उदयपुर में पुलिस-प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव, दो नए थाने बनेंगे

ज़िले में आयड़ और मामेर नाम से दो नए थानों की स्थापना की जाएगी
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उदयपुर 12 फ़रवरी 2026। राजस्थान बजट में मिली सौगातों के बाद उदयपुर ज़िले में पुलिस-प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। ज़िले में आयड़ और मामेर नाम से दो नए थानों की स्थापना की जाएगी, जिससे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। आयड़ चौकी को थाना बनाया जाएगा, वहीं कई मौजूदा थानों की सीमाओं का पुनर्गठन कर नए क्षेत्र तय किए जाएंगे।

आयड़ थाने के गठन के लिए भूपालपुरा, प्रतापनगर, सुखेर और हिरणमगरी थानों के कुछ हिस्सों को कम किया जाएगा। वहीं कोटड़ा समेत अन्य थानों के कई क्षेत्रों को अलग कर उन्हें मामेर थाने में शामिल किया जाएगा। इस कदम से पुलिस की रिस्पॉन्स क्षमता बढ़ने और अपराध नियंत्रण में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

सीमांकन को लेकर ज़िला पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के बाद गृह विभाग से अंतिम मंजूरी मिलेगी। मंजूरी के बाद वार्ड और सड़कों के अनुसार नई सीमाएं तय की जाएंगी। नए थानों के शुरू होने में करीब चार से छह महीने का समय लग सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आयड़ चौकी के थाना बनने से सुखेर और भूपालपुरा जैसे बड़े थाना क्षेत्रों का भूगोल बदल जाएगा। प्रतापनगर और हिरणमगरी के कुछ हिस्से भी आयड़ थाना क्षेत्र में शामिल किए जा सकते हैं। आयड़ थाना बनने का सबसे अधिक असर सुखेर थाने पर पड़ेगा। न्यू भूपालपुरा, शोभागपुरा, न्यू आरटीओ, बोहरा गणेशजी, यूनिवर्सिटी रोड, दुर्गा नर्सरी रोड, सेवाश्रम, ठोकर, बीएन कॉलेज, सुभाषनगर और कुम्हारों के भट्टे जैसे क्षेत्रों को आयड़ में शामिल किए जाने की संभावना है।

अनुमान है कि सुखेर थाने से 20 से 25 प्रतिशत काम कम हो सकता है। भूपालपुरा से 10 से 15 प्रतिशत और प्रतापनगर व हिरणमगरी से 5 से 7 प्रतिशत कार्यक्षेत्र में कमी आ सकती है। सुखेर थाना शहर के सबसे बड़े और व्यस्त थानों में से एक माना जाता है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार आयड़ क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में आबादी तेजी से बढ़ी है। विश्वविद्यालय, बड़े अस्पताल और नई कॉलोनियों के विकसित होने से शिकायतों और आपराधिक गतिविधियों में भी वृद्धि हुई है। नया थाना बनने से आम लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।

वहीं कोटड़ा क्षेत्र के मामेर इलाके में नया थाना बनने से पुलिस व्यवस्था और मजबूत होगी। पानरवा और कोटड़ा के कुछ हिस्सों को जोड़कर यह थाना बनाया जाएगा। मामेर चौकी गुजरात सीमा के पास स्थित है और यह मार्ग तस्करी के लिए बदनाम रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस रूट का उपयोग शराब, डोडा-चूरा और गांजा तस्करी के लिए किया जाता रहा है।

यहां पूर्ण रूप से थाना स्थापित होने से पुलिस बल की संख्या बढ़ेगी और नियमित नाकाबंदी की जा सकेगी। इससे सीमा पार से होने वाली तस्करी और वाहन चोरी जैसी वारदातों पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद है।