डॉ रावत ने उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा संसद में उठाया

राजकीय बालिका महाविद्यालय, खेरवाड़ा का उदाहरण बताया, जहां शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं
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Dr Mannalal Rawat

उदयपुर 2 फरवरी 2026। सांसद डॉ मन्नालाल रावत ने सोमवार को संसद में उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाया और कहा कि इससे न केवल शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि युवाओं के रोजगार अवसर भी सीमित हो रहे हैं।

सांसद डॉ रावत ने नियम 377 के अधीन जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें हाल ही में अपने संसदीय क्षेत्र अंतर्गत राजकीय बालिका महाविद्यालय, खेरवाड़ा, जिला उदयपुर में प्रवास का अवसर प्राप्त हुआ, जहां पढ़ने वाली आदिवासी छात्राओं द्वारा अवगत कराया गया कि महाविद्यालय में शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं।  इस कारण उनकी पढ़ाई एवं शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रहीं है।

सांसद डॉ रावत ने बताया कि यह केवल एक उदाहरण है, इस प्रकार की स्थिति केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के लगभग सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में भी है। देश में करोड़ों युवा उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिन्हें अमृत पीढ़ी कहा जा रहा है। इनके कौशल विकास, शैक्षणिक समझ और समग्र व्यक्तित्व निर्माण में अनुभवी एवं स्थायी शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। परंतु शिक्षकों की भारी कमी के कारण न केवल शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि युवाओं के रोजगार अवसर भी सीमित हो रहे हैं। 

सांसद डॉ रावत ने कहा कि यदि इन रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए तो इससे युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। सांसद डॉ रावत ने सरकार से आग्रह है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से सभी राज्यों के विश्वविद्यालय महाविद्यालय में शिक्षकों के रिक्त पदों को शीघ्रातिशीघ्र भरने के निर्देश दिया जावें तथा केंद्र सरकार द्वारा भी विशेष केंद्रीय सहायता प्रदान की जावें।

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