अजीतसिंह पर ब्याजखोरी का आरोप लगाते हुए परेशान लोगों ने लगायी गुहार

अजीतसिंह पर ब्याजखोरी का आरोप लगाते हुए परेशान लोगों ने लगायी गुहार

पीड़ितों ने प्रेसवार्ता कर पुलिस पर भी मिलीभगत के लगाए आरोप

 
ajeetsingh

उदयपुर 30 मई 2023 । शहर के हिरण मगरी सेक्टर.11 के रहने वाले अजीतसिंह पुत्र बलवंत सिंह निवासी सेक्टर 11 द्वारा पिछले कई वर्षो से जरूरतमंद लोगों का पता लगाकर उन्हें आवश्यक ध्यान उपलब्ध कराकर उनसे खाली स्टाफप पर हस्ताक्षर,चैक सहित अन्य दस्तावेज लेकर उन्हें बेलगाम ब्याज दर पर रकम उधार देने का कार्य करने का पीड़ित लोगों ने आरोप लगाया। पीड़ितों ने बताया की इसके चुंगल में फंसे लोगों द्वारा मूल रकम से कई गुना अधिक रकम देने के बावजूद भी उससे छुटकारा नहीं ले पा रहे है। 

मंगलवार कों प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फरियादियों ने पुलिस पर अजीतसिंह से मिलीभगत का भी आरोप लगाया और प्राथमिकी दर्ज होने के सवा माह बीत जाने के बावजूद पुलिस द्वारा उसे गिरफ्तार नहीं करने की बात कहीं हैं।

अजीतसिंह से परेशान लोगों में भूरीलाल शर्मा, विकास नलवाया, पूरण जोशी, गिरधारीलाल चौधरी, नवीन सरूपरिया ने संयुक्त रूप से आयोजित प्रेस वार्ता में  सभी प्रार्थियों द्वारा दर्ज करवायी गई प्राथमिकी में अजीतसिंह के पुलिस की जबरदस्त मिलीभगत की बात कहीं गयी है। इन सभी ने पुलिस अधीक्षक से गुहार लगायी है कि ऐसे ब्याजखोर माफिया को तुरन्त प्रभाव से गिरफ्तार कर आमजन को राहत पहुंचाए। सभी ने बताया की इस मामले कों लेकर उन्होंने आईजी उदयपुर रेंज अजयपाल लाम्बा से गुहार लगाई जिसपर उन्होंने मामले की जांच प्रतापगढ़ एसपी कों सोंपी हैं। तो वहीं सभी ने जयपुर में पुलिस डीजी पी से भी मुलाक़ात की और उन्हें इंसाफ दिलाने की मांग की हैं।

प्रेसवार्ता में पीड़ित नवीन सरूपरिया ने बताया कि अजीतसिंह ने उन्हें 50 लाख रूपयें वर्ष 2014 में उधार दिये थे और नवीन ने 2015 में 2 बार में ये रकम चुका दी थी। नवीन सरूपरिया ने रॉयल राजविलास निवासी विपुल कौशिक से पंवचटी में एक प्लॉट खरीदने का सौदा किया तो अजीतसिंह ने विपूल कौशिक का अनरजिस्टर्ड एग्रीमेन्ट बनाकर उस पर पर कोर्ट एवं पुलिस केस का दबाव बनाकर 3 करोड़ 80 लाख का एग्रीमेन्ट करवा दिया। उनका आरोप हैं की अजीतसिंह ने 2021 में पुलिस के साथ मिलकर उस पर दबाव बनाकर लिखापढ़ी कराकर एग्रीमेन्ट और चैक ले लिये। उन्होंने आरोप लगाया की अजीतसिंह ने कुछ समय पूर्व पुलिस के साथ मिलकर उसे धमकाया और जेल में डलवानें की धमकी भी दी।

