Udaipur Times, Rajasthan News, Health News: राजस्थान में फैटी लिवर (Fatty Liver Disease) की स्क्रीनिंग के तहत प्रदेश के सभी स्कूलों में ‘W Zone’ बनाए जाएंगे। इनमें विद्यार्थियों के वजन, ऊंचाई और कमर की नाप की जाएगी। इस गतिविधि को RBSK एवं RKSK कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा। इससे बच्चों में मोटापे और मेटाबॉलिक जोखिम (Metabolic Risk Factors) की समय पर पहचान की जा सकेगी।
प्रदेश में NCD व्यवस्था के तहत फैटी लिवर की व्यवस्थित स्क्रीनिंग को शामिल किया गया है। मिशन लिवर स्माइल (Mission Liver Smile) के तहत बीमारी की समय पर पहचान, आवश्यक जांच और उपचार के लिए रेफरल व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
Fatty Liver Disease रजिस्ट्री और Bio Bank की संभावना
उन्होंने बताया कि ऑनलाइन डैशबोर्ड के माध्यम से Fatty Liver Disease रजिस्ट्री तैयार की जाएगी। इससे मरीजों की जानकारी और उपचार की स्थिति को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा। साथ ही प्रदेश में Bio Bank की संभावना पर भी विचार किया जाएगा।
मोटापा कम करने के लिए मिशन ओवी लॉस
श्रीमती राठौड़ ने बताया कि मोटापे को कम करने के लिए ईट राइट कैंपेन (Eat Right Campaign) के तहत ‘मिशन ओवी लॉस’ चलाया जाएगा। इसके माध्यम से स्वस्थ खान-पान और बेहतर जीवनशैली को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
63 जिला अस्पतालों में Liver Smile Clinic
प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि प्रदेश के सभी 63 जिला अस्पतालों में Liver Smile Clinic संचालित किए जा रहे हैं। इन क्लीनिकों में फैटी लिवर की जांच, आवश्यक सलाह और जरूरत के अनुसार आगे के उपचार के लिए रेफरल की व्यवस्था है। क्लीनिक प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को संचालित किए जा रहे हैं।
करीब 10 हजार स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण
उन्होंने बताया कि मिशन के तहत 150 नोडल अधिकारियों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा करीब 10 हजार मेडिकल ऑफिसर एवं कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आगे भी अधिकारियों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को फैटी लिवर की स्क्रीनिंग के लिए विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
2.61 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग
श्रीमती राठौड़ ने बताया कि वर्ष 2025-26 में 2.61 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें 31.02 लाख लोग संदिग्ध पाए गए। वहीं वर्ष 2026-27 में अब तक 1.32 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और इनमें 17.44 लाख लोग संदिग्ध पाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 में PHC एवं CHC स्तर पर अब तक 26,54,556 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें 2,38,910 लोग संदिग्ध पाए गए। जिला अस्पताल स्तर पर भी 13,021 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है।
संदिग्ध मरीज इलाज तक क्यों नहीं पहुंच रहे, होगा अध्ययन
प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि फैटी लिवर की स्क्रीनिंग में संदिग्ध पाए जाने वाले मरीजों में से जो मरीज आगे इलाज के लिए नहीं पहुंच रहे हैं, उनके कारणों का अध्ययन कराया जाएगा। अध्ययन के आधार पर मरीजों को जांच, सलाह और उपचार से जोड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
जांच से लेकर उपचार तक रेफरल की व्यवस्था
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रारंभिक जांच के बाद जरूरत के अनुसार मरीजों को जिला अस्पताल भेजा जाता है। जिला अस्पताल में FIB-4 स्कोर के माध्यम से बीमारी की गंभीरता का आकलन किया जाता है। जरूरत पड़ने पर मेडिकल कॉलेज में फ़ाइब्रोस्कैन , बायोप्सी और लिवर ट्रांसप्लांट के लिए रेफरल की व्यवस्था है।
श्रीमती राठौड़ ने कहा कि फैटी लिवर से बचाव के लिए संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है। मिशन का उद्देश्य बीमारी की समय पर पहचान के साथ लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना और जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।
बैठक में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, RGSH हरजीलाल अटल, खाद्य आयुक्त अविचल चतुर्वेदी, निदेशक,जन स्वास्थय डॉ.रवि शर्मा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर RGHS डॉ.निधि पटेल सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।