उदयपुर पासपोर्ट सेवा केंद्र अब लेकसिटी मॉल में
नगर निगम और TCS विवाद बना कारण
उदयपुर 25 अगस्त 2025। पासपोर्ट सेवा केंद्र अब सोमवार (25 अगस्त 2025) से आयड़ स्थित लेकसिटी मॉल से संचालित होगा। पहले यह केंद्र सुभाषनगर स्थित नगर निगम के सामुदायिक भवन में चल रहा था, जिसे निगम ने करोड़ों रुपए खर्च कर विदेश मंत्रालय को निःशुल्क उपलब्ध कराया था। लेकिन निजी सेवा प्रदाता कंपनी टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS) और नगर निगम के बीच लीज और किराए को लेकर विवाद बढ़ गया।
नतीजतन, निगम भवन खाली हो गया और केंद्र को अब मॉल में स्थानांतरित कर दिया गया। इस बदलाव से विभाग पर अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ेगा और आम लोगों को पार्किंग तथा यातायात से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, 2022 में पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम वर्जन 2.0 लागू होने के बाद संचालन TCS को सौंपा गया। कंपनी ने भवन की लीज डीड अपने नाम कराने की मांग रखी, जिस पर निगम ने निजी कंपनी को मालिकाना हक देने से इनकार कर दिया। इसके बाद किराए को लेकर विवाद हुआ। निगम ने DLC दर से 1.52 लाख रुपये मासिक किराए की मांग की, जबकि कंपनी ने केवल 60 हजार रुपये देने का प्रस्ताव रखा। बाद में निगम ने निःशुल्क किराया देने पर भी सहमति जताई, लेकिन कंपनी ने भवन खाली कर दिया और मॉल में नया कार्यालय ले लिया।
निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, पासपोर्ट सेवा केंद्र से अब तक 94 लाख रुपये की बकाया राशि बनती है। इसमें भवन निर्माण के समय के 39 लाख रुपये और 2022 से 54.72 लाख रुपये किराए के रूप में शामिल हैं।
सुभाषनगर स्थित पुराने भवन में पार्किंग, ट्रांसफॉर्मर और आधुनिक वेटिंग एरिया जैसी सुविधाएं उपलब्ध थीं, जबकि नए मॉल स्थित केंद्र में पार्किंग शुल्क देना होगा और जगह भी सीमित है। पुराने भवन का क्षेत्रफल 7500 वर्ग फीट था, जबकि नए केंद्र का क्षेत्रफल केवल 5600 वर्ग फीट है।
नए पासपोर्ट सेवा केंद्र में मेवाड़ के इतिहास को प्रदर्शित करने वाले बैनर लगाए गए हैं, जिनमें महाराणा प्रताप, कुंभलगढ़, विजय स्तंभ, जयसमंद और शहर के घाट को दर्शाया गया है। साथ ही आधुनिक डिजिटल सुविधाओं जैसे बायोमेट्रिक रूम, अपॉइंटमेंट रूम, सर्वर रूम, इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्कैनर, प्रिंटर और पर्याप्त शौचालयों की व्यवस्था की गई है।
पूर्व महापौर चंद्र सिंह कोठारी का कहना है कि दो सरकारी विभागों के अनुरोध पर निगम ने यह भवन विदेश मंत्रालय को निःशुल्क दिया था। लोगों ने शुरुआत में इसका विरोध किया और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, लेकिन बाद में समझाइश से सहमति बनी। अब केंद्र का मॉल में शिफ्ट होना गलत है, इससे जनता को कई परेशानियां होंगी और सरकार पर भी अतिरिक्त राजस्व बोझ पड़ेगा।
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