BDS की छात्रा के घर वालों ने की आरोपियों की गिरफ़्तारी की मांग

शव उठाने से किया इंकार 

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Pacific Student died

उदयपुर, 26 जुलाई 2025 - शहर के निजी डेंटल कॉलेज की BDS की फ़ाइनल एयर की छात्रा श्वेता के कॉलेज में ही अपनी जीवन लीला को समापत करने और उसके द्वारा छोड़े गए नोट में कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन पर लगाए गए आरोपों का मामला अभी भी शांत नहीं हुआ है। 

शनिवार को श्वेता के परिजन जम्मू कश्मीर से उदयपुर पहुंचे , लेकिन उन्होंने श्वेता के शव को लेने से इंकार कर दिया। और जिन दो लोगों के नाम उसके द्वारा उसके अंतिम नोट में लिखे हैं उनके गिरफ्तार करने और उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग की। 

इस मोके पर बड़ी संख्या में श्वेता के बेच मेट और अन्य छात्र मोर्चरी के बहार पहुंचे और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए न्याय की मनाग की। सभी छात्र एमबी हॉस्पिटल से रवाना होकर कलेक्ट्री पहुंचे जहां उन्होंने हाथों में बैनर लेकर प्रदर्शन किया , तो वहीँ अखिल भारतीय विधार्थी परिषद् के सदस्यों ने भी उनका समर्थन किया।  

श्वेता के रिस्तेदार शशि कांत ने कहा की जो नॉट मौके  पर मिला हैं उसके श्वेता द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए खासकर दो लोगो भगवत और नैनी पर आरोप लगाए हैं की इन दोनों ने उसे मेन्टली हेरास कर के रखा हुआ था।  जिसकी वजह से वह बहुत परेशान हो गई थी और उसको इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा।  इसको लेकर एफ आई आर दर्ज करवादी गई है , जिसकी कॉपी इन्हे दी जाए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए , जब तक ऐसा नहीं होता तब तक शव नहीं उठाया जाएगा। 

साथ ही उन्होंने कहा की इस तरह की कार्यवाही हो की एक उदारहण बन सके।  कॉलेज प्रशासन से जब बात हुई तो उन्होंने कहा की दोनों लोगों को तुरंत उनकी नौकरी से निष्कासित कर दिया गया लेकिन उन्हों अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया।  

उन्होंने कहा की जब बच्चे स्कॉलरशिप से पड़ते है तो कॉलेज द्वारा फीस को लेकर बच्चों को तंग किया जाता हैं।  जब सर्कार की तरफ से स्कॉलरशिप  के पैसे देने की देरी होती है तो अक्सर बच्चों पर फ़ीस के पैसे जमा करवाने का दबाव बनाया जाता है। 

 शशि कांत ने कहा की इस मामले की फेयर इन्वेस्टीगेशन होनी चाहिए और अगर उसमे वो लोग दोशी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए और एक ऐसा उदहारण बनना  चाहिए की देश में फिर कभी किसी बच्चे को टॉर्चर करने से पहले कोई भी सोचे। प्राइवेट कॉलेज एक बिजनेज हब बन चूका है उनको बच्चो की पड़े से कोई लेना देना नहीं है बस उनको तो पैसे से मतलब है। 

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