MLSU के तीन शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र पुरस्कार से सम्मानित
Udaipur Times, Education News: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के वाणिज्य एवं प्रबंधन अध्ययन महाविद्यालय के लेखांकन एवं व्यावसायिक सांख्यिकी विभाग की संकाय सदस्यों एवं शोधार्थी ने 48वें अखिल भारतीय लेखांकन सम्मेलन एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उत्कृष्ट शोध कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तीन सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र के पुरस्कार प्राप्त कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया।
महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रोफेसर शूरवीर सिंह भाणावत ने बताया कि "लेखांकन शिक्षा एवं अनुसंधान" विषय पर यह सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर तक हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग द्वारा इंडियन अकाउंटिंग एसोसिएशन, साउथ हरियाणा ब्रांच के सहयोग से आयोजित किया गया। देशभर से लगभग 800 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया और करीब 500 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
इनमें सह-अधिष्ठाता डॉ. शिल्पा वर्डिया एवं उनकी शोधार्थी शालिनी चाष्टा को GST 2.0 की घोषणा पर शेयर बाजार की प्रतिक्रिया पर आधारित शोधपत्र के लिए तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। अध्ययन में पाया गया कि घोषणा से पूर्व शेयर कीमतों में वृद्धि हुई, जबकि घोषणा के समय बाजार की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही। प्रभाव विभिन्न उद्योगों में अलग-अलग रहा। धातु एवं खनन क्षेत्र में सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखी, जबकि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई।
इसी सम्मेलन में विभाग की संकाय सदस्य डॉ. आशा शर्मा एवं उनके सह-लेखक आदित्य मिश्रा के शोधपत्र "भविष्य की शिक्षा के लिए लेखांकन शिक्षकों को सशक्त बनाना: भारत में डिजिटलीकरण एवं सतत विकास हेतु एक रूपरेखा" को प्रथम स्थान एवं सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र पुरस्कार मिला। शोध में लेखांकन शिक्षा को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने के लिए डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सतत विकास को शामिल करने पर बल दिया गया है।
डॉ. शिल्पा वर्डिया का शोधपत्र "लेखांकन शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने की मंशा के निर्धारक: विस्तारित प्रौद्योगिकी स्वीकृति मॉडल पर आधारित एक अध्ययन" भी उल्लेखनीय रहा। इसमें महाविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जी. सोरल, दिल्ली विश्वविद्यालय की डॉ. अंतिमा शर्मा, डॉ. विनोद कुमार तथा ओमान विश्वविद्यालय की डॉ. कनीज़ फातिमा सह-लेखक हैं। अध्ययन में लेखांकन शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अपनाने की मंशा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों का विश्लेषण किया गया है।
इन उपलब्धियों से विश्वविद्यालय के शोध एवं शैक्षणिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। विभाग ने सम्मानित शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल शैक्षणिक भविष्य की कामना की।