SIR 2025: जानें पूरी प्रक्रिया

किसी भी प्रकार की जानकारी अथवा सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1950 पर संपर्क किया जा सकता है एवं अपने BLO से संपर्क करने के लिए https://voters.eci.gov.in वेबसाइट से  Book A Call with BLO सुविधा का उपयोग कर सकते हैं।
 | 

चुनाव आयोग ने राजस्थान समेत देश के नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।  इस अभियान का मकसद वोटर लिस्ट को और ज्यादा सटीक, साफ और अपडेट करना ताकि आने वाले चुनावों में किसी भी तरह की गड़बड़ी या डुप्लिकेशन न रहे। 

SIR तहत एन्यूमरेशन (Enumeration) यानी घर-घर जाकर सत्यापन का काम 4 नवंबर से शुरू हो गया है और यह 4 दिसंबर तक चलेगा। इसके बाद 9 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट यानी प्रारंभिक मतदाता सूची जारी की जाएगी। जो भी नागरिक अपने नाम, पते या किसी जानकारी में सुधार कराना चाहते हैं, वे 9 दिसंबर से 8 जनवरी 2026 तक क्लेम और ऑब्जेक्शन दाखिल कर सकेंगे। 

इन सभी दावों और आपत्तियों की जांच और सुनवाई 31 जनवरी 2026 तक पूरी की जाएगी। इसके बाद 7 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची (Final Electoral Roll) प्रकाशित कर दी जाएगी।

लेकिन इन सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर इसका पूरा प्रॉसेस क्या है, कौन से जरूरी कागजात लगेंगे, फॉर्म को कैसे भरना है…चलिए यहां समझते हैं... 

SIR एक गहराई से किया जाने वाला, नागरिक केंद्रित अभियान है, जिसमें बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मतदाताओं की जानकारी की जांच और पुष्टि करने के लिए हर घर का तीन बार दौरा करेंगे, ताकि वोटर लिस्ट में दर्ज हर नाम और विवरण बिल्कुल सही हो।

इस दौरान बीएलओ लोगों को Enumeration Form देगा। इस पर सबसे ऊपर बीएलओ का नाम और उसका टेलीफोन नंबर लिखा होगा। बीएलओ प्रत्येक मतदाता के घर दो प्रति में गणना प्रपत्र लेकर आ रहे हैं। इस गणना प्रपत्र में कुछ हिस्सा पूर्व मुद्रित है जिसमें मतदाता की सामान्य जानकारी है जैसे नाम, ईपिक नंबर, पता, मतदाता सूची की क्रम संख्या, भाग संख्या एवं विधानसभा क्षेत्र, इसके अतिरिक्त इस गणना प्रपत्र में मतदाता की सामान्य जानकारी जैसे पिता अथवा अभिभावक का नाम, माता का नाम, मोबाइल नंबर जीवनसाथी की सूचना भरनी है। इसके बाद आपको फॉर्म में अपनी डेट ऑफ बर्थ, आधार नंबर, मोबाइल नंबर, पिता/ गार्जियन का Epic No जैसी सारी डिटेल्स भरनी है। मतदाताओं को ये प्रपत्र अपने नवीनतम फ़ोटो के साथ जल्द से जल्द भरकर बीएलओ को देने होंगे। 

इसके बाद फॉर्म में नीचे की तरफ दिए गए दो जरूरी कॉलम को बहुत ध्यान से भरना है। 2002 की वोटर लिस्ट में अगर आपका नाम है, तो आपको उसमें इलेक्टोरल नेम, Epic No जैसी सारी डिटेल्स भरनी होगी। अगर पुरानी वोटर लिस्ट में आपके माता-पिता या रिश्तेदार का नाम है तो उनकी जानकारी भी भरनी पड़ेगी। इसके बाद नीचे की तरफ साइन करना है। 

अभी कोई दस्तावेज़ नहीं देने है 

उप जिला निर्वाचन अधिकारी राठौड़ ने बताया कि  जिले के वे सभी मतदाता जिनका मिलान देश के किसी भी राज्य के विगत विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची के साथ हो जाता है तो उन्हें इस संपूर्ण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं रहेगी। यदि किसी का नाम विगत SIR की मतदाता सूची में नहीं है और मतदाता के माता-पिता/दादा-दादी आदि का नाम शामिल है तो सटीक और सत्यापित पारिवारिक संबंध के माध्यम से मैपिंग की जा रही है। 

