राजस्थान राज्यपाल ने किया डूंगरपुर में एमपीयूटी के नये कृषि कॉलेज का उद्घाटन

राजस्थान राज्यपाल ने किया डूंगरपुर में एमपीयूटी के नये कृषि कॉलेज का उद्घाटन 

प्रथम वर्ष में 70 सीटों पर संयुक्त प्रवेश परीक्षा के माध्यम से नए विद्यार्थियों को प्रवेश

 
rajasthan Chief Minister

वर्क फ्रॉम होम के दौरान प्रति सेमेस्टर 11 से 12 हजार ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन, 200 से अधिक वेबीनार 26 एमओयू

बुधवार 22 सितंबर को आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम के द्वारा राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संगठक डूंगरपुर के नवीन कृषि महाविद्यालय का उद्घाटन किया। उद्घाटन कार्यक्रम दोपहर 12.00 बजे आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय की कुलसचिव श्वेता फगेड़िया ने बताया कि  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बजट घोषणा के अनुरूप एमपीयूएटी के महाविद्यालय के रूप में डूंगरपुर में नवीन कृषि महाविद्यालय की स्थापना की गई है। 

एमपीयूएटी के कुलपति डॉ. नरेंद्र सिंह राठौड़ ने डूंगरपूर में नवीन कृषि  महाविद्यालय खोलने की अनुमति प्रदान करने के लिए माननीय मुख्यमंत्री, राज्यपाल महोदय, स्थानीय विधायक एवं राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होनें उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों, अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षकों, कर्मचारियों, अभिभावकों एवं नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विगत वर्षों में एमपीयूएटी की प्रगति से अवगत करवाया। 

साथ ही उन्होनें कहा कि इसी अकादमिक सत्र से प्रथम वर्ष में 70 सीटों पर संयुक्त प्रवेश परीक्षा के माध्यम से नए विद्यार्थियों को प्रवेश भी दिया जा रहा है। एम.पी.यू.ए.टी. के इस तीसरे संघटक कृषि महाविद्यालय से जनजाति बाहुल्य दक्षिणी राजस्थान में कृषि के विकास में बड़ी सहायता मिलेगी। डॉ. राठौड़ ने बताया कि विगत कोरोनाकाल में एमपीयूएटी ने 400 से अधिक ई-मैनूअल एवं ई-कम्पेडियम तैयार किए हैं। विश्वविद्यालय के सभी पुस्ताकालयों को डिजिटल किया गया है।

वर्क फ्रॉम होम के दौरान प्रति सेमेस्टर 11 से 12 हजार ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन, 200 से अधिक वेबीनार 26 एमओयू, नवीन कॉर्स का संचालन, सोलर पॉवर से प्रतिदिन 4000 यूनिट बिजली उत्पादन, वॉटर हार्वेस्टिंग, उत्कृष्ट शोध प्रकाशन द्वारा 56 एच इन्डेक्स, 24 करोड़ प्रतिवर्ष की रेवेन्यू व अन्य आईटी आधारित नवाचारों के सतत् प्रयास द्वारा एमपीयूएटी की आईसीएआर रेंकिग 51 से 26 तथा सीटीएई की एनआईएफ रेंकिग प्रथम 250 इंजिनियरिंग कॉलेजों में हुई है जो कि हमारे लिए गर्व की बात है। 

कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्यपाल ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना एवं मूल कर्तव्यों का वाचन किया। उन्होनें डूंगरपूर में नवीन कृषि महाविद्यालय प्रारम्भ करने की सभी विद्यार्थियों एव वागड़ वासियों को बधाई दी। उन्होनें प्रदेश के प्रथम कृषि विश्वविद्यालय एमपीयूएटी में किए गए नवाचारों, स्मार्ट विलेज के प्रशंसनीय कार्यों, शिक्षा शोध एवं प्रसार के लिए कुलपति डॉ. राठौड़ को शुभकामनाएं भी दी। उन्होनें कृषि के आधुनिकतम ज्ञान के साथ-साथ पारम्परिक कृषि ज्ञान को विद्यार्थियों एवं युवाओं तक पहुचानें की आवश्यकता जताई। उन्होनें कृषि में युवाओं के रूझान को बढ़ाने तथा नवाचारों, जैविक खेती, खाद्य प्रसंस्करण, कौशल विकास द्वारा कृषि में किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आदिवासी अंचल में कृषि महाविद्यालय का शुभारंभ हो रहा है। जिससे क्षेत्र के छात्रों को कृषि विषय के अध्ययन से लाभ होगा। उन्होनें कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में कृषि के विकास हेतु निरन्तर प्रयत्नशील है। राज्य में 5 कृषि विश्वविद्यालय एवं विगत वर्ष में 13 नये कृषि महाविद्यालयों की स्थापना इस बात का प्रमाण है। उन्होनें कहा कि देश की आजादी के बाद प्रथम पंचवर्षीय योजना से ही कृषि के विकास, राष्ट्रीय कृषि शोध संस्थानों की स्थापना, बांध एवं नहरों की व्यवस्था, हरित क्रांति तथा अनेक अन्य कार्यों से कृषि एंव किसानों के विकास का ध्यान रखा गया है।

उन्होनें कहा कि अगले वर्ष से किसानों के लिए अलग से कृषि बजट भी लाया जाएगा। उन्होनें राज्य की कृषि प्रसंस्करण एवं कृषि निर्यात नीति कार्यक्रम से अधिकाधिक किसानों एवं कृषि विद्यार्थियों को लाभान्वित करने की बात कही। उन्होनें कहा कि राज्य सरकार ने कृषि विकास के लिए शीघ्र ही 600 विद्यालयों में कृषि संकाय प्रारम्भ करने का निर्णय भी लिया है। 

इस अवसर पर कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है तथा राज्य सरकार प्रदेश में कृषि विकास के लिए निरन्तर प्रयासरत है। उन्होनें कहा कि कृषि नवाचारों के लिए कृषि महाविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस दिशा में मुख्यमंत्री ने कृषि विकास के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस महाविद्यालय की स्थापना से डूंगरपूर एवं वागड़ प्रदेश के कृषि विकास एवं अनुसूचित जाति एवं जनजाति महिला सशक्तीकरण एवं कृषि शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।  

कार्यक्रम में कृषि राज्य मंत्री भजनलाल जाटव ने कहा दक्षिणी राजस्थान के साथ-साथ पिछड़े हुए जनजाति बाहुल्य इलाकों के लिए यह कृषि महाविद्यालय एक वरदान साबित होगा इसके माध्यम से जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों से आए विद्यार्थी कृषि के आधुनिकतम ज्ञान से नवीन रोजगार प्राप्त कर सकेंगे एवं क्षेत्र के कृषि विकास में योगदान दे सकेंगे।

डूंगरपुर के  विधायक गणेश घोघरा ने नवीन कृषि महाविद्यालय की स्थापना के लिए मुख्यमंत्रीजी का आभार व्यक्त किया इससे वागड़ में कृषि विकास संभव हो पाएगा। उन्होनें आई.सी.ए.आर. नॉर्मस् के अनुरूप स्थानीय जिला प्रशासन के सहयोग से 8 किलोमीटर के दायरे में 30 है। भूमी के अलॉटमेंट की अपेक्षा जताई। उल्लेखनीय है कि महाविद्यालय के लिए 22 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित किया गया है हालांकि 29 नवीन पदों की स्वीकृति सरकार ने प्रदान की है। 

कृषि महाविद्यालय की स्थापना समिति के संयोजक अधिकारी डॉ दिलीप सिंह, अधिष्ठाता, राजस्थान कृषि महाविद्यालय ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया एवं कार्यक्रम का संचालन कुलपति के विशेषाधिकारी डॉ. विरेन्द्र नेपालिया ने किया। इस अवसर पर ऑफलाइन कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के उच्चाधिकारी, केवीके प्रभारी, स्थानीय अधिकारीगण, मीडिया पर्सन, अभिभावक एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का यूट्यूब पर सजीव प्रसारण भी किया गया।

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