सुरक्षा जरूरी, लेकिन क्या छोटे मध्यम कारखानों की बलि जायज़?
स्लीपर बस आग हादसों के बाद नया नियम, उदयपुर के बॉडी बिल्डर्स में असंतोष एवं आक्रोश
उदयपुर 11 जनवरी 2026। स्लीपर कोच बसों में एक के बाद एक आग लगने की भयावह घटनाओ के बाद केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने बस निर्माण को केवल ऑटोमोबाइल कंपनियों या मान्यता प्राप्त कंपनियों द्वारा निर्मित करने के फैसले से उदयपुर एवं संभाग के मोटर बॉडी बिल्डर्स में भारी असंतोष एवं आक्रोश है। हालाँकि फैसला सुरक्षा के मद्देनज़र ज़रूरी लेकिन क्या छोटे और मध्यम कारखानों की बलि जायज़ है ?
आपको बता दे की बीते 6 महीनो में देश के विभिन्न हिस्सों में स्लीपर कोच बसों में आग लगने की 6 घटनाओ में 145 यात्रियों की मौत के बाद परिवहन मंत्रालय का मानना है कि मौजूदा स्लीपर बसों को नए सुरक्षा मानकों के अनुसार अपडेट करना आवश्यक है जिसके तहत फायर डिटेक्शन सिस्टम, आपातकालीन निकास, इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राइवर ड्राउज़ीनेस इंडिकेटर जैसे उपकरण अनिवार्य किये जाएंगे ताकि हादसे की स्थिति में यात्रियों को समय रहते बाहर निकाला जा सके।
सुरक्षा के मद्देनज़र परिवहन मंत्रालय के इस फैसले से उदयपुर और संभाग के मोटर बॉडी निर्माताओं ने बस निर्माण को केवल ऑटोमोबाइल कंपनियों या मान्यता प्राप्त कंपनियों द्वारा ही निर्मित करने की शर्त से असहमति जताई है। बस बॉडी निर्माताओं का कहना है की वाहन निर्माण में होने वाली त्रुटियाँ केवल बॉडी बिल्डर्स से ही नहीं, बल्कि ऑटोमोबाइल कंपनियों से भी होती हैं, फिर भी निर्णयों का भार सिर्फ हम पर ही क्यों डाला जा रहा है।

उदयपुर टाइम्स की टीम ने उदयपुर के भुवाणा बाईपास स्थित विकास बॉडी बिल्डर्स के संचालक विजय राम शर्मा ने असंतोष प्रकट करते हुए बताया कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सरकार छोटे कारखानों को बंद करवा कर कार्य बड़े-बड़े उद्योगों एवं कंपनियों को सौंपने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार के इस फैसले से छोटे और मध्यम वर्गीय कारखानों को बंद करने की नौबत आ जाएगी।
विजय राम शर्मा ने बताया की उदयपुर, राजसमंद, और नाथद्वारा क्षेत्रो में 100 से अधिक बस बॉडी निर्माण कारखाने संचालित होते है। छोटे कारखानों में सालभर में 3 से 4 बसों को बॉडी का निर्माण होता है वहीँ बड़े कारखानों में 15 से 20 बसों को बॉडी का निर्माण होता है। एक कारखाने में इंजीनियर से लेकर मेकेनिक, हेल्पर और लेबर क्लास तक कम से कम 50 लोगो को रोज़गार जुड़ा हुआ है। इसके अतिरिक्त निर्माण से जुड़े उपकरणों के निर्माता और सप्लायर्स भी प्रभावित होंगे।
उदयपुर टाइम्स की टीम ने उदयपुर के भुवाणा स्थित सत्यनारायण मोटर्स के संचालक किरण कुमार सुथार ने बताया की इस तरह तो बस बॉडी निर्माण से जुडी 90 फीसदी इंडस्ट्री तबाह हो जाएगी। क्या सरकार इस बात की गारंटी देगी की ऑटोमोबाइल कंपनियों या मान्यता प्राप्त कंपनियों द्वारा ही निर्मित बस बॉडी में कोई आग नहीं लगेगी। उन्होंने बताया की ऑटोमोबाइल कंपनियां बस बॉडी निर्माण में फाइबर का इस्तेमाल करती है जिससे आग का खतरा और अधिक बढ़ जाता है जबकि वह लोहे की शीट्स का इस्तेमाल करते है। उन्होंने भी दोहराया कि वाहन निर्माण में होने वाली त्रुटियाँ केवल बॉडी बिल्डर्स से ही नहीं, बल्कि ऑटोमोबाइल कंपनियों से भी होती हैं।

किरण कुमार ने बताया कि वह सभी सुरक्षा मानकों की शर्तो को मानने के लिए तैयार है। उन्होंने मांग की है कि सरकार सुरक्षा मानकों को लागू करने के साथ साथ छोटे बड़े और मध्यम कारखानों को मान्यता देने की सरल व्यवस्था करे तो ताकि रोज़गार और उद्योग सुरक्षित रह सके।
उनका कहना है आखिर बस बॉडी निर्माण के बाद बस को सुरक्षा मानकों पर परख कर पास करने की ज़िम्मेदारी तो सरकार और RTO की ही है। यदि बस बॉडी निर्माण सुरक्षा मानको पर खरी नहीं उतरती है उन्हें रिजेक्ट किया सा सकता है या दुबारा निर्मित किया जा सकता है। लेकिन बस बॉडी निर्माण को ऑटोमोबाइल कंपनियों और मान्यता प्राप्त कंपनियों तक सिमित करना उनके कारोबार पर कुठाराघात है।
बस बॉडी निर्माताओं द्वारा खुलकर विरोध नहीं
परिवहन मंत्रालय का यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनज़र लिए गए फैसले से बस बॉडी निर्माण कंपनियों और संचालको में असंतोष और आक्रोश तो है लेकिन अभी तक किसी ने भी सरकार से इस फैसले को बदलने की न तो गुहार लगाईं है न ही एक ज्ञापन तक दिया है। इस सबंध में बस बॉडी निर्माता विजय राम शर्मा और किरण कुमार सुथार ने बताया कि बस बॉडी निर्माता न तो संगठित और न ही जागरूक है। उन्होंने सभी मोटर बॉडी बिल्डर्स को गंभीरतापूर्वक विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा यदि वह अभी चुप रहेंगे, तो आने वाले समय में उनके कारखानों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।
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