लॉक डाउन में मिली थी राहत, अब फिर से वही हालात


लॉक डाउन में मिली थी राहत, अब फिर से वही हालात

लॉक डाउन पर्यावरण के लिए अच्छा साबित हुआ था

 
लॉक डाउन में मिली थी राहत, अब फिर से वही हालात
ऐसे में हम सप्ताह में एक दिन वाहन का उपयोग नही करें। झीलों में गंदा पानी जाने से रोके। वहीं ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाकर हम प्रदूषण को दूर कर सकते है। 

उदयपुर 8 अक्टूबर 2020 । कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए लॉक डाउन लगाया था। लॉक डाउन पर्यावरण के लिए अच्छा साबित हुआ था। पर्यावरण के लिहाज से देखे तो हमें इसके कई फायदे नजर आए थे। शांत  वातावरण के साथ पक्षियों की चहल- पहल ,पहाड़ों पर हरियाली भी नजर आती थी। वही गाड़ियों की शोर नही सुनने को मिलता था। ऐसे में  वातावरण बहुत ही अनुकूलित था। लेकिन तीन महीने पहले हालात अब वैसे ही हो गए है। वही स्थिति फिर से नजर आ रही है। उदयपुर में ध्वनि और वायु प्रदूषण फिर से बढ़ गया है। ऐसे में जो श्वसन सबंधित मरीज है उन्को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

जब 25 मार्च को लॉक डाउन लगाया गया था तो सिटी बस,ऑटो टेम्पो, कार जीप आदि वाहनो की चहल पहल सुनने को नजर नही आती थी। ऐसे में प्रदूषण की समस्या पुरी तरह से खत्म हो गई थी। झीलें भी प्रदूषण से मुक्त हो गई थी। इसी का फायदा पर्यावरण को मिला और उदयपुर की खूबसुरती में निखार आया। 

18 मई को जैसे ही लॉक डाउन खत्म हुआ हालात वैसे ही नजर आने लगे है। सड़को पर देर रात दो पहिया वाहन, चौपहिया वाहन दौड़ते नज़र आ रहे है। ऐसे में शहर में प्रदुषण फिर से बढ़ने लगा है। ऑटो, बस,  टेम्पो, कार, टैक्सी जैसे वाहन फिर से प्रदूषण फैला रहे है। प्रदूषण स्तर फिर से पुराने स्तर पर पहुंचने लगा है। 

ऐसे में हम सप्ताह में एक दिन वाहन का उपयोग नही करें। झीलों में गंदा पानी जाने से रोके। वहीं ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाकर हम प्रदूषण को दूर कर सकते है। 

Article By Alfiya Khan
Photo By Mansoor Ali 

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