क्या सरकारी ब्लड बैंक से इशू हुआ था रिएक्टिव ब्लड यूनिट ?

क्या सरकारी ब्लड बैंक से इशू हुआ था रिएक्टिव ब्लड यूनिट ?

 
mb hospital

उदयपुर 4 अक्टूबर 2023 ।  संभाग के सबसे बड़े महाराणा भूपाल चिकित्सालय ब्लड बैंक में एक बड़ी लापरवाही होने की बात सामने आई है। जिसमे बाल चिकित्सालय में इलाज के लिए भर्ती एक बच्चे को रिएक्टिव ब्लड चढ़ाने की बात सामने आई। लेकिन क्या वाकई में ऐसी कोई घटना घटित हुई थी। घटना उस समय सामने आई जब ब्लड बैंक के रजिस्टर की एंट्री का एक फोटो सामने आया, जिसमे जो ब्लड यूनिट बच्चे को इशू की गई वह रिएक्टिव होने की बात कही गई थो 

दरअसल, मध्य प्रदेश के जावरा निवासी एक परिवार अपने 2 साल के बच्चे को एमबी हॉस्पिटल इलाज के लिए लाया था। बच्चे को डेंगू बीमारी से होने से उसके शरीर में प्लेटलेट्स की कमी आ गई थी। ऐसे में डॉक्टर ने ब्लड चढ़ाने की बात कही थी।

घटना को लेकर हुए असमंसजस की स्थिति के बाद जब विभाग के HOD डॉ. संजय प्रकाश से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा की गलती से रजिस्टर में संबंधित बच्चे के नाम के आगे 19653 ब्लड बैग नम्बर लिख दिया था, लेकिन बाद में जब हमें पता चला तो उस बैग को नियमानुसार नष्ट कर दिया। फिर बच्चे को 19658 नम्बर का ब्लड बैग इश्यू किया गया।

वहीं ​जिस वार्ड में बच्चा भर्ती था उस वार्ड के रिकॉर्ड से भी इसकी पुष्टि हो रही है कि बच्चे को 19653 नम्बर का ही रिएक्टिव ब्लड बैग इश्यू हुआ था। 

उन्होंने मामले की जाँच करवाई और उनकी विभाग स्तरीय जाँच में ये बात तो साफ़ हो गई की दरअसल जिस ब्लड यूनिट ( Serial  No.19653) की बात की जा रही है वो रिएक्टिव है  जिसके बाद उसे डिसकार्ट कर  दिया गया है, और जिसकी एंट्री डिसकार्ट रिकॉर्ड रजिस्टर में भी की गई है। तो इस ब्लड यूनिट को किसी को जारी ही नही किया है। 

मिडिया से बात करते हुए HOD ने पूरी बात को सिरे से नकारते हुए ऐसी कोई भी घटना या उनके विभाग के लोगों से ऐसी कोई भी गलती होने से पूरी तरह मना कर दिया। कथित ब्लड यूनिट के सामने रजिस्टर में (R) लिखे होने की बात पर उन्होंने कहा की जब भी किसी डोनटेड ब्लड यूनिट की रिपोर्ट रिएक्टिव आती है तो उसे डिसकार्ट कर दिया जाता है और विभाग की जाँच में भी ऐसी कोई डिसकार्टेड यूनिट किसी को इशू करने की कोई बात सामने नहीं आई है।  

उन्होंने कहा की जब भी ऐसी कोई ऐसी कोई यूनिट है तो उसकी दूसरे किसी मेथड से री-टेस्टिंग करवाई जाती है और उसकी रिपोर्ट नेगेटिव नहीं आने तक उसे होल्ड कर के अलग रखा जाता है। इसके बात एआरटी सेंटर या फिजीशियन को रेफर करके डोनर का इलाज कराया जाता है और फि से एक बार सैंपलिंग कर उसके ब्लड की जाँच की जाती है। ऐसे में कभी भी कोई रिएक्टिव ब्लड यूनिट किसी को इशू नहीं किया जाता है।  

ऐसे में फिलहाल तो विभाग के जिम्मेदारों ने इस मामले से पूरी तरह इंकार कर दिया है और विभाग के HOD डॉ. संजय द्वारा दिए तर्क और रिकॉर्ड रेजिस्टर की जाँच के आधार पर ये ही सिद्ध हुआ है की ऐसी कोई घटना या विभाग के दवारा ऐसी कोई लापरवाही नहीं हुई है।  

हॉस्पिटल ब्लड सेंटर के डॉक्टर भले ही बच्चे को सही ब्लड चढ़ाने का दावा कर रहे हैं लेकिन जब वार्ड का रिकॉर्ड चेक किया गया तो वहां भर्ती रहे बच्चे को रिएक्टिव ब्लड बैग(19653) चढ़ाने की बात सामने आ रही है। वार्ड की ब्लड रिपोर्ट के अनुसार 30 सितंबर 2023 की रात को बच्चे को 19653 और 19654 नम्बर के ब्लड बैग इश्यू होना दर्ज है। जिसमें डॉ हर्ष बुनकर के साइन और सील लगी हुई है।

ब्लड बैंक में ब्लड इश्यू करने से लेकर अन्य जानकारी दर्ज के लिए 3 से 4 रजिस्टर हैं जिसमें मामला उजागर होने के बाद छेड़छाड़ किए जाने का अंदेशा है। क्योंकि एक रजिस्टर में संबंधित बच्चे के नाम के सामने ब्लड बैग नम्बर 19653 दर्ज है तो वहीं दूसरे रजिस्टर में उसी बच्चे के नाम के आगे 19658 ब्लड बैग नम्बर लिखा है। जिसमें दर्ज नम्बर पर पेन से छेड़छाड़ को लेकर ब्लड बैंक प्रभारी से सवाल किया तो वे भी संतुष्ट जबाव नहीं दे सके।

एचआईवी-मलेरिया जैसी बीमारी के लक्षण वाला होता है रिएक्टिव ब्लड

जब कोई ब्लड डोनर ब्लड डोनेट करता है तो उसका ब्लड लिए जाने के बाद उस ब्लड बैग की जांच होती है। ब्लड में अगर मलेरिया, एचआईवी, सेफिलिश, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस-सी जैसी गंभीर बीमारियों के लक्षण पाए जाते हैं तो उस ब्लड को रिएक्टिव ब्लड कहा जाता है। जो एक तरह का अनुपयोगी ब्लड है।

गलती से अगर इस ब्लड को किसी स्वस्थ्य या सामान्य बीमारी वाले व्यक्ति को चढ़ाया जाता है तो उस व्यक्ति के शरीर में इन गंभीर बीमारी के लक्षण सामने आने लगते हैं। डॉक्टरों के अनुसार ऐसे ब्लड को वे 6 से 7 घंटे के बाद पूरी तरह नष्ट कर देते हैं।
 

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