Udaipur Times, Udaipur News: भूदान यज्ञ बोर्ड की भूमि का नियमों के विपरीत निजी व्यक्ति के पक्ष में नामांतरण करने तथा लंबित न्यायिक विवाद की अनदेखी करने के मामले में जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल ने कड़ी कार्रवाई करते हुए पटवारी देवेंद्र प्रजापत को राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। वहीं तत्कालीन कार्यवाहक नायब तहसीलदार दयाराम सुथार की एक तिहाई पेंशन रोकने के लिए आदेश दिए हैं।
यह था मामला
प्रकरण ग्राम सनवाड़, तहसील मावली की भूदान भूमि से जुड़ा है। शिकायतकर्ता श्रीमती शारदा सगर ने आरोप लगाया था कि पूर्व खसरा संख्या 2323/02, रकबा 3 बीघा भूमि वर्ष 1992 में उनके पति स्व. नारायणलाल के नाम नामांतरित हुई थी। बाद में भूदान यज्ञ बोर्ड द्वारा वर्ष 2009 में नामांतरण निरस्त कर भूमि को भूदान बोर्ड के नाम दर्ज किया गया।
इस कार्रवाई के विरुद्ध राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर में रिट याचिका संख्या 1096/2011 भी विचाराधीन रही। प्रकरण विचाराधीन रहते ही अगस्त 2020 में प्रार्थिया के पति नारायणलाल का स्वर्गवास हो गया। इससे उक्त रिट में स्व. नारायणलाल के विधिक वारिसान पक्षकार बने। इसके बाद भूदान यज्ञ बोर्ड ने 29 सितंबर 2023 को उक्त भूमि पूरणमल पुत्र बाबूलाल पहाडिया के पक्ष में आवंटित कर दी।
प्रार्थिया ने राजस्थान संपर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए उक्त भूमि का नामांतरण नहीं खोलने का निवेदन किया इसके बावजूद पटवारी देवेंद्र प्रजापत ने 1 दिसंबर 2023 को ई-धरती सॉफ्टवेयर पर नामांतरण संख्या 6545 ऑनलाइन दर्ज किया। तत्कालीन भूअभिलेख निरीक्षक तथा कार्यवाहक नायब तहसीलदार दयाराम सुथार ने 4 दिसंबर 2023 को नामांतरण स्वीकार कर लिया।
खास बात यह रही कि उस समय भूमि से संबंधित रिट याचिका उच्च न्यायालय में विचाराधीन थी। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि पटवारी एवं तत्कालीन नायब तहसीलदार ने नामांतरण दर्ज करने से पहले प्रकरण की समुचित जांच नहीं की और संबंधित नियमों एवं उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी की। साथ ही, गैर-आवंटी को खातेदारी अधिकार देने, लंबित न्यायिक विवाद की उपेक्षा करने तथा भूदान यज्ञ बोर्ड की सार्वजनिक भूमि को नियमों के विरुद्ध निजी व्यक्ति के पक्ष में हस्तांतरित करने की साजिश में भूमिका निभाने के आरोप भी जांच में प्रमाणित हुए।
शिकायत के बाद पटवारी देवेंद्र प्रजापत को 5 जनवरी 2024 को निलंबित कर मुख्यालय तहसील कानोड़ किया गया था। बाद में 3 जुलाई 2024 को बहाल कर रिसोर्स पर्सन तहसील भींडर लगाया गया। मामले की विस्तृत जांच अतिरिक्त जिला कलेक्टर (नगर) के माध्यम से कराई गई। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में आरोपों को गंभीर प्रकृति का मानते हुए कठोर दंड की अनुशंसा की।
पटवारी को राजकीय सेवा से हटाया, नायब तहसीलदार की पेंशन काटी
जिला कलक्टर ने सभी तथ्यों, जांच रिपोर्ट और विभागीय कार्यवाही के आधार पर राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 14(7) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए 19 अगस्त 2026 को देवेंद्र प्रजापत को राजकीय सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया।
आदेश में जिला कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी पर लगाए गए आरोपों में उसकी भूमिका पूरी तरह प्रमाणित हो चुकी है और मामले में उसके द्वारा पद का दुरुपयोग तथा कर्तव्यों के प्रति गंभीर लापरवाही सामने आई है।
उल्लेखनीय है कि पटवारी देवेंद्र प्रजापत मूलतः चित्तौड़गढ़ जिलांतर्गत आकोला भोपालसागर का निवासी है तथा उसकी राज्य सेवा में प्रथम नियुक्ति 8 जनवरी 2014 को हुई थी। इसी प्रकार जिला कलक्टर ने राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 14(4) के तहत तत्कालीन नायब तहसीलदार दयाराम सुधार को देय पेंशन राशि में से एक तिहाई भाग स्थायी रूप से रोकने के आदेश दिए।