वहीं पीड़ित गिरधारीलाल चौधरी ने बताया कि अजीतसिंह बाजार में ऐसे लोगों का पता लगाता है जिसे पैसों की काफी जरूरत हो। चौधरी ने बताया की उन्हें अपने कारोबार के लिये समय-समय पर पैसों की जरूरत होती थी। ऐसे में अजीतसिंह ने उन्हें सम्पर्क किया और उन्होंने 25 व 20 लाख रूपयें उधार लिये। जिसके एवज में अजीतसिंह ने प्रति एक लाख पर 600 रूपये प्रति 15 दिन ब्याज लेने की शर्त पर ये रकम उधार दी। इसके एवज में उसने उनके पत्नी और पुत्रों के खाली स्टाम्प व खाली चैक लेने की मांग की। इस पर उसने उनका दुरूपयोग न करने की बात का विश्वास दिलानें पर उन्होंने हस्ताक्षरयुक्त खाली चैक दे दिये।

चौधरी ने कहा की उसने 45 लाख रूपयें की रकम समय समय पर उसे व उसके पुत्रों को अदा कर दी जिसे सबूत भी उनके पास है लेकिन अजीतसिंह ने वह पूरी 45 लाख की रकम ब्याज में गिनते हुए पूरी मूल रकम बकाया निकाल रहा है और उनके द्वारा दिये गये खाली स्टाम्प व चैक का दुरूपयोग करने की धमकी दी जा रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद पीड़ित व्यापारी पूरण जोशी ने बताया कि उसने अजीतसिंह से ढाई लाख रूपयें उधार लिये और उसे 1 माह में चुका दिये। कुछ समय पश्चात पुनः 15 लाख रूपयें लिये जिसका वे उसे हर 10 दिन में 2 लाख रूपयें ब्याज देते रहे। कुछ समय पश्चात ब्याज जोड़ कर 15 लाख की मूल राशि का उसे भुगतान कर दिया लेकिन उसने 15 लाख पर 85 लाख ब्याज जोड़ कर रकम अदा करने की बात की। यह ब्याज 30 प्रतिशत प्रति माह थी। यह ब्याज की 85 लाख की रकम मात्र 9 माह की थी। जब यह रकम देने से मना किया तो उसने उन्हें धमकाया और कहा कि वो बड़े-बड़े पुलिसवालों को जनता हैं, उन्हें मासिक बंदी देता हैं और उनका पैसा भी मार्केट में चलाता हैं। साथ ही उन्होंने कहा की उसने इस पैसे कों पुलिसवालों का होना बताया। 

इस दौरान विकास नलवाया ने बताया कि उन्होंने अजीतसिंह से वर्ष 2014 में 20 लाख रूपयें उधार लिये थे उसके बदले में उन्होंने मात्र 2 वर्ष में 82 लाख रूपये चुका दिये। अजीतसिंह ने पुलिस का दुरूपयोग करते हुए वर्ष 2018 में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराते हुए नया एग्रीमेन्ट करवा दिया जिस कारण उनका मकान तक बिक गया। उन्होंने अजीतसिंह पर आरोप लगाया कि वह 1 से लेकर 60 प्रतिशत मासिक ब्याज वसलूता है।

पीड़ित व्यापारी भूरीलाल शर्मा ने बताया कि उसने अजीतसिंह से दो बार में 72 लाख रूपए उधार लिये थे जिसके एवज में उसने खाली स्टाम्प व हस्ताक्षरशुदा चैक व कागजात पर 2 करोड़़ रूपए की लिखा पढ़ी करवा दी, जबकि इस प्रकार की कोई राशि उन्होंने उससे ली ही नहीं। उन्होंने दावा किया की अजीतसिंह ने उन्हें और रूपयों का लालच देकर उनके पास विभिन्न स्थानों पर पड़ी जमीनों का पहले अन रजिस्टर्ड व बाद में रजिस्टर्ड एग्रीमेन्ट करवा कर उसे हथिया लिया।

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