MLSU में पहली बार Outcome Based Education पर राष्ट्रीय कार्यशाला

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Udaipur Times, Education News 23 मई 2026। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (MLSU) के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “Designing and Implementing Outcome Based Education: A Pathway to Transforming Teaching and Learning” शनिवार को कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा के निर्देशन में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई।

IQAC निदेशक एवं वाणिज्य महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. शूरवीर सिंह भाणावत ने कहा कि विश्वविद्यालय में पहली बार परिणाम आधारित शिक्षण प्रणाली (Outcome Based Education-OBE) पर इस प्रकार की व्यापक एवं व्यावहारिक कार्यशाला आयोजित की गई। उन्होंने बताया कि अब विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणामों का पाठ्यक्रम उद्देश्यों (Course Outcomes) से तुलनात्मक विश्लेषण किया जाएगा, ताकि यह आकलन किया जा सके कि निर्धारित शैक्षणिक उद्देश्यों की प्राप्ति हुई है या नहीं। इसके लिए IQAC कार्यालय द्वारा एक विस्तृत पॉलिसी डॉक्यूमेंट तैयार किया जाएगा, जो NAAC मूल्यांकन में बेहतर ग्रेड प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020, नैक मूल्यांकन, NIRF रैंकिंग तथा वैश्विक गुणवत्ता मानकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस पहल की शुरुआत की गई है। विश्वविद्यालय में गुणवत्ता उन्नयन एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए आईक्यूएसी निरंतर नवाचारपूर्ण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता एवं सूत्रधार वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के. के. दवे ने कहा कि परिणाम आधारित शिक्षण प्रणाली की अवधारणा विश्व स्तर पर “Washington Accord 1989” के बाद और अधिक महत्वपूर्ण बनी, जिसमें शिक्षा की गुणवत्ता एवं अधिगम परिणामों को अंतरराष्ट्रीय मानकों से जोड़ने पर बल दिया गया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 भी विद्यार्थियों की वास्तविक अधिगम उपलब्धियों, कौशल विकास तथा बहुआयामी शिक्षा पर केंद्रित है। प्रायोगिक सत्रों के दौरान उन्होंने प्रतिभागियों को कोर्स ऑब्जेक्टिव्स एवं आउटकम्स की प्रभावी मैपिंग की प्रक्रिया का प्रशिक्षण प्रदान किया।

दोनों दिनों में आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से परिणाम आधारित शिक्षण प्रणाली की मूल अवधारणा, ब्लूम्स वर्गीकरण पद्धति, पाठ्यक्रम परिणाम एवं कार्यक्रम परिणाम मानचित्रण, उपलब्धि निर्धारण तथा परिणाम मूल्यांकन के व्यावहारिक पक्षों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षण, अधिगम एवं मूल्यांकन प्रक्रियाओं का परिणाम आधारित होना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यशाला के संयोजक एवं भू-विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. रितेश पुरोहित ने बताया कि कार्यशाला में पाठ्यक्रम परिणाम, कार्यक्रम परिणाम, कार्यक्रम विशिष्ट परिणाम, ब्लूम्स वर्गीकरण पद्धति, परिणाम मानचित्रण, मूल्यांकन तकनीकों तथा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) आधारित पाठ्यक्रम निर्माण जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को परिणाम आधारित शिक्षण एवं मूल्यांकन प्रणाली के लिए दक्ष बनाना है।

द्वितीय दिवस के तकनीकी सत्रों में प्रबंध संकाय के संचालक प्रो. हनुमान प्रसाद, फिजिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. घनश्याम पुरोहित, कुलसचिव डॉ. वी. सी. गर्ग, परीक्षा नियंत्रक डॉ. मुकेश बारबर, डॉ. शिल्पा वार्डिया एवं डॉ. अंजलि सिंह ने विभिन्न सत्रों का संचालन करते हुए परिणाम उपलब्धि, व्यावहारिक अभ्यास एवं मूल्यांकन पद्धतियों पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को परिणाम आधारित पाठ्यक्रम निर्माण एवं मूल्यांकन की व्यावहारिक गतिविधियों से भी अवगत कराया गया।

अंत में अर्थशास्त्र विभाग की सह आचार्य डॉ. नेहा पालीवाल ने दो दिवसीय कार्यशाला का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप आयोजित इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षकों, विभागाध्यक्षों, अधिष्ठाताओं, IQAC सदस्यों एवं शैक्षणिक प्रशासकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
 

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