गीतांजलि हॉस्पिटल के विशेषज्ञों ने गर्भावस्था में हाइडेटिड सिस्ट के दो दुर्लभ ऑपरेशन किए सफल, माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित
उदयपुर। गीतांजलि हॉस्पिटल, उदयपुर के विशेषज्ञों ने गर्भावस्था के दौरान हाइडेटिड सिस्ट (Hydatid Cyst) के दो अत्यंत दुर्लभ एवं जटिल मामलों का सफल ऑपरेशन कर माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों को सुरक्षित रखा। यह उपलब्धि अस्पताल की अनुभवी मल्टीडिसिप्लिनरी टीम, आधुनिक सुविधाओं और विभिन्न विशेषज्ञ विभागों के समन्वित प्रयास का उत्कृष्ट उदाहरण है। दोनों मरीज वर्तमान में स्वस्थ हैं तथा उनकी गर्भावस्था भी सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रही है।
पहला मामला लगभग 12–13 सप्ताह की IVF (टेस्ट ट्यूब) प्रेग्नेंसी का था। मरीज के प्लीहा (Spleen) में लगभग 18 सेंटीमीटर का विशाल हाइडेटिड सिस्ट था, जिससे उसे लगातार तेज दर्द हो रहा था। गर्भ बढ़ने के साथ सिस्ट या प्लीहा के फटने का खतरा बढ़ रहा था, जिससे माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों के जीवन पर गंभीर संकट था। इसी कारण कई स्थानों पर इस मरीज का ऑपरेशन करने से मना कर दिया गया था।
ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में वरिष्ठ गैस्ट्रो, लिवर एवं HPB सर्जन डॉ. हेमंत जैन एवं उनकी टीम ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर प्रभावित प्लीहा को सिस्ट सहित निकाला तथा IVF प्रेग्नेंसी को पूरी तरह सुरक्षित रखा। चूँकि यह IVF से प्राप्त प्रेग्नेंसी थी, इसलिए इसे बचाना चिकित्सकीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था।
दूसरा मामला 16 सप्ताह की गर्भवती महिला का था, जो नियमित ANC जाँच के लिए गीतांजलि हॉस्पिटल आ रही थीं। जाँच में लिवर एवं पेट में कई बड़े हाइडेटिड सिस्ट पाए गए। इसके बाद डॉ. हेमंत जैन एवं उनकी टीम ने सफल सर्जरी कर लिवर से दो तथा पेट से एक बड़े हाइडेटिड सिस्ट को सुरक्षित निकाला। इस ऑपरेशन के बाद भी माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं।
दोनों ऑपरेशनों के दौरान स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. मधुबाला चौधरी एवं डॉ. दिव्या चौधरी ने गर्भस्थ शिशु की लगातार निगरानी एवं प्रसूति संबंधी देखरेख की। वहीं एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. अल्का, डॉ. सीमा एवं डॉ. अनुज ने उच्च जोखिम वाली एनेस्थीसिया सेवाएँ प्रदान कर सर्जरी को सुरक्षित बनाया।
डॉ. हेमंत जैन ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान हाइडेटिड सिस्ट जैसी जटिल बीमारी का ऑपरेशन करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि हर निर्णय में माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। ऐसे मामलों में गैस्ट्रो सर्जन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम के समन्वित प्रयास से ही उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इन दोनों सफल सर्जरी ने यह सिद्ध किया है कि गीतांजलि हॉस्पिटल में गर्भावस्था के दौरान भी जटिल एवं हाई-रिस्क सर्जरी सुरक्षित रूप से की जा सकती हैं। समय पर सही निदान, आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों के सामूहिक प्रयास से माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों का जीवन सुरक्षित रखा जा सकता है।
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