महिला सशक्तिकरण की आवाज बना नाटक ‘अस्तित्व

इस एकल नाट्य प्रस्तुति में नाट्यांश की कलाकार रेखा सिसोदिया ने अपने जीवंत अभिनय से दर्शकों को बाँधे रखा

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उदयपुर, 29 मार्च 2026। मार्मिक संवादों और सवालों के साथ नाट्यांश नाटकीय एवं प्रदर्शनीय कला संस्थान, उदयपुर की ओर से एकल नाटक “अस्तित्व” का मंचन किया गया। नाटक का मंचन हिंदुस्तान जिंक और मंजरी फाउंडेशन द्वारा संचालित महिलाओं की नाट्य कार्यशाला “उठोरी जागृति सखी मंच” के आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किया गया। नाट्य प्रस्तुति के समय कार्यशाला प्रमुख विरेन सिंह और मंजरी फाउंडेशन के कार्यक्रम अधिकारी शिव ओम उपस्थित रहे।

यह नाटक औरत की मनोदशा और वास्तविक स्थिति का शब्दों के माध्यम से रचा गया एक ऐसा दर्पण है, जिसमें हर नारी को अपना प्रतिबिंब दिखना स्वाभाविक है। नारी जीवन के संघर्ष और आत्मसम्मान के लिए समाज में निहित खोखली, विकृत और संकीर्ण मानसिकता से चले आ रहे द्वंद्व को दिखाने का यह एक प्रयास है। एक औरत यदि अपने अनुरूप निर्णय लेकर जीवन जीना चाहे या जीवन में कुछ करना चाहे, तो शादी से पहले अपने ही परिवार द्वारा और शादी के बाद पति और ससुराल वालों के द्वारा उसे सिर्फ इसलिए रोक दिया जाता है कि वह एक लड़की या औरत है। जबकि लड़कों को इन सभी बंदिशों से जन्मजात स्वतंत्रता प्राप्त होती है। सभी तरह की बंदिशें होने के बाद भी, औरत निरंतर अपने वजूद, अपने अस्तित्व की खोज में लगी रहती है।

नाटक में महिलाओं के ऐसे संघर्ष को उजागर करने का प्रयास किया गया है, जो उनके जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है। लड़कियाँ अपनी माँ की कोख से ही अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ना सीख जाती हैं। यह नाटक देश में व्याप्त कन्या भ्रुण हत्या, लिंग भेद, कार्यालयों और रास्तों में होने वाला दुर्व्यवहार, घरेलू हिंसा और दहेज प्रथा जैसी कई कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाता है।

मंचन के पश्चात हुए रंग-संवाद में कार्यशाला प्रमुख विरेन सिंह ने कलाकारों को बधाई देते हुए कहा, “बतौर पुरुष मैं भी इस नाटक को देखते हुए महसूस कर रहा था कि महिला होना कितना कठिन है, कितना संघर्ष है। मैं इस पर कितना ही बोलूँ, वह भाषण ही होगा। परंतु यह भी सच है कि नाटक की पूरी कहानी हर महिला के जीवन को दर्शाती है।”

मंजरी फाउंडेशन के कार्यक्रम अधिकारी शिव ओम ने नाटक के मंचन पर बधाई देते हुए कहा, “नाटक की कलाकार रेखा जी ने महिलाओं के जीवन के अनछुए पहलुओं का जीवंत प्रस्तुतिकरण किया।” वहीं दर्शकों में एक महिला इस नाटक को अपनी ही जिंदगी का मंचीय प्रस्तुतिकरण बताते हुए भावुक होकर रो पड़ीं।

इस एकल नाट्य प्रस्तुति में नाट्यांश की कलाकार रेखा सिसोदिया ने अपने जीवंत अभिनय से दर्शकों को बाँधे रखा। एक घंटे की इस प्रस्तुति में रेखा ने 12 किरदार अकेले ही निभाए। उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों को अंत तक प्रभावित किया। इस नाटक का लेखन व निर्देशन अमित श्रीमाली ने किया।

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