उदयपुर का ऐतिहासिक घंटाघर: समय, तकनीक और सद्भाव का प्रतीक

अद्भुत तकनीक: बिना बिजली के चलती घड़ी

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उदयपुर 4 अप्रैल 2026 । देसी विदेशी पर्यटकों में झीलों की नगरी के रूप में विख्यात खूबसूरत शहर उदयपुर के पुराने हिस्से में स्थित Clock Tower यानि घंटाघर सिर्फ एक समय बताने वाली मीनार नहीं है, बल्कि यह शहर की ऐतिहासिक विरासत, सामाजिक एकता और तकनीकी कौशल का जीता जागता नमूना  है।

स्थापना और इतिहास

इस भव्य घंटाघर का निर्माण वर्ष 1887 में महाराणा फ़तेह सिंह जी के शासनकाल में हुआ था। उस समय यह उदयपुर की पहली सार्वजनिक घड़ी थी, जिसे आम जनता की सुविधा के लिए लगाया गया।

पुराने शहर के केंद्र में स्थित यह मीनार धीरे-धीरे एक महत्वपूर्ण पहचान (लैंडमार्क) बन गई और आज भी स्थानीय लोगों के जीवन का हिस्सा बनी हुई है। आज इस क्षेत्र को घंटाघर के नाम से जाना जाता है।  

अद्भुत तकनीक: बिना बिजली के चलती घड़ी

घंटाघर की घड़ियां आज भी एक पारंपरिक पेंडुलम आधारित गुरुत्वाकर्षण प्रणाली (gravity mechanism) पर काम करती हैं। इसमें बिजली या बैटरी का उपयोग नहीं होता घड़ी को चलाने के लिए समय-समय पर हाथ से चाबी भरनी पड़ती है। यह प्रणाली भारी वजन के सहारे चलती है। टावर के चारों ओर लगी चार घड़ियां एक समान समय दिखाती हैं सबसे खास बात यह है कि ये घड़ियां लंदन से मंगवाई गई थीं, जो उस दौर में तकनीकी उन्नति का प्रतीक थीं।

एक रोचक सामाजिक कहानी

इस घंटाघर के निर्माण के पीछे एक दिलचस्प ऐतिहासिक घटना जुड़ी है। महाराणा फतह सिंह जी के समय उदयपुर के बोहरा समुदाय और महाजन समुदाय के बीच विवाद उत्पन्न हो गया। मामला महाराणा के पास पहुंचा, महाराणा ने दोनों पक्षों को सुना और बोहरा समुदाय की गलती मानते हुए जुर्माना किया। साथ ही महाजन समाज को भी नजराना अदा करने का आदेश दिया ।

इसी राशि से एक इमारत का निर्माण कराया गया और उसमें आम जनता के लिए घड़ी लगवाई गई,जो आगे चलकर घंटाघर के रूप में प्रसिद्ध हो गई।

प्रमुख विशेषताएं

  • लगभग 50 फीट ऊंची मीनार
  • चारों दिशाओं में लगी चार घड़ियां
  • उदयपुर की पहली पब्लिक क्लॉक
  • सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक
  • वर्तमान में नजूल संपत्ति के अंतर्गत

आज Udaipur Clock Tower सिर्फ एक ऐतिहासिक संरचना नहीं है, बल्कि यह शहर की पहचान, संस्कृति और एकता का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि कैसे एक सामाजिक विवाद से निकला समाधान आज एक ऐतिहासिक धरोहर बन चुका है, जो समय के साथ भी अडिग खड़ा है।

उदयपुर का घंटाघर इतिहास, तकनीक और सामाजिक सामंजस्य का अनोखा संगम है। यह न केवल अतीत की झलक दिखाता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि समाज में संतुलन और एकता कैसे स्थायी विरासत बन सकते हैं।

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