लोक अदालत का आदेश: बीमा कंपनी देगी 6.07 लाख रुपये का क्लेम

बीमा विवाद में वाहन मालिक को राहत
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उदयपुर 10 फ़रवरी 2026 । स्थाई लोक अदालत, उदयपुर ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन के बीमा क्लेम से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए बीमा कंपनी को वाहन मालिक को 6,07,500 रुपये की क्लेम राशि, 6% वार्षिक ब्याज और 5100 रुपये वाद व्यय देने के निर्देश दिए हैं।

मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता चेतन चौधरी, भैरूलाल गायरी और मनीष चौबीसा ने पैरवी की। प्रार्थी ने 11 जून 2025 को प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में बताया कि उसने अपने मिनी ट्रक नंबर आरजे 27 जीसी 5120 का बीमा कराया था, जिसकी वैधता अवधि 18 अक्टूबर 2023 से 17 अक्टूबर 2024 तक थी। 4 जुलाई 2024 को वाहन भीलवाड़ा से पुल गंगापुर हाईवे पर कारोही खुर्द के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना के समय वाहन में खाली ऑक्सीजन सिलेंडर लदे हुए थे।

प्रार्थी ने 5 जुलाई 2024 को दुर्घटना की सूचना बीमा कंपनी को दी, जिसके बाद बीमा कंपनी द्वारा वाहन का सर्वे कराया गया। बीमा कंपनी ने 21 अक्टूबर 2024 को पत्र जारी कर यह कहते हुए क्लेम निरस्त कर दिया कि ऑक्सीजन सिलेंडर खतरनाक और जोखिम भरा उत्पाद है, जिसे वाहन में ले जाने के कारण क्लेम देय नहीं है। प्रार्थी ने तर्क दिया कि वाहन में ले जाए जा रहे खाली ऑक्सीजन सिलेंडर किसी भी स्थिति में खतरनाक या जोखिम भरे उत्पाद की श्रेणी में नहीं आते हैं, इसके बावजूद बीमा कंपनी ने वाहन की मरम्मत और क्लेम भुगतान से इनकार कर दिया।

प्रार्थी का वाहन दुर्घटना के बाद से बीमा कंपनी के सर्विस सेंटर में खड़ा रहा और इस दौरान वाहन टोटल लॉस की स्थिति में पहुंच गया। सर्वेयर की रिपोर्ट में क्लेम को उचित और युक्तिसंगत माना गया था तथा 4,26,500 रुपये सॉल्वेज लॉस बेसिक विदाउट आरसी देय बताया गया था। वहीं प्रार्थी ने बीमा के समय निर्धारित आईडीवी वैल्यू 6,07,500 रुपये के भुगतान की मांग की।

स्थाई लोक अदालत ने प्रार्थी की ओर से प्रस्तुत उच्चतम न्यायालय के निर्णय धर्मेन्द्र गोयल बनाम ओरियंटल इंश्योरेंस का अवलोकन करते हुए माना कि टोटल लॉस की स्थिति में वाहन की बीमा के समय अंकित कीमत के आधार पर क्लेम देय है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रार्थी को 6,07,500 रुपये की बीमा क्लेम राशि, 21 अक्टूबर 2024 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 5100 रुपये परिवाद व्यय दिया जाना उचित है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बीमा कंपनी द्वारा आदेश की तारीख से एक माह के भीतर क्लेम राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो प्रार्थी 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी होगा।