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मार्बल एसोसिएशन की मार्बल पर GST 5% करने की मांग

मार्बल उद्योग को बचाने हेतु GST दर घटाने की अपील

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उदयपुर 26 अगस्त 2025। उदयपुर मार्बल एसोसिएशन कार्यालय पर आज कार्यकारिणी की बैठक रखी गई, जिसमें आगामी 3-4 सितम्बर को GST काउंसिल की होने वाली बैठक में GST पर समीक्षा की जानी हैं। इस सन्दर्भ में एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री, GST काउंसिल सदस्य सम्राट चौधरी, सुरेश कुमार खन्ना, गजेन्द्र सिंह खीवसर, चंद्रिमा भट्टाचार्य, के. बी. गोवडा, के. एन. बालागोपाल एवं राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर GST कम कर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया।

अध्यक्ष पंकज गंगावत ने बताया की मार्बल ग्रेनाइट पर रॉयल्टी के बाद GST कम करने की मांग की जा रही हैं। पूर्व में भी कई बार एसोसिएशन GST कम करने की मांग कर चूका हैं। अध्यक्ष गंगावत ने बताया की मार्बल पर  GST से पूर्व 5 प्रतिशत VAT ही लगता था। यदि  GST दर में कमी कर उसे 18% से 5% नहीं की जाती हैं तो इस उद्योग को बचाना मुश्किल हो जायेगा।

उदयपुर मार्बल एसोससएशन काफी वर्षो से GST कम करने हेतु प्रयासरत हैं। इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय वित्त मंत्री को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, की मार्बल एवं ग्रेनाइट की ज्वलंत समस्या का समाधान किया जाए। पिछले वर्ष (22 अगस्त 2024) वित्त मंत्री जब उदयपुर मार्बल एसोसिएशन कार्यालय पर आयी थी तब भी एसोससएशन ने निर्मला सीतारामन को ज्ञापन देकर GST व मार्बल उद्योग की वर्तमान हालत से अवगत कराया था। प्रधानमंत्री से आग्रह हैं कि निम्न तथ्यों को ध्यान में रखते हुए GST दर कम की जाए।

उन्हेंने बताया कि मार्बल एवं ग्रेनाइट विलासिता की वस्तु नहीं होकर एक सस्ता उत्पाद हैं जिसका उपयोग आम व्यक्ति के मकान, दुकानों और सार्वजनिक जगह जैसे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, हवाई अड्डे, हॉस्पिटल, मॉल, सरकारी आवास योजना आदि में हो रहा हैं। उद्योग पिछड़ने के कारण सरकार के राजस्व और रोजगार पर भी अत्यधिक प्रभाव पड़ रहा हैं। देश में लाखों व्यापारी सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग से जुड़े हुये हैं वो 18% GST की बड़ी मार झेल रहे हैं।

उन्होंने बतासा कि .कोटा स्टोन एवं सेंड स्टोन पर 5% GST ही लग रहा हैं जो की एक ही कमोडिटी में किसी भी तरह तर्क संगत नहीं हैं। मार्बल एवं ग्रेनाइट पर भी 5% GST दर लागू की जाए। स्वदेशी मार्बल और विदेशी आयातित मार्बल की कीमतों में भारी अंतर हैं जिससे विदेशी आयातित मार्बल को विलासिता की श्रेणी में रखकर 18% GST उचित हैं परन्तु स्वदेशी मार्बल एवं ग्रेनाइट पर 5% दर की जाएं।

उन्होंने बताया कि मार्बल एवं ग्रेनाइट की लागत अधिक होने के कारण उपभोक्ता ने सिरेमिक टाइल्स का विकल्प चुन लिया जिससे मार्बल उद्योग में रोजगार के अवसर में कमी आई हैं मार्बल उद्योग से लाखो लोगो को रोजगार मिलता हैं साथ ही सरकार को राजस्व भी प्राप्त होता हैं अतः इस पर GST दर कम कर इस उद्योग को संजीवनी दी जाए।

हाल ही में एसोसिएशन के पदाधिकारी जब जयपुर दौरे पर गए थे तब भी उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी को GST कम करने का पुनः निवेदन किया था आगामी GST काउंसिल में राजस्थान की तरफ से पक्ष रखते हुए मार्बल ग्रेनाइट पर GST कम करने का सार्थक प्रयास किया जाए मार्बल उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए GST में कमी करके ही किया जा सकता हैं। इस बैठक में पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह राव, उपाध्यक्ष राजेंद्र मौर, सह सचिव नरेन्द्र सिंह राठौड़, कोषाध्यक्ष कुलदीप जैन एवं कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित थे।

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