सबसे पहले Enumeration फेज में वोटर लिस्ट में मौजूद लोगों का 2002-2004 की लिस्ट से मिलान होगा। उनका या उनके वंशजों के नाम का मिलान न होने पर उनको नोटिस जारी होगा। उनको कागज दिखाने होंगे। उनको यह बताना होगा कि 2003 में वे कहां थे। वहीँ अगर आपने नाम सही तरीके से नहीं भरा तो इसके बाद जो अंतरिम वोटर लिस्ट के नाम जारी किए जाएंगे, हो सकता है उसमें आपका नाम नहीं हो। इसके बाद अगर आपके इलाके का बीएलओ कॉल करता है, नोटिस भेजता है तो आपको नीचे लिखे गए ये दस्तावेज तैयार रखने हैं और इनमें से कोई एक दस्तावेज उसे दिखाने हैं या देने हैं।  

कौन-कौन से दस्तावेजों की होगी जरूरत

  • केंद्र या राज्य सरकार के किसी विभाग, या सार्वजनिक क्षेत्र के किसी उपक्रम (PSU) के नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगी को जारी किया गया पहचान पत्र या पेंशन ऑर्डर।
  • 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में सरकार, स्थानीय निकाय, बैंक, डाकघर, एलआईसी या किसी PSU द्वारा जारी कोई पहचान पत्र, प्रमाणपत्र या दस्तावेज
  • किसी अधिकृत अधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र
  • पासपोर्ट
  • मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी मैट्रिक या किसी भी स्तर की शैक्षणिक डिग्री का प्रमाणपत्र
  • राज्य के सक्षम प्राधिकरण द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाणपत्र
  • वन अधिकार से संबंधित प्रमाणपत्र
  • सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया OBC, SC, ST या अन्य जाति प्रमाणपत्र
  • नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) में दर्ज विवरण
  • राज्य या स्थानीय अधिकारियों द्वारा तैयार किया गया परिवार रजिस्टर
  • सरकार द्वारा जारी कोई भूमि या मकान आवंटन से जुड़ा प्रमाणपत्र

फॉर्म न मिले तो क्या करें

अगर बीएलओ आपके पास तक पहुंचता ही नहीं है और आपको Enumeration Form ही न मिले तो क्या करें? इसके लिए इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट पर जाकर आप देख सकते हैं और बीएलओ से अपॉइंटमेंट ले सकते हैं। किसी भी प्रकार की जानकारी अथवा सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1950 पर संपर्क किया जा सकता है एवं अपने बीएलओ से संपर्क करने के लिए https://voters.eci.gov.in वेबसाइट से Book a call with BLO (बुक ए कॉल विद बीएलओ) सुविधा का उपयोग कर सकते हैं।

यदि 2002 में महिला का नाम उसके पिता के साथ शामिल हो और 2002 के बाद वह पति के साथ रह रही है तो उन्हें SIR में कैसे शामिल करे ?

अमूमन महिला मतदाता के नाम मैपिंग करने में दिक्कत आ सकती है। जैसी यदि कोई महिला 2002 में अविवाहित थी तो उसका नाम पीहर की सूची में होगा उन्हें उनकी जानकारी BLO को देकर मैपिंग करनी होगी। पीहर की सूची में उसके माता, पिता, दादा, दादी के साथ है तो भी उसकी मैपिंग हो जाएगी। लेकिन यदि वह 2002 में मतदाता नहीं भी थी तो उसके माता पिता अथवा दादा दादी या नाना नानी के मतदाता सूची में नाम के साथ मैपिंग स्थापित करनी होगी। 

एक बार फिर बता दे कि यदि किसी का नाम छूट जाये तो आपको वह BLO से सम्पर्क कर ऑफलाइन या ऑनलाइन आवेदन कर सकते है और BLO द्वारा मांगे गए दस्तावेज़ संलग्न कर नाम शामिल करवा सकते है।  

अगर आप जानना चाहते हैं कि आपका नाम वोटर लिस्ट में है या नहीं, तो इसे घर बैठे ऑनलाइन जांचा जा सकता है। इसके लिए आप चुनाव आयोग की वेबसाइट जैसे https://www.eci.gov.in or https://voters.eci.gov.in...यहां अपना नाम या EPIC नंबर डालकर सर्च करें।  इसके बाद अपना जिला और विधानसभा क्षेत्र चुनें। अगर इंटरनेट की सुविधा न हो, तो आप अपने बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO से मिल सकते हैं या नजदीकी निर्वाचन कार्यालय जाकर ड्राफ्ट लिस्ट देख सकते हैं।  वहां से भी आप आसानी से पता कर सकते हैं कि आपका नाम सूची में है या नहीं। 

वोटर लिस्ट से नाम कट गया है तो क्या करें?

अगर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान आपका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग ने पहले ही साफ कर दिया है कि जिन योग्य मतदाताओं के नाम गलती से हटे हैं, वे दोबारा अपना नाम जोड़वा सकते हैं।

नाम जुड़वाने के दो तरीके हैं, ऑनलाइन और ऑफलाइन.

