Udaipur Times, Udaipur News: उदयपुर नगर निगम के पूर्व महापौर चन्द्रसिंह कोठारी की ओर से दी गई शिकायत की पुलिस जांच में टेंडर प्रक्रिया और लैब के संचालन को लेकर कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 125, 318(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल प्रशासन ने 22 सितंबर 2023 को सेंट्रल लैब में उपलब्ध नहीं होने वाली जांचों के लिए आउटसोर्स के माध्यम से ई-निविदा जारी की थी। इस निविदा के बाद शाम्भवी लैब को 16 दिसंबर 2023 को कार्यादेश जारी किया गया था।
रिपोर्ट में बताया गया है कि निविदा की शर्त संख्या 27 के अनुसार टेंडर में भाग लेने वाली फर्म की लैब का उदयपुर में होना आवश्यक था। पुलिस के अनुसार टेंडर के समय शाम्भवी लैब की ओर से उदयपुर में लैब होने से संबंधित स्पष्ट दस्तावेज सामने नहीं आए।
बाद में इस मामले को लेकर खबर सामने आने पर जिला प्रशासन और अस्पताल प्रशासन की ओर से अलग-अलग जांच कमेटियां गठित की गईं। कमेटियों की जांच में उदयपुर में शाम्भवी लैब का वास्तविक संचालन नहीं मिलने का उल्लेख किया गया है।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक जिस स्थान पर शाम्भवी लैब का संचालन बताया गया था, वहां केवल एक दुकान जैसी जगह पर सैंपल कलेक्शन सेंटर संचालित मिला। मौके पर शाम्भवी लैब का कोई बोर्ड या ऐसा अन्य प्रमाण नहीं मिला, जिससे वहां पूर्व में लैब संचालित होने की पुष्टि हो सके।
कमेटी को मौके पर जांच के लिए आवश्यक मशीनें भी नहीं मिलीं। रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया कि यदि उदयपुर में जांच के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं थे तो मरीजों के सैंपलों की जांच किस व्यवस्था के तहत कराई जा रही थी।
पुलिस रिपोर्ट में शाम्भवी लैब की ओर से टेंडर के दौरान प्रस्तुत किए गए एनएबीएल प्रमाणपत्रों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच के अनुसार प्रस्तुत किए गए चार प्रमाणपत्रों में से कोई भी शाम्भवी डायग्नोस्टिक लैब, उदयपुर के पते का नहीं था। रिपोर्ट में एक प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त होने का भी उल्लेख किया गया है।
पुलिस जांच में कहा गया है कि निविदा की शर्तों के अनुसार उदयपुर पते वाला प्रमाणपत्र आवश्यक था। इसके बावजूद फर्म को टेंडर दिए जाने को लेकर अस्पताल प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में है।
जांच कमेटियों की रिपोर्ट में बताया गया कि शाम्भवी लैब की ओर से सैंपलों को जांच के लिए लखनऊ स्थित लैब भेजने की बात कही गई थी। लेकिन उदयपुर स्थित कलेक्शन सेंटर पर सैंपल सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कोल्ड चेन व्यवस्था नहीं मिली।
पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि सैंपल उचित तापमान और निर्धारित परिस्थितियों में सुरक्षित नहीं रखे जाएं तो उनके जांच परिणाम प्रभावित होने की संभावना रहती है। रिपोर्ट में 24 घंटे के भीतर सैंपल भेजने और जांच के बाद रिपोर्ट वापस उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की व्यवहारिकता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
पुलिस जांच रिपोर्ट में एमबी अस्पताल के डॉ. संदीप कंसारा की ओर से शाम्भवी लैब द्वारा कथित तौर पर बिना जांच किए रिपोर्ट तैयार करने की शिकायत किए जाने का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार इस शिकायत को अस्पताल प्रशासन द्वारा गंभीरता से नहीं लिया गया।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि टेंडर प्रक्रिया से लेकर लैब की पात्रता, सैंपल कलेक्शन और जांच रिपोर्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की विस्तृत जांच आवश्यक है। रिपोर्ट में अस्पताल प्रशासन और शाम्भवी लैब के बीच कथित मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है।
पुलिस के अनुसार पूरा मामला मानव जीवन से जुड़ा होने के कारण गंभीर है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी बड़ी जांच एजेंसी से विस्तृत जांच कराए जाने पर ही इस पूरे मामले में वास्तविक जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
एसपी के आदेश के बाद FIR
हाथीपोल थाना पुलिस को 8 सितंबर 2026 को उदयपुर एसपी के आदेश की पालना में प्रकरण दर्ज करने के निर्देश प्राप्त हुए। पुलिस अब टेंडर प्रक्रिया, फर्म की पात्रता, सैंपल कलेक्शन, जांच प्रक्रिया और मरीजों को उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के तथ्यों के आधार पर की जाएगी।