जुग-जुग जीयो: दिल्ली के गंगाराम अस्पताल की ओर से जांच व्यवस्था
20 हजार रुपए का किट भी निशुल्क, जरूरतमंदों को राहत
उदयपुर 11 जुलाई 2022 । गत दो वर्ष से आरएनटी के बाल चिकित्सालय में दुर्लभ बीमारियों की जांच की जा रही है। 120 संदिग्ध बच्चों की जांच में 18 बच्चे सात प्रकार की दुर्लभ बीमारियों के मिले हैं। इनमें से एक गोचर डिजीज जो विश्व की दुर्लभ और जानलेवा बीमारी है। इसके पांच मरीज मिले हैं। इस बीमारी का उपचार भी काफी महंगा है। ऐसे में आम आदमी उपचार के बारे में सोच भी नहीं सकता। इस बीमारी के मरीज को 20 दिन में करीब 1.25 लाख रुपए का इंजेक्शन लगता है। इस बीमारी का उपचार उदयपुर में नि:शुल्क उपलब्ध नहीं है। ऐसे में परिजन दर-दर भटकते हैं।
आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. लाखन पोसवाल ने बताया कि आरएनटी मेडिकल कॉलेज के बाल चिकित्सालय में दो साल के दौरान 18 बच्चों में 7 दुर्लभ बीमारियां मिली है। रोज औसत 350 की ओपीडी वाले इस अस्पताल ने नवजात से लेकर 18 साल तक की उम्र वाले उन 120 बच्चों की गहन जांच की थी, जिनकी शारीरिक-मानसिक गतिविधियां या स्थितियां चिकित्सकीय नजरिए से संदिग्ध थीं। इन्हीं में से ये 18 बच्चे गंभीर बीमार मिले हैं।
दिल्ली के गंगाराम हॉस्पिटल की ओर से बच्चों की रेयर डिजीज की जांच की जा रही है। इसके लिए किट मुफ्त में दिए जा रहे हैं। जांच की बाजार की कीमत भी 20 हजार रुपए तक है। ओपीडी के दौरान जब भी किसी बच्चे की गतिविधियां असामान्य लगती हैं, उसकी जांच की जाती है ताकि समय रहते परेशानी पता कर इलाज तय किया जा सके।
बच्चे को दूध से एलर्जी हो या, उम्र के हिसाब से शरीर-दिमाग नहीं बढ़े तो तुरंत पहुंचें डॉक्टर के पास
बाल चिकित्सक डॉ. नितिन गुप्ता ने बताया कि रेयर डिजीज कई प्रकार की हो सकती हैं। इसमें दूध से एलर्जी के साथ ही उम्र बढ़ने पर भी शरीर और मस्तिष्क का विकास न होना। सांस तेज चलना, ताण आना, शरीर में शुगर की कमी होना, बुखार, खून की कमी होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं। ये लक्षण स्वस्थ बच्चे में अचानक भी दिख सकते हैं। रेयर डिजीज की लिमिट नहीं है। ये कितने प्रकार की होती हैं, इस पर रिसर्च जारी है। ऐसे में इन्हें डायग्नोस करना भी मुश्किल है। ये बीमारियां अनुवांशिक होती हैं। माता-पिता में किसी तरह की आंशिक बीमारी हो तो प्रबल आशंका होती है कि बच्चे में भी वह बीमारी हो। समय पर उपचार नहीं मिलने से परेशानी और बड़ी हो जाती है। डब्ल्यूएचओ ने अब तक महज 6 रोगों के लिए एंजाइम रिप्लेसमेंट थैरेपी वेरिफाई की है। इनमें गोचेस, एमपीएस-1 फेब्री डिजीज, निमानपिक डिजीज, एमपीएस-6 आदि हैं।
वसा से बढ़ जाते हैं ऑर्गन
डॉ. गुप्ता ने बताया कि ग्लूको सेरिब्रोसाइडेज एंजाइम की कमी से बच्चों में गोचर डिजीज की बीमारी होती है। इसकी वजह से घातक वसायुक्त तत्व शरीर में जमा हो जाते हैं। जो मुख्यतया लीवर, तिल्ली, हृदय तथा हड्डियों को प्रभावित करते है। इससे शरीर के आंतरिक ऑर्गन बढ़ जाते हैं, ग्रोथ कम हो जाती है। यह एंजाइम डेफिसिएंसी होती है। पेट बढ़ जाता है, लंबाई नहीं बढ़ती। सांस में तकलीफ के साथ ही अन्य तकलीफ होने लगती है। ऐसे में मरीज को वेला ग्रुप ग्लुकारस और इमी ग्लुकारस की दवाई दी जाती है। इसकी लागत करीब 1.25 लाख रुपए प्रति डोज होती है।