जापान की खूबसूरती के बीच देखने को मिला था धर्मेंद्र और माला सिन्हा का रोमांस, 58 साल पुराना ये गाना आज भी लोगों की जुबां पर

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जापान की खूबसूरती के बीच देखने को मिला था धर्मेंद्र और माला सिन्हा का रोमांस, 58 साल पुराना ये गाना आज भी लोगों की जुबां पर 

Milti Hai Zindgi Mein Moohabbat Kabhi-Kabhi : हिंदी सिनेमा ने ऐसे कई गाने दिए हैं जो अपने अनोखे अंदाज़ और उनसे जुड़ी भावनाओं की वजह से हमेशा याद किए जाते हैं। आज हम 1968 में रिलीज़ हुए ऐसे ही एक गाने के बारे में बात करेंगे। स्क्रीन पर दो बड़े स्टार, विदेश की लोकेशन, शानदार नज़ारे और लता मंगेशकर की सुरीली आवाज इन सबने मिलकर एक ऐसा जादू पैदा किया कि यह गाना दशकों बाद भी लोगों की ज़ुबान पर रहता है। 

अट्ठावन साल पहले, धर्मेंद्र और माला सिन्हा की जोड़ी ने इसी गाने में अपनी रोमांटिक केमिस्ट्री से लोगों का दिल जीत लिया था। इस गाने की एक खास बात यह थी कि दोनों कलाकार जापानी गुड़ियों के लिबास में नज़र आए थे। आज भी, क्लासिक हिंदी संगीत के शौकीनों के बीच इस गाने की एक खास जगह है।

जापान की खूबसूरती के बीच धर्मेंद्र और माला सिन्हा का रोमांस

हम बात कर रहे हैं 1968 में आई फिल्म 'आंखें' की, जिसके डायरेक्टर रामानंद सागर थे। इसमें धर्मेंद्र और माला सिन्हा ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। दर्शकों को न सिर्फ़ इन दोनों स्टार्स की रोमांटिक केमिस्ट्री पसंद आई, बल्कि जापानी गुड़ियों के रूप में उनका लुक भी बहुत भाया। इसके बोल साहिर लुधियानवी ने लिखे थे, आवाज़ लता मंगेशकर की थी और संगीत रवि ने दिया था।

नज़ीर काज़मी के एक शेर से प्रेरित लाइन

"मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी-कभी" गाने के बोल प्यार मिलने की खुशी और उसके महत्व को बताते हैं। यह गाना कहता है कि ज़िंदगी में प्यार का होना इंसान को खुशनसीब बनाता है, क्योंकि यह हर किसी को आसानी से नहीं मिलता। साहिर लुधियानवी ने इसके बोल बहुत खूबसूरती से लिखे थे। इस गाने के बारे में एक और दिलचस्प बात यह है कि साहिर ने इसकी शुरुआती लाइनें (मुखड़ा) लिखते समय कवि नज़ीर काज़मी के एक शेर से प्रेरणा ली थी।

ज़िंदगी में प्यार का साथ हर किसी को आसानी से नहीं मिलता। साहिर लुधियानवी ने अपने बोलों के ज़रिए इस भावना को बहुत खूबसूरती से पेश किया, जबकि रवि के संगीत और लता मंगेशकर की आवाज़ ने इसे सचमुच यादगार बना दिया। इस फिल्म के अन्य लोकप्रिय गानों में "गैरों पे करम अपनों पे सितम," "तुझको रखे राम तुझको अल्लाह रखे," और "उस मुल्क की सरहद को" शामिल हैं। 

"ऐ दिल, किसे नसीब यह तौफ़ीक़-ए-इज़तिराब / मिलती है ज़िंदगी में यह राहत कभी-कभी" - इन पंक्तियों का मतलब है कि दिल की ऐसी गहरी बेचैनी और तड़प को महसूस करने का मौका हर किसी को नहीं मिलता। साहिर ने गाना लिखते समय अपने खास अंदाज में इन भावनाओं को बहुत खूबसूरती से पेश किया।

1968 की सुपरहिट फ़िल्म; एक ऐसा गाना जिसे आज भी लाखों बार देखा जाता है

'आंखें' फ़िल्म में धर्मेंद्र और माला सिन्हा के साथ-साथ महमूद, कुमकुम, नज़ीर हुसैन, ललिता पवार और जीवन जैसे कलाकार थे। यह एक स्पाई थ्रिलर फ़िल्म थी जिसमें मनोरंजन और रोमांच का बेहतरीन मेल था। यह फ़िल्म 1968 की सुपरहिट फ़िल्मों में से एक थी; साथ ही, रामानंद सागर को 1969 में इसके लिए बेस्ट डायरेक्टर का फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड मिला।

 इस गाने की ज़बरदस्त लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके वीडियो को 2.8 करोड़ (28 मिलियन) से ज़्यादा बार देखा जा चुका है। यही वजह है कि जब भी क्लासिक हिंदी रोमांटिक गानों की बात होती है, तो लता मंगेशकर की आवाज़ वाला यह गाना सुनने वालों को पुरानी यादों में ले जाता है।

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