उदयपुर नगर निकाय चुनाव 2026: जिले मे 25 सितंबर तक निषेधाज्ञा लागू
Udaipur Times, Udaipur Municipal Election 2026: राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार नगर निकाय चुनाव-2026 शांतिपूर्ण, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए उदयपुर जिले में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है।
जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी करते हुए जिले के नगर निगम उदयपुर तथा नगर पालिका फतहनगर-सनवाड़, मावली, भींडर, कानोड़ और वल्लभनगर के राजस्व सीमा क्षेत्रों में विभिन्न प्रतिबंध लागू किए हैं।
आदेश के अनुसार निषेधाज्ञा 19 अगस्त 2026 से तत्काल प्रभावी होकर 25 सितंबर 2026 तक लागू रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निषेधाज्ञा की अवहेलना अथवा उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
हथियार लेकर चलने और प्रदर्शन पर रोक
आदेश के तहत किसी भी व्यक्ति को विस्फोटक पदार्थ, घातक रासायनिक पदार्थ, आग्नेय अस्त्र-शस्त्र, रिवॉल्वर, पिस्टल, बंदूक, एमएमजी, बीओएफ गन, तलवार, भाला, कृपाण, चाकू, बरछी, गुप्ती, कटार, धारिया, बाघनख आदि घातक हथियार लेकर चलने, उनका प्रदर्शन करने अथवा सार्वजनिक स्थानों पर उनका प्रयोग करने पर रोक रहेगी। ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा बलों, पुलिस, अर्द्धसैनिक बल, होमगार्ड तथा चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। सिख समुदाय के व्यक्तियों को धार्मिक परंपरा के अनुसार कृपाण रखने की छूट दी गई है। दिव्यांग, वृद्ध एवं बीमार व्यक्ति बिना लाठी के सहारे नहीं चल सकते हों तो लाठी के उपयोग की अनुमति रहेगी।
बिना अनुमति सभा-जुलूस पर प्रतिबंध
नगर निकाय चुनाव क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (शहर) अथवा संबंधित उपखंड मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के बिना राजनीतिक उद्देश्य से जुलूस, सभा या रैली आयोजित नहीं कर सकेगा। ध्वनि प्रसारण यंत्रों के उपयोग की अनुमति निर्धारित समयावधि में ही दी जा सकेगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऐसे किसी आयोजन में ऐसा कृत्य नहीं किया जाएगा जिससे यातायात व्यवस्था, जन व्यवस्था अथवा सार्वजनिक शांति भंग हो।
भड़काऊ भाषण और चुनाव सामग्री के प्रचार पर भी रोक
कोई भी व्यक्ति सांप्रदायिक सद्भावना को ठेस पहुंचाने वाला भड़काऊ भाषण नहीं देगा। चुनाव सामग्री, पेम्पलेट, पोस्टर आदि का ऐसा प्रकाशन, छपवाना या वितरण नहीं किया जाएगा जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो।
सार्वजनिक एवं राजकीय संपत्तियों पर समर्थन या विरोध में नारे लिखने, प्रतीक चिन्ह बनाने, पोस्टर या होर्डिंग लगाने तथा संपत्तियों का विरूपण करने पर भी रोक रहेगी।
सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की नजर
फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप, यूट्यूब आदि सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए किसी भी प्रकार का उन्माद, जातीय द्वेष या दुष्प्रचार करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्रशासन ने चुनाव के दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक अथवा माहौल बिगाड़ने वाली गतिविधियों पर सख्त निगरानी के संकेत दिए हैं।
धार्मिक स्थलों का चुनाव प्रचार में उपयोग नहीं
मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा अथवा अन्य धार्मिक स्थलों को चुनाव प्रचार मंच के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। साथ ही आदर्श आचार संहिता की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
