायी व्यक्तियों जैसे सांसद, विधायक, राजपत्रित अधिकारी या सरपंच से तस्दीक करवाना भी आवश्यक है।   

Source: Media Reports

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