  • ऑनलाइन प्रक्रिया 

अगर आप घर बैठे आवेदन करना चाहते हैं, तो मोबाइल या कंप्यूटर पर NVSP पोर्टल या Voter Helpline App खोलें. वहां Form 6 उपलब्ध होगा। यह वही फॉर्म है, जिसे नए मतदाता बनने या नाम वापस जुड़वाने के लिए भरा जाता है. इसमें आपको अपनी मूल जानकारी भरनी होगी और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। फॉर्म सबमिट करने के बाद आपको एक आवेदन संख्या मिल जाएगी, जिससे आप यह देख सकते हैं कि आपका आवेदन कहां तक पहुंचा। 

  • ऑफलाइन प्रक्रिया 

अगर आप ऑनलाइन तरीका नहीं अपनाना चाहते, तो आप सीधे अपने क्षेत्र के BLO के पास जा सकते हैं। वह आपको Form 6 देगा। आप उसे भरकर जमा कर दें। BLO आपके दस्तावेजों और जानकारी को निर्वाचन अधिकारी तक भेज देगा। जांच पूरी होने के बाद आपका नाम दोबारा वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा और आपको इसकी जानकारी भी मिल जाएगी। 

आपको बता दे कि बिहार में जब यह प्रक्रिया चलाई गई थी, तब दस्तावेजों को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। पहचान के लिए आधार कार्ड को शामिल नहीं किए जाने पर सवाल उठे। मामला इतना बढ़ा कि यह सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा। कोर्ट ने आदेश दिया कि आधार कार्ड को भी पहचान प्रमाण के रूप में मान्यता दी जाए। इसके बाद चुनाव आयोग ने दस्तावेज़ों की सूची में आधार कार्ड को शामिल कर लिया है। अब इस नई प्रक्रिया में शुरुआत से ही आधार को स्वीकार किया जाएगा, जिससे आम नागरिकों को किसी तरह की असुविधा न हो। बिहार में यह प्रक्रिया लगभग ढाई महीने में पूरी हो गई थी। लेकिन इस बार इसे तीन महीनों से भी अधिक समय दिया गया है। चुनाव आयोग का मानना है कि अधिक समय देने से सत्यापन की प्रक्रिया बेहतर ढंग से की जा सकेगी और गलती की संभावना कम होगी। 

BLO को आप नहीं मिले तो क्या होगा, 2004 में माता-पिता भी वोटर नहीं तो कैसे बन सकेंगे मतदाता?

बिहार के अनुभव को देखते हुए चुनाव आयोग ने यह भी निर्णय लिया है कि BLO फॉर्मों के मिलान और लिंकिंग के लिए अधिकतम तीन बार घरों का दौरा करेंगे। बीएलओ सिर्फ संबंधित राज्य ही नहीं बल्कि देश भर के मतदाता सूची की जांच कर यह देखेंगे के संबंधित व्यक्ति का नाम कहीं और तो नहीं है। यदि किसी अन्य सूची में नाम पाया गया तब भी उन्हें मतदाता माना जाएगा। यदि कोई मतदाता अस्थायी रूप से बाहर गया है या ऑफिस समय में उपलब्ध नहीं है, तो वह ऑनलाइन माध्यम से स्वयं भी विवरण अपडेट कर सकता है। पहले चरण में मतदाताओं के विवरण 2002-03-04 की सूची से मिलान किए जाएंगे ताकि पुराने रिकॉर्ड में विसंगतियां पकड़ी जा सकें। 

यदि किसी का नाम विगत एसआईआर की मतदाता सूची में नहीं है और मतदाता के माता-पिता/दादा-दादी आदि का नाम शामिल है तो सटीक और सत्यापित पारिवारिक संबंध के माध्यम से मैपिंग की जा रही है।

अगर मतदाता या उनके माता या पिता का नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं थे तो ईआरओ 12 दस्तावेजों के आधार पर पात्रता निर्धारित करेगा। आयोग द्वारा तय 12 दस्तावेजों के अलावा यदि किसी के पास अतिरिक्त वैध दस्तावेज है तो आयोग उसे भी मान्य करेगा। ईआरओ के फैसले के बाद, यानी अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद भी किसी भी निर्वाचन क्षेत्र का कोई भी मतदाता या निवासी जिला मजिस्ट्रेट के पास अपील कर सकता है और 15 दिनों के भीतर राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी के पास अपनी दूसरी अपील भी दायर कर सकता है।  

Disclaimer: इस लेख में हमारे पास जितनी जानकारी उपलब्ध है वह पाठको को उपलब्ध करवाने की कोशिश की गई है। यदि आपको किसी भी प्रकार की समस्या है तो जानकारी अथवा सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1950 पर संपर्क किया जा सकता है एवं अपने बीएलओ से संपर्क करने के लिए https://voters.eci.gov.in वेबसाइट से बुक ए कॉल विद बीएलओ सुविधा का उपयोग कर सकते हैं।