ग्रामीण राजस्थान से वैश्विक करियर तक कौशल प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हिंदुस्तान जिंक

‘जिंक कौशल’ ने अब तक 10 हजार से अधिक युवाओं को दिया रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर
 
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From Rural Rajasthan to Global Careers: Hindustan Zinc’s Zinc Kaushal Trains Over 10,000 Youth, Creates Pathways to Opportunity   - 45% women participation with 8,000+ youth landing jobs in prestigious organizations - Creating sustainable livelihoods through ₹26 Cr skilling initiative across Rajasthan and Uttarakhand

 

Udaipur Times: 15 जुलाई 2026।  उदयपुर के पास स्थित छोटे से गांव भामनिया खेत की रहने वाली दीपिका की सफलता की कहानी मेहनत, अवसर और बदलाव का उदाहरण है। सीमित संसाधनों और कम अवसरों के बीच दीपिका ने हिंदुस्तान जिंक के ‘जिंक कौशल’ कार्यक्रम के तहत फूड एंड बेवरेज सर्विसेज का प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और आज वे स्पेन की मरेला क्रूजेस में कार्यरत हैं। इस अवसर ने उन्हें न केवल रोजगार दिया बल्कि बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास भी दिया।

दीपिका की कहानी अकेली नहीं है। यह उन हजारों युवाओं की कहानी है जिनके जीवन में हिंदुस्तान जिंक के प्रमुख कौशल विकास और आजीविका कार्यक्रम ‘जिंक कौशल’ ने सकारात्मक बदलाव लाया है। वर्ष 2019 में शुरू हुए इस कार्यक्रम के माध्यम से अब तक राजस्थान और उत्तराखंड के 10 हजार से अधिक ग्रामीण और जनजातीय युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 26 करोड़ के निवेश से संचालित इस पहल में महिलाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है और अब तक प्रशिक्षित युवाओं में 45 प्रतिशत महिलाएं हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में कार्यक्रम के तहत 2,600 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 420 युवाओं को नाबार्ड, जेके सीमेंट, यस फाउंडेशन और बजाज फिनसर्व जैसे संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षित किया गया। इस वर्ष की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि विशेष रूप से दिव्यांग युवाओं के लिए संचालित बैच रही, जिसमें मूक-बधिर प्रशिक्षुओं को 100 प्रतिशत रोजगार मिला। इन युवाओं को ताज फतेह प्रकाश, रेडिसन ब्लू और द फर्न रेजीडेंसी जैसे प्रतिष्ठित होटल समूहों में नियुक्ति मिली।

83 प्रतिशत प्लेसमेंट दर और प्रशिक्षण के बाद औसतन 16 प्रतिशत वेतन वृद्धि के साथ ‘जिंक कौशल’ केवल रोजगार उपलब्ध नहीं करा रहा, बल्कि युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बना रहा है। कार्यक्रम के पूर्व प्रशिक्षु आज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, फॉक्सकॉन, होंडा, मरेला क्रूजेस और जीएमआर ग्रुप जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में कार्यरत हैं।

उदयपुर के वासिफ की कहानी भी प्रेरणादायक है। जन्म से मूक-बधिर वासिफ ने ‘जिंक कौशल’ के हॉस्पिटैलिटी प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़कर अपने करियर की शुरुआत रामाडा होटल से की। आज वे ताज अरावली में गेस्ट सर्विस एसोसिएट के रूप में कार्यरत हैं। इतना ही नहीं, वे अब अन्य श्रवण बाधित युवाओं का मार्गदर्शन भी करते हैं और उन्हें रोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

‘जिंक कौशल’ का दायरा केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। स्मार्ट पुलिसिंग पहल के तहत उदयपुर पुलिस विभाग के सहयोग से कार्यक्रम युवाओं को प्रशिक्षण देकर मुख्यधारा के रोजगार से जोड़ने का कार्य भी कर रहा है। यह समुदाय के प्रति जिम्मेदारी और प्रभावी साझेदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

अंबुजा फाउंडेशन और टाटा स्ट्राइव के सहयोग से संचालित यह कार्यक्रम राजस्थान के देबारी, दरीबा, जावर, चित्तौड़गढ़, आगूचा और कायड़ स्थित कौशल केंद्रों के माध्यम से चलाया जा रहा है। इससे पहले उत्तराखंड के पंतनगर में भी इसका संचालन किया गया। युवाओं के कौशल विकास और रोजगार सृजन में उत्कृष्ट योगदान के लिए इस कार्यक्रम को राजस्थान सरकार द्वारा चार जिला स्तरीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं।

‘जिंक कौशल’ हिंदुस्तान जिंक की उस व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसके तहत शिक्षा, रोजगार और समान अवसरों के माध्यम से समुदायों को सशक्त बनाया जा रहा है। विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर दीपिका और वासिफ जैसी सफलता की कहानियां यह साबित करती हैं कि जब युवाओं को सही अवसर और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे न केवल अपना भविष्य बदलते हैं बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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