आवारा कुत्तो पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला दिल्ली NCR ही नहीं पूरे देश में लागू होना चाहिए

राजस्थान हाई कोर्ट ने भी आवारा पशुओ को लेकर दिखाई सख्ती 

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12 अगस्त 2025। सुप्रीम कोर्ट ने कल सोमवार को दिल्ली NCR के अभी आवारा कुत्तो को आठ सप्ताह के अंदर सड़क से हटाने और उन्हें विशेष शेल्टर होम में भेजने के निर्देश दिए है।  कोर्ट ने हिदायत दी कि यह कुत्ते सड़को पर वापस लौटने नहीं चाहिए। उधर, राजस्थान हाई कोर्ट ने भी कल सोमवार को शहरी सड़को से आवारा कुत्ते और पशु हटाने के आदेश दिए। 

सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले अत्यंत सराहनीय है लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला सिर्फ दिल्ली NCR तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि पूरे देश में लागू होना चाहिए।  आवारा कुत्तो की समस्या सिर्फ दिल्ली NCR नहीं बल्कि देश में हर कोने में यह समस्या सिरदर्द बन चुकी है।  बीते वर्ष 2024 में देश  भर में 37 लाख से ज़्यादा डॉग बाईट के केस सामने आये है। वहीँ 54 लोगो को रेबीज़ के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी है।  

हमारे शहर उदयपुर किसी भी गली मोहल्ले में आप कहीं भी चले जाइये खासकर रात्रि में वहां यह आवारा कुत्ते आपके स्वागत के लिए तैयार रहते है। अभी हाल ही में खारोल कॉलोनी में एक बच्चे पर आवारा कुत्तो का झुण्ड टूट पड़ा था और नतीजे में वह बच्चा 10 से 12 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहा , यह सिर्फ किसी एक मोहल्ले की कहानी नहीं है।  शहर के सभी मोहल्लो में आवारा कुत्तो का आतंक बरपा है। चाहे वह हाथीपोल हो या दिल्ली गेट हो या सूरजपोल हो या हिरणमगरी सब जगह आवारा कुत्तो की एक जमात मौजूद है।  

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पारदीवाला का यह कथन बिलकुल सत्य है की आवारा कुत्तो को नसबंदी कर उसी इलाके में वापस छोड़ना बिल्कुल बेतुका है।  कहीं भी एक भी कुत्ता घूमता नहीं दिखना नहीं चाहिए।  वहीँ दिल्ली सरकार के तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट कहा की नसबंदी से सिर्फ वृद्धि रूकती है रेबीज़ फैलने की क्षमता खत्म नहीं होती।  इसका कोई इलाज नहीं।  

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पारदीवाला एवं जस्टिस आर महादेवन की पीठ आवारा कुत्तो द्वारा बच्चो पर हमले की खबर पर स्वतः संघयण लेकर सुनवाई कर रही थी।  कोर्ट ने इस काम में बाधा डालने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।  कोर्ट ने कहा व्यक्ति या संगठन बाधा बना तो अवमानना की कार्यवाही की जा सकती है।  

सुप्रीम कोर्ट ने पशु एवं कुत्ते प्रेमियों को आड़े हाथो लेते हुए सवाल किया कि क्या वह रेबीज़ के शिकार बच्चो को वापस ला पाएंगे ? बच्चो को किसी कीमत पर रेबीज़ का शिकार नहीं होना चाहिए।  

वहीँ राजस्थान हाईकोर्ट ने भी कुत्तो सहित अन्य आवारा पशुओ को लेकर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने टिप्पणी की है कि आवारा पशुओ के कारण नागरिको को परेशानी और खतरा बढ़ रहा है।  इससे न सिर्फ जनजीवन प्रभावित हो रहा है बल्कि पर्यटन को भी नुक्सान पहुँच रहा है। राजस्थान हाई कोर्ट ने शहरों और राजमार्गो से आवारा पशुओ को हटाने के लिए नगर निगमों, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण व अन्य विभागों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिया।  मामले में अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी। 

आपको बता दे की राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस कुलदीप माथुर व जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका पर यह आदेश दिया।